केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड CBDT ने फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के दौरान फेसलेस असेसमेंट के लिए नए पैरामीटर जारी किए गए हैं. अब से इन्ही पैरामीटर के हिसाब से फेसलेस असिसमेंट किया जाएगा. इसके साथ ही सीबीडीटी ने यह भी बताया है कि नेशनल ई-असेसमेंट सेंटर (NeAC) द्वारा स्क्रूटनी कब की जाएगी या कब सेंट्रल चार्ज के लिए ट्रांसफर की जाएगी.
1/5बता दें सीबीडीटी की ओर से जारी किए गए नए नोटिफिकेशन में विभिन्न स्थितियों और पैरामीटर्स को स्पष्ट किया है, जिनके आधार पर स्क्रूटनी के लिए मामले सिलेक्ट किए जाएंगे.
2/5सीबीडीटी ने जानकारी देते हुए बताया कि जारी किए गए पैरामीटर्स के आधार पर कंपल्सरी स्क्रूटनी के लिए रिटर्न्स के लिए सलेक्शन की प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी.
3/5बोर्ड की ओर से जारी किए गए नए पैरामीटर्स के हिसाब से अब उनमें सर्वे, सर्च व सीजर, ऐसे मामले जिनमें सेक्शन 148 के तहत नोटिस जारी हुआ है, रजिस्ट्रेशन के रिवोकेशन से संबंधित या सेक्शन 12A/10(23C) के तहत अथॉरिटीज की मंजूरी से संबंधित मामले और ऐसे मामले जिनमें सेक्शन 142(1) के तहत नोटिस जारी हुआ है, शामिल हैं.
4/5टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय अगर कुछ गड़बड़ी हो जाती है तो उस मामले को स्क्रूटनी के लिए डाल दिया जाता है. स्क्रूटनी वाले मामलों में असेसमेंट के दौरान टैक्सपेयर को कई बार आयकर ऑफिस में अधिकारियों के पास पूछताछ के लिए जाना पड़ता है. जानकारों का कहना है कि इस सिस्टम से भ्रष्टाचार भी पैदा होता है. बड़े मामलों को गलत तरीके से निपटाने की बात कही जाती थी. लेकिन फेसलेस असेसमेंट से टैक्सपेयर को स्क्रूटनी के लिए टैक्स ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न ही अधिकारियों के सामने पेश होना पड़ता है.
इस सिस्टम में जिस मामले को स्क्रूटनी के लिए चुना जाता है, टैक्सपेयर को सभी डॉक्यूमेंट ऑनलाइन जमा करने होते हैं. इस सिस्टम में मामले के लिए असेसमेंट ऑफिसर को भी कहीं से भी चुना जाता है.
5/5वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019 के अपने बजट भाषण में फेसलेस ई-असेसमेंट स्कीम का ऐलान किया था. इस स्कीम को अक्टूबर 2019 लागू किया गया.