अगर आप भी म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करते हैं और फ्यूचर के लिए पक्की आमदनी चाहते हैं, तो आपके सामने दो शानदार ऑप्शन हैं– SIP और SWP. लेकिन आमतौर पर लोग यही नहीं समझ पाते हैं दोनों में काफी बड़ा फर्क होता है. इनका निवेश करने का फंडा ही डिफरेंट होता है. तो अब आप भी इस कंफ्यूजन में हैं कि SIP या SWP में से कौन बेस्ट ऑप्शन हैं, तो इसके बारे में हम डिटेल में आपको बताएंगें.
1/8म्यूचुअल फंड में निवेश की बात आती है, तो हर कोई SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) की तरफ ही रुख करता है.एसआईपी के जरिए हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम जमा करेंगे तो लंबे समय में एक बड़ा फंड बन सकता है. लेकिन क्या आपने SWP (सिस्टमैटिक विद्ड्रॉल प्लान) के बारे में सुना है? अगर सुना भी है नाम तो क्या आप जानते हैं ये क्या क्या है और एसआईपी से ये कितना अलग है.तो आज जानेंगे SIP और SWP का फर्क जो आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग के दो सबसे बड़े हथियार साबित हो सकते हैं,एक पैसा बनाने के लिए, तो दूसरा उसी बने हुए पैसे से रेगुलर इनकम पाने के लिए बना है.
2/8अक्सर लोग इन SIP और SWP में कन्फ्यूज हो जाते हैं या फिर उनको समझ ही नहीं आता है कि निवेश के लिहाज से उनके लिए क्या बेहतर है. तो फिर चलिए, आज इस कन्फ्यूजन को ही हम जड़ से खत्म करते हैं और समझते हैं कि SIP और SWP में क्या फर्क हैं,और कब आपको किसका यूज करना चाहिए ताकि आपका पैसा आपके लिए सही तरीके से काम करे.
3/8SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में आप हर महीने (या तय समय पर) एक फिक्स रकम अपनी पसंद की म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश करते हैं.एसआईपी में निवेश से नियमित इन्वेस्टमेंट की आदत पड़ती है.इसमें निवेश पर जो रिटर्न मिलता है, वह भी दोबारा निवेश हो जाता है, जिससे आपका पैसा तेजी से बढ़ता है.
4/8वैसे तो एसआईपी में बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होता है, क्योंकि आप हर लेवल पर खरीदते हैं. इसके अलावा अभी पैसा कमाने वाले फ्यूचर की हर जरूरत को पूरा करने के लिए इसमें निवेश करते हैं.सीधे शब्दों में, पैसा बनाने और जोड़ने का यह सबसे अच्छा तरीका है.
5/8SWP यानी सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक शानदार ऑप्शन होता है,खासकर जो नियमित इनकम चाहते हैं. इसमें आप हर महीने या तिमाही तय रकम निकाल सकते हैं.स्पेशली वो जो रिटायर हो चुके लोगों के लिए यह स्कीम बहुत फायदेमंद होती है, क्योंकि इससे उनकी इनकम बनी रहती है और उनका मूल निवेश सुरक्षित रहता है. ये निवेश खत्म किए बिना कमाई का साधन बनता है.
6/8वैसे इसमें इक्विटी फंड से एक साल बाद निकाली गई रकम पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के नियम लागू होते हैं, जो कुछ हद तक फायदेमंद हो सकता है. रिटायर हो चुके लोग हैं या फिर जिनके पास बढ़िया फंड है और अब उन्हें अपने खर्चों के लिए हर मंथ एक फिक्स आय चाहिए, उनके लिए ये बेस्ट है. सीधे शब्दों में, जमा किए हुए पैसे से रेगुलर इनकम पाने का यह एक शानदार तरीका है.
7/8अक्सर पहली बार निवेश की दुनिया में कदम रखने वाले इस बात को लेकर कंफ्यूज रहते हैं कि वो SIP करें या SWP, जिससे आपकी फ्यूचर की जरूरत पूरी हो सकें.तो आपको बता दें कि SIP उनके लिए है जो हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाकर लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, एसआईपी युवाओं और नौकरीपेशा लोगों के लिए बेस्ट मानते हैं.वहीं, SWP उन लोगों के लिए अच्छी है जिनके पास पहले से निवेश किया हुआ पैसा है और अब उन्हें फंड हर मंथ एक फिक्स इनकम चाहिए होती है, जैसे कि रिटायर्ड व्यक्ति. सिंपल शब्दों में कहें तो SIP आपको कंपाउंडिंग का लाभ देता है, जबकि SWP नियमित कमाई का जरिया बनता है.
8/8वैसे अब आप समझ गए होंगे कि SIP और SWP दोनों ही म्यूचुअल फंड के मनी मेकिंग वाले ऑप्शन हैं.हालांकि इन दोनों का यूज अलग-अलग वित्तीय लक्ष्यों के लिए करते हैं. SIP आपके पैसे को बढ़ाने में मदद करता है, तो SWP उसी बढ़े हुए पैसे से आपको नियमित आय दिलाता है.