जब से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की है, तब से तमाम बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों को भी कम करना शुरू कर दिया है. ऐसे अगर आप अपनी रकम को लॉन्ग टर्म के लिए किसी ऐसी जगह पर निवेश करना चाहते हैं जहां आपको बेहतर रिटर्न भी मिल सके तो इस बार बैंक की बजाय पोस्ट ऑफिस में निवेश कीजिए. यहां National Savings Certificate यानी NSC में आपको ब्याज भी बेहतर मिलेगा और इनकम टैक्स बेनिफिट भी मिलेगा. जानिए ₹100000 से ₹500000 तक लगाने पर कितना मिलेगा रिटर्न.
1/9पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट डिपॉजिट स्कीम है, जिसमें 5 साल के लिए निवेश किया जाता है. मौजूदा समय में इस पर 7.7% ब्याज मिल रहा है.
2/9अगर आप एनएससी में 5,00,000 रुपए एकमुश्त जमा करते हैं तो 7.7% के हिसाब से इस पर 2,24,517 रुपए का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी रकम 7,24,517 रुपए होगी.
3/9अगर आप एनएससी में 4,00,000 रुपए निवेश करते हैं तो 7.7% के हिसाब से इस पर 1,79,614 रुपए का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी रकम 5,79,614 रुपए मिलेगी.
4/9एनएससी में 3,00,000 रुपए निवेश करने पर 7.7% के हिसाब से 1,34,710 रुपए का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी रकम 4,34,710 रुपए मिलेगी.
5/92,00,000 रुपए का निवेश इस स्कीम में करते हैं तो 7.7% के हिसाब से इस पर 89,807 रुपए का ब्याज मिलेगा और मैच्योरिटी रकम 2,89,807 रुपए मिलेगी.
6/9NSC में अगर आप 1,00,000 रुपए का निवेश करते हैं तो आपको 7.7 फीसदी ब्याज के हिसाब से मैच्योरिटी पर 1,44,903 रुपए मिलेंगे. इसमें आपको ब्याज के तौर पर 44,903 रुपए मिलेंगे.
7/9बता दें कि स्कीम में 1000 रुपए से इन्वेस्टमेंट शुरू किया जा सकता है, अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है. NSC में निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है.
8/9कोई भी नागरिक इसमें अकाउंट खुलवा सकता है. ज्वाइंट अकाउंट की भी सुविधा है. नाबालिग या अस्वस्थ दिमाग वाले व्यक्ति की ओर से अभिभावक इसमें निवेश कर सकते हैं. वहीं 10 वर्ष से अधिक उम्र के नाबालिग अपने नाम से इसे खरीद सकते हैं. NSC को, जारी होने से लेकर मैच्योरिटी डेट के बीच एक बार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकता है.
9/9पNSC स्कीम 5 साल में मैच्योर होती है. एक बार इसमें निवेश कर दिया तो पूरे 5 साल तक वही ब्याज दर लागू रहती है जो निवेश के दौरान लागू थी. एनएससी में प्रीमैच्योर क्लोजर का ऑप्शन नहीं है. विशेष परिस्थितियों जैसे अकाउंट होल्डर की मृत्यु, जॉइंट अकाउंट की स्थिति में दोनों अकाउंट होल्डर्स की मौत होने या सरकार या कोर्ट के किसी आदेश पर ही इसे समय से पहले बंद किया जा सकता है.