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PFRDA ने नई Retirement Income Scheme (RIS) और नया Drawdown Option लॉन्च किया है. (प्रतीकात्मक फोटो?AI)
National Pension System: रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा डर क्या होता है? हर महीने नियमित पैसे आते रहेंगे या नहीं? अब इसी चिंता को कम करने के लिए Pension Fund Regulatory and Development Authority यानी PFRDA ने National Pension System (NPS) में बड़ा बदलाव किया है.
PFRDA ने नई Retirement Income Scheme (RIS) और नया Drawdown Option लॉन्च किया है. इसका मकसद है कि रिटायरमेंट के बाद लोगों को एकमुश्त पैसा खत्म होने का डर न रहे और उन्हें लंबे समय तक नियमित इनकम मिलती रहे.
सीधी भाषा में समझें तो अब NPS सिर्फ “रिटायरमेंट के बाद पैसा निकालने” वाली स्कीम नहीं रहेगा, बल्कि धीरे-धीरे “मंथली इनकम प्लान” जैसा भी काम करेगा.
अब तक NPS में ज्यादातर लोग रिटायरमेंट के बाद:
लेकिन नई व्यवस्था में सब्सक्राइबर्स को अब:
जैसे विकल्प मिलेंगे. यानी अब आपका पूरा कॉर्पस एक साथ खाते में आकर खत्म होने का जोखिम कम होगा.
PFRDA के मुताबिक RIS का मकसद है:
नई स्कीम में सब्सक्राइबर अपना पैसा Drawdown mode में रख सकता है. यानी पैसा धीरे-धीरे निकलेगा और बाकी पैसा Market-linked Assets में निवेशित रहेगा.
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मान लीजिए:
आपने NPS में ₹1 करोड़ जमा किए, रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा निकालने के बजाय आप हर महीने fixed payout चुनते हैं.
तो:
यानी ये “पेंशन + निवेश” का हाइब्रिड मॉडल जैसा बन जाएगा.
1. Systematic Payout
इसमें आप तय कर सकते हैं:
2. Systematic Payout Rate (SPR)
यह percentage आधारित payout होगा.
उदाहरण: अगर आपने 5% एनुअल पेआउट चुना, तो उसी हिसाब से periodic income मिलेगी.
3. RIS Steady Option
PFRDA ने “RIS Steady” नाम का नया lifecycle model भी दिया है.
इसमें:
उदाहरण:
ताकि रिटायरमेंट कॉर्पस ज्यादा सुरक्षित रहे.
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| उम्र | Equity Allocation | Govt Bonds / Safer Assets |
| 60 साल | ज्यादा | कम |
| 65 साल | थोड़ा कम | बढ़ना शुरू |
| 75 साल | काफी कम | ज्यादा |
| 80+ साल | न्यूनतम | सबसे ज्यादा |
1. Private Job वालों को
जिनके पास ट्रेडिशनल पेंशन नहीं है, उनके लिए ये बड़ा सहारा बन सकता है.
2. Self-employed लोगों को
Freelancers, consultants, business owners अब रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बना सकेंगे.
3. Senior Citizens को
एक साथ पैसा खत्म होने का डर कम होगा.
नहीं. NPS में annuity system अभी भी रहेगा. लेकिन अब लोगों को ज्यादा flexibility मिलेगी कि:
यानी पूरा सिस्टम अब पहले से ज्यादा फ्लैक्सिबल हो गया है.
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इसके पीछे 3 बड़े कारण हैं:
1. लोग जल्दी कॉर्पस खत्म कर देते थे
रिटायरमेंट के बाद कई लोग पूरा पैसा निकाल लेते थे. फिर कुछ सालों बाद फाइनेंशियल प्रेशर में आ जाते थे.
2. इंडिया में पेंशन कल्चर बदल रहा है
अब फिक्स्ड पेंशन वाली सरकारी नौकरियां कम हैं. प्राइवेट सेक्टर में रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत तेजी से बढ़ रही है.
3. लोग रेगुलर इनकम चाहते हैं
Retirement के बाद:
के लिए स्टेबल इनकम जरूरी होती है.
हां, क्योंकि कॉर्पस का कुछ हिस्सा मार्केट-लिंक्ड रहेगा.
अगर market कमजोर रहा, तो:
लेकिन लाइफसाइकिल मॉडल रिस्क को धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करता है.
पिछले कुछ महीनों में PFRDA ने कई बड़े बदलाव किए हैं:
| बदलाव | क्या हुआ |
| 80% withdrawal | ज्यादा कॉर्पस निकालने की अनुमति |
| New RIS | मंथली इनकम जैसी सुविधा |
| Flexible drawdown | Phased withdrawal |
| Annuity surrender relief | Critical illness में राहत |
| New investment avenues | नए bond options |
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सीधा जवाब: जरूरी नहीं.
लेकिन:
यानी फोकस “एक साथ ज्यादा पैसा” नहीं, बल्कि “लंबे समय तक इनकम” पर है.
अगर आप NPS सब्सक्राइबर हैं, तो:
अब सिर्फ पैसा जमा करना काफी नहीं होगा. Retirement के बाद पैसा कैसे निकलेगा, ये भी उतना ही जरूरी होगा.
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एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि:
के कारण NPS अब मिडिल क्लास और प्राइवेट एम्प्लॉइज के बीच ज्यादा पॉपुलर हो सकता है. खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास पेंशन नहीं है, जो SIP और mutual fund जैसे डिसिप्लिंड इन्वेस्टमेंट पसंद करते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद मंथली इनकम चाहते हैं.