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करीब 50% स्मॉल-कैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे कारोबार कर रहे हैं. (फोटो- पंकज मठपाल, फाउंडर ऑप्टिमा मनी)
पंकज मठपाल, फाउंडर- ऑप्टिमा मनी
स्मॉल-कैप शेयर एक बार फिर निवेशकों के रडार पर हैं. पिछले कुछ सालों में जहां निवेशकों का फोकस मुख्य रूप से लार्ज-कैप कंपनियों पर रहा, वहीं अब तस्वीर बदलती दिख रही है. ऑप्टिमा मनी के संस्थापक पंकज मठपाल का मानना है कि मौजूदा समय में इस सेगमेंट में कई ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न की संभावनाओं की ओर इशारा करते हैं. आकर्षक वैल्यूएशन, मजबूत बैलेंस शीट और सरकार के विकास केंद्रित एजेंडे ने स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है.
दिलचस्प बात यह है कि फिलहाल करीब 50% स्मॉल-कैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे कारोबार कर रहे हैं. ऐसे में जो निवेशक सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहना चाहते, उनके लिए यह सेगमेंट नए अवसर लेकर आ सकता है.

पंकज मठपाल के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह वैल्यूएशन है. इस समय कई स्मॉल-कैप कंपनियां अपने लार्ज-कैप समकक्षों की तुलना में आकर्षक स्तर पर ट्रेड कर रही हैं. अगर आने वाले समय में इन कंपनियों की कमाई मजबूत रहती है, तो इनके वैल्यूएशन में भी सुधार देखने को मिल सकता है. इतिहास भी यही बताता है कि जब वैल्यूएशन का अंतर इतना बढ़ा है, तब स्मॉल-कैप्स ने अक्सर बेहतर प्रदर्शन किया है.
दूसरी बड़ी वजह है सरकार की नीतियां. मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण (Formalisation) को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का फायदा अक्सर छोटी और उभरती कंपनियों को ज्यादा मिलता है. जैसे-जैसे देश में कैपेक्स बढ़ता है और क्रेडिट फ्लो बेहतर होता है, वैसे-वैसे स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होते हैं.
पंकज मठपाल का कहना है कि स्मॉल-कैप्स की कहानी सिर्फ सस्ते वैल्यूएशन तक सीमित नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में इन कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है.
अब कई कंपनियां विस्तार के लिए जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने के बजाय अपने आंतरिक नकदी प्रवाह का उपयोग कर रही हैं. इसका असर उनकी बैलेंस शीट पर साफ दिखाई देता है. मजबूत बैलेंस शीट का मतलब है कम वित्तीय दबाव, बेहतर लाभप्रदता और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की ज्यादा क्षमता.
आंकड़े भी इसी तरफ इशारा करते हैं. FY19 से FY22 के बीच जहां इस सेगमेंट का कुल कैपेक्स करीब ₹2.2 ट्रिलियन था, वहीं FY23 से FY26 के दौरान यह बढ़कर लगभग ₹3.4 ट्रिलियन तक पहुंच गया. दूसरी तरफ नेट डेब्ट-टू-इक्विटी अनुपात FY19 के 0.52x से घटकर FY26 में लगभग शून्य के करीब आ गया है.
पंकज मठपाल के मुताबिक, यह बदलाव दिखाता है कि स्मॉल-कैप कंपनियां अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा वित्तीय अनुशासन के साथ काम कर रही हैं और उनके बिजनेस मॉडल भी ज्यादा टिकाऊ बन रहे हैं.
शेयर बाजार में अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब तेजी सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहती और ज्यादा सेक्टर्स में फैलने लगती है, तब स्मॉल-कैप कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करती हैं.
मौजूदा समय में भी ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं. घरेलू संस्थागत निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ी है. दिसंबर 2016 में जहां स्मॉल-कैप कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी 7.6% थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 10.7% हो गई.
