बुढ़ापा लाइफ का वो पड़ाव जो हर किसी के जीवन में आना है. उम्र के उस पड़ाव पर न तो आपके पास आज जितनी ताकत होगी, न ही क्षमता होगी और न ही आमदनी का ठोस जरिया. इसलिए समझदारी इसमें है कि हम जवानी के दिनों से ही बुढ़ापे की लाइफ की भी प्लानिंग करें और वक्त रहते वो हर व्यवस्था कर लें, जो उस समय में हमारे लिए बहुत जरूरी होगी. इसे ही हम रिटायरमेंट प्लानिंग कहते हैं. लेकिन एक अच्छी रिटायरमेंट प्लानिंग करने के लिए सही स्ट्रैटेजी की जरूरत होती है. यहां जानिए रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े वो 7 गोल्डन रूल्स जिन्हें अगर जवानी पर अपना लिया तो बुढ़ापा मौज से गुजरेगा.
1/7सबसे पहले ये तय करें कि रिटायरमेंट के बाद आपको कितनी रकम की जरूरत होगी. इसमें आपके मासिक खर्च, सेहत से जुड़ी जरूरतें और जीवनशैली के हिसाब से जो भी आपकी जरूरतें हैं, वो सब शामिल होना चाहिए. इसके अलावा आपको महंगाई दर को भी ध्यान में रखना होगा क्योंकि आज जितनी रकम में आप बेहतर लाइफ जी रहे हैं, उसी लाइफ को आगे जीने के लिए आपको ज्यादा पैसों की जरूरत होगी. एक बार अगर आप अपने रिटायरमेंट फंड का अनुमान लगा लेंगे तो आप आसानी से फाइनेंशियल प्लानिंग कर पाएंगे.
2/7आप जितनी जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाना शुरू करेंगे, उतना ही आपके लिए बेहतर होगा. अगर आपकी सैलरी कम है, तो निवेश की शुरुआत छोटी रकम से करें और इस निवेश को बनाए रखें. जैसे-जैसे आमदनी बढ़े, वैसे-वैसे आप अपने निवेश को भी बढ़ाते रहें. आप जितनी जल्दी निवेश की शुरुआत करेंगे, उतने लंबे समय तक इन्वेस्टमेंट कर पाएंगे और कंपाउंडिंग का ज्यादा से ज्यादा फायदा ले पाएंगे.
3/7अब सवाल है कि कहां निवेश करें? रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए आप EPF में VPF के जरिए कॉन्ट्रीब्यूशन को बढ़ाकर अच्छा खासा रिटायरमेंट फंड जोड़ सकते हैं. इसके अलावा NPS में निवेश करके अपने लिए रिटायरमेंट फंड और पेंशन, दोनों का इंतजाम कर सकते हैं. वेल्थ क्रिएशन के लिहाज से SIP के जरिए Mutual Funds में निवेश कर सकते हैं और बुढ़ापे तक बड़ा फंड जोड़ सकते हैं. इसके अलावा पीपीएफ, फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी स्कीम के जरिए भी अपने भविष्य को सिक्योर कर सकते हैं.
4/7रिटायरमेंट के बाद भी महंगाई दर आपके खर्चों को प्रभावित करेगी. इसलिए निवेश के दौरान ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दें, जो महंगाई दर से बेहतर रिटर्न दें. इसके लिए आप फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं.
5/7रिटायरमेंट के बाद स्वास्थ्य संबंधी खर्च आमतौर पर बढ़ जाते हैं, इसलिए इस खर्च को बिल्कुल इग्नोर न करें. इनसे निपटने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लें. इससे मेडिकल इमरजेंसी में आपको आर्थिक मदद मिलती है और आपकी बचत सुरक्षित रहती है.
6/7आपने अपनी जवानी में जो भी लोन लिए हैं, उन्हें रिटायरमेंट से पहले चुकाने की कोशिश करें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके ऊपर किसी तरह के कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी न रहे. ऐसा करने से आपकी रिटायरमेंट की बचत पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा.
7/7समय-समय पर अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग की समीक्षा करें. ये देखें कि आपका निवेश सही दिशा में है या नहीं. जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव करें.