पश्चिम बंगाल (West Bengal) के सरकारी कर्मचारियों की 4 साल पुरानी मांग को पश्चिम बंगाल सरकार ने मान लिया है. सरकार ने नवंबर 2015 में बने छठे वेतन आयोग (Sixth Pay Commission) की सिफारिशों को लागू करने का फैसला किया है, जो आज से प्रभावी हो गई हैं.
1/5आपको बता दें कि इस फैसला अगस्त में हुआ था कि राज्य कर्मचारियों को 1 जनवरी 2020 से नए वेतनमान का फायदा दिया जाए. दरअसल, TMC सरकार ने नवंबर 2015 में बने छठे वेतन आयोग के कार्यकाल को 2019 तक विस्तार दिया था. राज्य सरकार के कर्मचारियों का DA 125% हो चुका है.
2/5छठा वेतन आयोग लागू होने से सरकारी खजाने पर 10 हजार करोड़ रुपए का बोझ आएगा. आयोग के चेयरमैन प्रो. अभिरूप सरकार ने अगस्त में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी.
3/5इससे करीब 3 लाख कर्मचारियों और कई दूसरे विभागों में काम कर रहे लोगों को फायदा होगा. इससे पहले पश्चिम बंगाल में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में तैनात टीचरों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया था.
4/5राज्य सरकार ने टीचरों के लिए सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (7th Pay Commission) के अनुसार UGC का संशोधित वेतनमान (UGC pay scale) लागू करने की बात कही थी. खास बात यह है कि यह नया वेतनमान भी 1 जनवरी 2020 से लागू हुआ है.
5/5मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के मुताबिक टीचरों की सैलरी बढ़ाने से सरकारी खजाने पर 1 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. यह सरकारी महाविद्यालयों, सरकारी सहायताप्राप्त महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लागू होगा. शिक्षकों को 2016 से 2019 तक की चार साल की अवधि के लिए उनके वेतन की 3 प्रतिशत बढ़ोतरी का लाभ भी मिलेगा.