NPS में बड़ा बदलाव! रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलेगी ‘सैलरी’ जैसी मंथली इनकम? PFRDA ने लॉन्च की नई स्कीम

PFRDA ने NPS सब्सक्राइबर्स के लिए नया Retirement Income Scheme (RIS) और Drawdown Option लॉन्च किया है. अब रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की बजाय हर महीने ‘सैलरी’ जैसी नियमित इनकम लेने का विकल्प मिलेगा. जानिए नया सिस्टम कैसे काम करेगा, किसे फायदा होगा और क्या बदलने वाला है.
NPS में बड़ा बदलाव! रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलेगी ‘सैलरी’ जैसी मंथली इनकम? PFRDA ने लॉन्च की नई स्कीम

PFRDA ने नई Retirement Income Scheme (RIS) और नया Drawdown Option लॉन्च किया है. (प्रतीकात्मक फोटो?AI)

National Pension System: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा डर क्या होता है? हर महीने नियमित पैसे आते रहेंगे या नहीं? अब इसी चिंता को कम करने के लिए Pension Fund Regulatory and Development Authority यानी PFRDA ने National Pension System (NPS) में बड़ा बदलाव किया है.

PFRDA ने नई Retirement Income Scheme (RIS) और नया Drawdown Option लॉन्च किया है. इसका मकसद है कि रिटायरमेंट के बाद लोगों को एकमुश्त पैसा खत्म होने का डर न रहे और उन्हें लंबे समय तक नियमित इनकम मिलती रहे.

सीधी भाषा में समझें तो अब NPS सिर्फ “रिटायरमेंट के बाद पैसा निकालने” वाली स्कीम नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे “मंथली इनकम प्लान” जैसा भी काम करेगा.

आखिर क्या बदला है?

अब तक NPS में ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद:

  • एक हिस्सा Lump sum निकालते थे
  • बाकी पैसे से Annuity खरीदते थे

लेकिन नई व्यवस्था में सब्सक्राइबर्स को अब:

  • Phased withdrawal
  • Systematic payout
  • Flexible monthly income

जैसे विकल्प मिलेंगे. यानी अब आपका पूरा कॉर्पस एक साथ खाते में आकर खत्म होने का जोखिम कम होगा.

नई Retirement Income Scheme (RIS) क्या है?

PFRDA के मुताबिक RIS का मकसद है:

  • रिटायरमेंट कॉर्पस ज्यादा समय तक चले
  • हर महीने एक नियमित कैशफ्लो मिले
  • पैसा पूरी तरह खत्म होने का खतरा कम हो
  • कॉर्पस इन्वेस्टेड भी रहे और इनकम भी मिलती रहे

नई स्कीम में सब्सक्राइबर अपना पैसा Drawdown mode में रख सकता है. यानी पैसा धीरे-धीरे निकलेगा और बाकी पैसा Market-linked Assets में निवेशित रहेगा.

आसान भाषा में समझिए पूरा मामला

मान लीजिए:

आपने NPS में ₹1 करोड़ जमा किए, रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा निकालने के बजाय आप हर महीने fixed payout चुनते हैं.

तो:

  • आपको हर महीने नियमित पैसा मिलता रहेगा
  • बाकी पैसा बाजार में निवेश रहेगा
  • उस पर रिटर्न्स भी बनते रहेंगे

यानी ये “पेंशन + निवेश” का हाइब्रिड मॉडल जैसा बन जाएगा.

अब कौन-कौन से विकल्प मिलेंगे?

1. Systematic Payout

इसमें आप तय कर सकते हैं:

  • हर महीने कितना पैसा चाहिए
  • कितने समय तक चाहिए
  • कॉर्पस कितनी तेजी से निकले

2. Systematic Payout Rate (SPR)

यह percentage आधारित payout होगा.

उदाहरण: अगर आपने 5% एनुअल पेआउट चुना, तो उसी हिसाब से periodic income मिलेगी.

3. RIS Steady Option

PFRDA ने “RIS Steady” नाम का नया lifecycle model भी दिया है.

इसमें:

  • उम्र बढ़ने के साथ इक्विटी एक्सपोजर घटेगा.
  • रिस्क धीरे-धीरे कम होगा.

उदाहरण:

  • 60 साल की उम्र में equity allocation ज्यादा रहेगा.
  • 75-80 की उम्र तक equity exposure काफी कम हो जाएगा.