इसके अलावा SIP के जरिए आने वाला नियमित निवेश भी इस सेगमेंट के लिए एक स्थिर पूंजी स्रोत बन रहा है. वहीं खुदरा निवेशकों की सट्टेबाजी में कुछ कमी आने से बाजार ज्यादा संतुलित और स्वस्थ दिखाई दे रहा है.
पंकज मठपाल का मानना है कि अगर बाजार की यह व्यापक भागीदारी बनी रहती है तो स्मॉल-कैप कंपनियों को इसका फायदा मिल सकता है.
स्मॉल-कैप निवेश में अवसर जितने बड़े होते हैं, जोखिम भी उतने ही बड़े हो सकते हैं. ऐसे में सही कंपनियों का चयन सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है.
बाजाज फिनसर्व AMC स्मॉल कैप फंड इसी सोच के साथ एक अनुशासित पांच-स्तरीय निवेश ढांचे पर काम करता है. अपने निवेश उद्देश्य के अनुरूप यह फंड 85% से अधिक निवेश स्मॉल-कैप शेयरों में बनाए रखता है, ताकि निवेशकों को इस सेगमेंट की दीर्घकालीन वृद्धि का वास्तविक लाभ मिल सके.
फंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ तेजी से बढ़ती कंपनियों की तलाश नहीं करता, बल्कि अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों पर भी विशेष ध्यान देता है. कमजोर बैलेंस शीट या कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस वाली कंपनियों को पोर्टफोलियो से दूर रखने की कोशिश की जाती है.
साथ ही, यह रणनीति केवल ग्रोथ पर नहीं बल्कि उचित वैल्यूएशन पर ग्रोथ यानी Growth at Reasonable Valuation पर भी जोर देती है. इससे निवेशकों को सुरक्षा का एक अतिरिक्त मार्जिन मिलता है.
पंकज मठपाल के मुताबिक, किसी भी स्मॉल-कैप निवेश रणनीति की असली परीक्षा बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान होती है. यही वजह है कि फंड सेक्टर डायवर्सिफिकेशन और सक्रिय जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देता है.
जुलाई 2025 में लॉन्च होने के बाद से इस फंड ने इंडस्ट्रियल्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में अधिक निवेश किया है. ये ऐसे सेक्टर्स हैं जिन्हें भारत की घरेलू विकास कहानी का प्रमुख लाभार्थी माना जाता है.
अस्थिर बाजार परिस्थितियों में भी बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि अनुशासित निवेश प्रक्रिया लंबे समय में अहम भूमिका निभा सकती है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संभावित ग्रोथ और जोखिम नियंत्रण का यह संतुलन स्मॉल-कैप कैटेगरी में अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है.
पंकज मठपाल मानते हैं कि स्मॉल-कैप निवेश हर निवेशक के लिए नहीं होता. इस सेगमेंट में उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है और धैर्य की भी जरूरत पड़ती है. लेकिन जिन निवेशकों का नजरिया लंबी अवधि का है और जो बाजार की अस्थिरता को सहन कर सकते हैं, उनके लिए मौजूदा समय जोखिम और संभावित रिटर्न के लिहाज से आकर्षक दिखाई देता है.
उनके अनुसार, बाजाज फिनसर्व AMC स्मॉल कैप फंड ऐसे निवेशकों को स्मॉल-कैप अवसरों तक पहुंचने का एक संरचित और रिसर्च-आधारित तरीका उपलब्ध कराता है. अगर आप लंबे समय से स्मॉल-कैप निवेश में सही मौके का इंतजार कर रहे थे, तो मौजूदा आर्थिक माहौल और इस सेगमेंट में दिख रहे सकारात्मक संकेत बताते हैं कि अब इस अवसर पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है.
Disclaimer: म्यूचुअल फंड और प्रतिभूति (Securities) बाजार में किए गए निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होते हैं, जिनमें मूलधन (Principal Amount) के नुकसान की संभावना भी शामिल है. निवेश करने से पहले योजना (Scheme) से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें. वित्तीय सलाहकार की सलाह जरूर लें.