आप में से बहुत सारे लोगों के पास क्रेडिट कार्ड (Credit Card) होगा और जिनके पास नहीं है वह जरूर ये सोच रहे होंगे कि जल्द से जल्द क्रेडिट कार्ड लिया जाए. जब एजेंट लोगों को क्रेडिट कार्ड देने के लिए फोन करते हैं तो अक्सर वह मुफ्त में क्रेडिट कार्ड देने की पेशकश करते हैं. वह ना तो एनुअल फीस लेते हैं ना ही ज्वाइनिंग फीस. ऊपर से आपको कैशबैक और रिवॉर्ड प्वाइंट मिलेंगे, वो अलग. अब सवाल ये उठता है कि जब क्रेडिट कार्ड कंपनियां सब कुछ मुफ्त में ही दे रही हैं तो उनकी कमाई कैसे होती है?
1/12क्रेडिट कार्ड कंपनियां उन लोगों पर भारी-भरकम ब्याज लगाती हैं, जो अपना बकाया चुकाने से चूक जाते हैं. क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला ब्याज भी 30 फीसदी से लेकर 50 फीसदी के बीच हो सकता है. ऐसे में कंपनियां एक-दो महीने में ही पूरे साल की कमाई कर सकती हैं.
2/12कई बार लोग ईएमआई पर कुछ तरह के प्रोडक्ट खरीदते हैं या फिर अपने बकाया या किसी ट्रांजेक्शन को ईएमआई में बदला लेते हैं. इससे भी कंपनियों को ब्याज मिलता है, जो उनकी कमाई का एक जरिया होता है.
3/12क्रेडिट कार्ड कंपनियों की तरफ से यूजर्स को आकर्षक दरों पर लोन भी ऑफर किया जाता है. इस लोन से भी कंपनियों को ब्याज मिलता है, जिससे उनकी कमाई होती है.
4/12जब भी लोग अपनी किसी ट्रांजेक्शन को ईएमआई में बदलवाते हैं या फिर कोई लोन लेते हैं, तो उस पर एक प्रोसेसिंग फीस चुकानी होती है. यह भी क्रेडिट कार्ड कंपनियों की कमाई का एक जरिया होता है.
5/12क्रेडिट कार्ड का एक फीचर ये भी होता है कि उसके जरिए आप एटीएम से कैश निकाल सकते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2022 में लोगों ने हर महीने 300-400 करोड़ रुपये क्रेडिट कार्ड से निकाले थे. इस कैश को जिस दिन ग्राहक निकालता है, उसी दिन से उस पर भारी-भरकम ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जिससे क्रेडिट कार्ड कंपनियां पैसे कमाती हैं.
6/12क्रेडिट कार्ड कंपनियों की कमाई का दूसरा तरीका है इंटरचेंज इनकम. जब भी कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करता है तो मर्चेंट पर एक मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर फीस लगाई जाती है. यह फीस ट्रांजेक्शन वैल्यू की 1-3 फीसदी के बीच होती है.
7/12अगर कोई अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल विदेश जाकर करता है, तो उस पर फॉरेन ट्रांजेक्शन चार्ज भी लगता है. इससे भी क्रेडिट कार्ड कंपनियां पैसे कमाती हैं.
8/12कुछ क्रेडिट कार्ड कंपनियां बैलेंस ट्रांसफर की भी सुविधा देती हैं. इसके तहत आप अपने एक क्रेडिट कार्ड से दूसरे क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान कर सकते हैं. इसके बदले कंपनी आपसे एक चार्ज लेती है या ईएमआई बनवाने पर ब्याज भी लेती है.
9/12आपने अक्सर देखा होगा कि सेल में किसी खास क्रेडिट कार्ड पर कुछ खास ऑफर दिए जाते हैं. कई बार कुछ खास कंपनियों के प्रोडक्ट खरीदने पर कुछ क्रेडिट कार्ड स्पेशल ऑफर देते हैं. ऐसी कंपनियों के साथ क्रेडिट कार्ड कंपनियों का टाईअप होता है. कंपनियों की तरफ से क्रेडिट कार्ड कंपनी को हर खरीदारी पर कमीशन दिया जाता है.
10/12जब भी आप क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम करने जाते होंगे, वहां उन प्वाइंट्स के बदले कुछ प्रोडक्ट खरीदने के विकल्प भी आपको दिखते होंगे. इनसे भी कंपनी पैसे कमाती है.
11/12कई क्रेडिट कार्ड कंपनियां अपने ग्राहकों से एक मेंबरशिप फीस भी लेती हैं. यह फीस कुछ बैंक एक निश्चित सीमा तक ट्रांजेक्शन के बाद ग्राहकों को वापस कर देते हैं, लेकिन कुछ बैंक ऐसा नहीं करते हैं. इसे कई बैंक एनुअल फीस भी कहते हैं. ऐसे में मेंबरशिप फीस भी क्रेडिट कार्ड कंपनियों की कमाई का एक हिस्सा होती है. क्रेडिट कार्ड पर जितने ज्यादा बेनेफिट होते हैं, उस पर लगने वाली फीस उतनी ही अधिक होती है.
12/12कुछ बैंक ग्राहकों से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए एक ज्वॉइनिंग फीस भी लेते हैं. यह भी उनकी एक तरह की कमाई ही है. हालांकि, बहुत कम ही बैंक हैं जो ज्वाइनिंग फीस लेते हैं, अधिकतर बैंक या तो ज्वाइनिंग फीस नहीं लेते हैं या फिर उस फीस के बराबर के बेनेफिट शुरुआत में ही ग्राहकों को दे देते हैं.