म्यूचुअल फंड SIP लंबी अवधि में दौलत बनाने का एक शानदार तरीका है. ये आसान है, अनुशासित है और कम्पाउंडिंग का जादू दिखाता है. लेकिन, "बस SIP शुरू कर दो और भूल जाओ" वाली सोच हमेशा काम नहीं करती. अक्सर लोग कुछ ऐसी आम गलतियां कर बैठते हैं, जो उनके लाखों के मुनाफे को नुकसान में बदल सकती हैं. चलिए जानते हैं वो 5 गलतियां जिनसे आपको हमेशा बचना चाहिए.
1/9सबसे आम गलती है दोस्त, रिश्तेदार या किसी यूट्यूबर के कहने पर किसी भी फंड में SIP शुरू कर देना. हर फंड अलग होता है और हर किसी के वित्तीय लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता भी अलग होती है. हो सकता है जो फंड आपके दोस्त के लिए सही हो, वो आपके लिए बिल्कुल गलत हो. हमेशा अपनी जरूरत के हिसाब से फंड चुनें. अगर आप नए हैं, तो Nifty 50 इंडेक्स फंड जैसे कम जोखिम वाले विकल्प से शुरुआत करें.
2/9ये सबसे बड़ी और सबसे महंगी गलती है. जब शेयर बाजार गिरता है, तो लोग घबरा जाते हैं और अपनी SIP रोक देते हैं या पैसा निकाल लेते हैं. जबकि, यही असली मौका होता है. बाजार गिरने का मतलब है कि आपको उसी SIP की रकम में म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं. जब बाजार वापस चढ़ता है, तो यही ज्यादा यूनिट्स आपको जबरदस्त मुनाफा कमाकर देती हैं. गिरते बाजार में SIP बंद करना मतलब सेल में डिस्काउंट पर सामान खरीदने से मना करना.
3/9SIP कोई लॉटरी या 20-20 का मैच नहीं है, ये एक टेस्ट मैच है. कम्पाउंडिंग का असली जादू लंबी अवधि (कम से-कम 7-10 साल) में ही दिखता है. अक्सर लोग 2-3 साल में अच्छा रिटर्न न मिलने पर निराश हो जाते हैं और पैसा निकाल लेते हैं. याद रखें, SIP का मकसद जल्दी अमीर बनना नहीं, बल्कि धीरे-धीरे और निश्चित रूप से अमीर बनना है. अपने निवेश को बढ़ने का समय दें.
4/9एक बार SIP शुरू करके उसे सालों तक भूल जाना भी सही रणनीति नहीं है. आपको साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू जरूर करना चाहिए. देखें कि आपका फंड कैसा प्रदर्शन कर रहा है. क्या वो अपनी कैटेगरी के दूसरे फंड्स से बहुत ज्यादा पिछड़ तो नहीं रहा है? क्या आपके वित्तीय लक्ष्यों में कोई बदलाव आया है? समय-समय पर समीक्षा करके आप खराब प्रदर्शन करने वाले फंड से निकलकर बेहतर फंड में जा सकते हैं.
5/9मान लीजिए आपने 10 साल पहले 5,000 रुपए की SIP शुरू की थी. आज 10 साल बाद भी आपकी SIP 5,000 रुपए की ही है, जबकि आपकी सैलरी कई गुना बढ़ चुकी है. ये एक बड़ी गलती है. अपनी आय बढ़ने के साथ-साथ हर साल अपनी SIP की रकम में 10% की बढ़ोतरी करने की कोशिश करें. इसे 'स्टेप-अप SIP' कहते हैं. यह छोटा सा कदम आपके फाइनल कॉर्पस में कई लाखों का फर्क पैदा कर सकता है.
6/9हां, अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है, तो गिरते बाजार में अपनी SIP की रकम बढ़ाना या एकमुश्त पैसा लगाना (Lumpsum Investment) एक बहुत ही स्मार्ट रणनीति हो सकती है. इसे 'एवरेजिंग' कहते हैं.
7/9बहुत ज्यादा बार-बार रिव्यू करने से भी पैनिक हो सकता है. साल में एक बार या छह महीने में एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना पर्याप्त है.
8/9जब आप SIP शुरू करते हैं, तो आप बैंक को हर साल अपनी SIP की रकम एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 10%) या एक निश्चित राशि (जैसे 500 रुपए) से अपने आप बढ़ाने का निर्देश दे सकते हैं.
9/9हां, ज्यादातर म्यूचुअल फंड कंपनियां आपको 'SIP Pause' की सुविधा देती हैं, जिससे आप किसी वित्तीय समस्या के समय अपनी SIP को कुछ महीनों (आमतौर पर 1 से 6 महीने) के लिए रोक सकते हैं और बाद में वहीं से दोबारा शुरू कर सकते हैं.