1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे UPI के ये नियम, इन मोबाइल नंबर्स से नहीं होंगे ट्रांजैक्शन, कहीं आपका भी तो नहीं...

NPCI new rules from 1 April: NPCI ने 1 अप्रैल से पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक, इनएक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ी UPI आईडी भी इनएक्टिव हो जाएगी.
1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे UPI के ये नियम, इन मोबाइल नंबर्स से नहीं होंगे ट्रांजैक्शन, कहीं आपका भी तो नहीं...

NPCI new rules from 1 April: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने न्यूमेरिक UPI आईडी सॉल्यूशन पर हाल ही में UPI नंबर से जुड़े भुगतानों के लिए कस्टमर एक्सपीरियंस बढ़ाने के उद्देश्य से नए दिशानिर्देश जारी किए हैं. नए दिशानिर्देश 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे. इन नए दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना UPI मेंबर बैंक, UPI ऐप्स और थर्ड पार्टी प्रोवाइडर के लिए जरूरी होगा.

ये UPI यूजर्स नहीं कर पाएंगे ट्रांजैक्शन

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, इनएक्टिव मोबाइल नंबर से जुड़ी UPI आईडी भी इनएक्टिव हो जाएगी. अगर किसी UPI यूजर का बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है तो यूजर की UPI आईडी भी अनलिंक हो जाएगी और यूजर UPI सर्विस का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा.

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रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर रखना होगा अपडेट

ऐसे में UPI सर्विस का इस्तेमाल करने वाले हर यूजर को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि उसके बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर एक्टिव हो. सही मोबाइल नंबर के साथ बैंक रिकॉर्ड अपडेट रखे जाने पर ही UPI सर्विस का बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल किया जा सकेगा. इनएक्टिव या दोबारा असाइन किए गए मोबाइल नंबर को लेकर उनसे जुड़ी UPI सर्विस को लेकर परेशानी आ सकती है.

इन बातों को रखना होगा ध्यान

टेलीकॉम डिपार्टमेंट के नियमों के अनुसार, डिसकनेक्ट होने पर मोबाइल नंबर 90 दिन बाद एक नए यूजर को असाइन किया जा सकता है. अगर किसी ग्राहक का मोबाइल नंबर कॉल, मैसेज या डेटा के साथ इस्तेमाल न किया जा रहा हो तो ऐसे नंबर को टेलीकॉम प्रोवाइडर्स डिएक्टिवेट कर देते हैं. इन नंबरों को रिसाइकल या चर्न्ड नंबर कहा जाता है.

क्या है NPCI का नया गाइडलाइंस

नए दिशा-निर्देशों के तहत यूजर का बैंक-वेरिफाइड मोबाइल नंबर यूजर के UPI आइडेंटिटीफायर के रूप में काम करेगा. जिसके साथ यूजर अलग-अलग UPI ऐप्स का इस्तेमाल कर सकता है. दूसरी ओर बैंक और UPI एप्लीकेशन को भी अपने मोबाइल नंबर रिकॉर्ड्स को हर हफ्ते अपडेट करने की जरूरत होगी, जिससे रिसाइकिल या मॉडिफाइड नंबर से होने वाली गलतियों से बचा सके.

न्यूमेरिक UPI आईडी असाइन करने से पहले एप्लीकेशन को यूजर्स से इजाजत लेने की जरूरत होगी. यूजर्स को इस फीचर के लिए एक्टिवली ऑप्ट इन करना होगा, यह डिफॉल्ट सेटिंग में ऑप्ट आउट है. किसी स्थिति में अगर एनपीसीआई के वेरिफिकेशन में कुछ देरी होती है तो UPI एप्लिकेशन अस्थायी रूप से न्यूमेरिक UPI आईडी से जुड़ी समस्याओं को इंटरनली हल कर सकते हैं. इन मामलों का डॉक्यूमेंटेशन किया जाना जरूरी होगा और निरीक्षण उद्देश्यों के तहत हर महीने एनपीसीआई को रिपोर्ट किया जाना जरूरी होगा.

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