ताकि रिटायरमेंट कॉर्पस ज्यादा सुरक्षित रहे.

उम्र के साथ कैसे बदलेगा निवेश?

उम्रEquity AllocationGovt Bonds / Safer Assets
60 सालज्यादाकम
65 सालथोड़ा कमबढ़ना शुरू
75 सालकाफी कमज्यादा
80+ सालन्यूनतमसबसे ज्यादा

सबसे बड़ा फायदा किसे होगा?

1. Private Job वालों को

जिनके पास ट्रेडिशनल पेंशन नहीं है, उनके लिए ये बड़ा सहारा बन सकता है.

2. Self-employed लोगों को

Freelancers, consultants, business owners अब रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बना सकेंगे.

3. Senior Citizens को

एक साथ पैसा खत्म होने का डर कम होगा.

क्या अब एन्यूटी खत्म हो जाएगी?

नहीं. NPS में annuity system अभी भी रहेगा. लेकिन अब लोगों को ज्यादा flexibility मिलेगी कि:

  • कितना पैसा annuity में डालना है.
  • कितना phased withdrawal में रखना है.

यानी पूरा सिस्टम अब पहले से ज्यादा फ्लैक्सिबल हो गया है.

सरकार ऐसा बदलाव क्यों ला रही है?

इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं:

1. लोग जल्दी कॉर्पस खत्म कर देते थे

रिटायरमेंट के बाद कई लोग पूरा पैसा निकाल लेते थे. फिर कुछ सालों बाद फाइनेंशियल प्रेशर में आ जाते थे.

2. इंडिया में पेंशन कल्चर बदल रहा है

अब फिक्स्ड पेंशन वाली सरकारी नौकरियां कम हैं. प्राइवेट सेक्टर में रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.

3. लोग रेगुलर इनकम चाहते हैं

Retirement के बाद:

  • मंथली कैश फ्लो
  • मेडिकल एक्सपेंस
  • डेली हाउसहोल्ड खर्च

के लिए स्टेबल इनकम जरूरी होती है.

क्या इसमें रिस्क भी है?

हां, क्योंकि कॉर्पस का कुछ हिस्सा मार्केट-लिंक्ड रहेगा.

अगर market कमजोर रहा, तो:

  • रिटर्न कम हो सकते हैं
  • पे-आउट ग्रोथ धीमी हो सकती है

लेकिन लाइफसाइकिल मॉडल रिस्क को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करता है.

NPS में हाल के बड़े बदलाव कौन-कौन से हुए?

पिछले कुछ महीनों में PFRDA ने कई बड़े बदलाव किए हैं:

बदलावक्या हुआ
80% withdrawalज्यादा कॉर्पस निकालने की अनुमति
New RISमंथली इनकम जैसी सुविधा
Flexible drawdownPhased withdrawal
Annuity surrender reliefCritical illness में राहत
New investment avenuesनए bond options

क्या इससे पेंशन ज्यादा मिलेगी?

सीधा जवाब: जरूरी नहीं.

लेकिन:

  • कॉर्पस ज्यादा समय तक चल सकता है
  • रेगुलर इनकम स्टेबल रह सकती है
  • रिटायरमेंट प्लानिंग बेहतर हो सकती है

यानी फोकस “एक साथ ज्यादा पैसा” नहीं, बल्कि “लंबे समय तक इनकम” पर है.

आपके लिए क्या जरूरी है?

अगर आप NPS सब्सक्राइबर हैं, तो:

  • अपनी रिटायरमेंट ऐज प्लानिंग देखें
  • रिस्क प्रोफाइल समझें
  • Lump sum vs payout balance तय करें
  • Family expenses calculate करें

अब सिर्फ पैसा जमा करना काफी नहीं होगा. Retirement के बाद पैसा कैसे निकलेगा, ये भी उतना ही जरूरी होगा.

क्या NPS अब और ज्यादा पॉपुलर होगा?

एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि:

  • Flexible withdrawal
  • Monthly income style payouts
  • Better liquidity

के कारण NPS अब मिडिल क्लास और प्राइवेट एम्प्लॉइज के बीच ज्यादा पॉपुलर हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास पेंशन नहीं है, जो SIP और mutual fund जैसे डिसिप्लिंड इन्वेस्टमेंट पसंद करते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद मंथली इनकम चाहते हैं.

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