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Health Insurance
Health Insurance: अगर आपके पास निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance) है और आप मैक्स हॉस्पिटल्स (Max Hospitals) में इलाज कराने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. अब आप वहां कैशलेस इलाज नहीं करा पाएंगे, यानी अब आपको खुद पैसे देकर इलाज कराना होगा और बाद में इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम करना होगा.
Niva Bupa Health Insurance के निदेशक और सीओओ डॉ. भवतोष मिश्रा ने कहा कि मैक्स के साथ कंपनी का समझौता मई 2025 में खत्म हो गया है. प्रीमियम संशोधन के लिए हुई बातचीत में कोई समझौता नहीं हो पाया है, जिसके कारण कैशलेस सेवाओं को निलंबित कर दिया गया.
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मिश्रा ने कहा, हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि मैक्स हॉस्पिटल्स में हमारी कैशलेस सेवाएं वर्तमान में उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने आगे कहा कि स्टार हेल्थ (Star Health) और केयर हेल्थ (Care Health) जैसी बीमा कंपनियों को भी मैक्स हॉस्पिटल्स के साथ इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
इंश्योरेंस कंपनी ने ग्राहकों से कहा कि देश भर में उसके 10,000 से ज्यादा सहयोगी अस्पतालों में कैशलेस सेवाएं अभी भी उपलब्ध हैं. मैक्स हॉस्पिटल्स ने अभी तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की है.
यह समस्या केवल निवा बूपा तक ही सीमित नहीं है. बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस (Bajaj Allianz General Insuran) और केयर हेल्थ इंश्योरेंस (Care Health Inruance) के पॉलिसीधारकों को भी 1 सितंबर से कई अस्पतालों में कैशलेस सेवाओं की सुविधा नहीं मिल पाएगी. एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) (AHPI) ने कई अस्पतालों में कैशलेस सेवाओं के निलंबन पर ऑनलाइन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के समक्ष गहरी चिंता जताई है.
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ऐसी भी खबरें थीं कि एएचपीआई ने इन पॉलिसीधारकों के लिए कैशलेस सेवाओं के निलंबन को रद्द करने संबंधी एक एडवाइजरी जारी की है. हालांकि, एसोसिएशन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
बीमा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GI Council) ने एसोसिएशन के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे अचानक और एकतरफा कार्रवाई बताया है जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है और हेल्थ इंश्योरेंस में जनता के विश्वास को कम करने का जोखिम है.
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काउंसिल ने चेतावनी दी है कि कैशलेस सेवाओं में व्यवधान नागरिकों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इससे उन्हें भारी अग्रिम भुगतान करने के लिए मजबूर होना पड़ता है और तत्काल उपचार की जरूरत वाले गंभीर चिकित्सा मामलों में जान भी जोखिम में पड़ सकती है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI) पूरे भारत में 100% कैशलेस उपचार पर जोर दे रहा है.
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