&format=webp&quality=medium)
निवेश के लिहाज से इन दिनों म्यूचुअल फंड्स को काफी पसंद किया जा रहा है. म्यूचुअल फंड्स कई तरह के हैं, उन्हीं में से एक प्रकार है FMP यानी Fixed Maturity Plan. इसमें निवेशकों का पैसा फिक्स्ड अवधि वाले डेट इंस्ट्रूमेंट में इन्वेस्ट किया जाता है. ये अवधि कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक की हो सकती है. FMP को Closed-Ended Debt Scheme भी कहा जाता है क्योंकि इसमें निवेश की गई रकम को एक निश्चित अवधि के लिए लॉक कर दिया जाता है. रकम को लॉक-इन पीरियड समाप्त होने के बाद ही निकाला जा सकता है.
FMP में डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे बॉन्ड, सरकारी सिक्योरिटीज वगैरह में निवेश किया जाता है, मतलब साफ है कि निवेशकों का पैसा सुरक्षित जगह पर निवेश किया जाता है. इसके कारण ये कम जोखिम वाला माना जाता है. हालांकि इसका रिटर्न FD की तरह गारंटीड नहीं होता. मार्केट लिंक्ड स्कीम होने के कारण रिटर्न अनुमानित होता है. FMP में निवेश की अवधि पहले से तय होती है. आमतौर पर FMP में निवेश की गई राशि मैच्योरिटी से पहले नहीं निकाली जा सकती, लेकिन निवेशक के पास मैच्योरिटी से पहले स्टॉक एक्सचेंज पर अपने डीमैट खाते से अपने FMP को बेचने का ऑप्शन होता है. FMP पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स और इंडेक्सेशन बेनिफिट मिलता है, जो इसे टैक्स-एफिशिएंट बनाता है.
FMP में आप कभी भी अपने हिसाब से निवेश नहीं कर सकते. FMP में निवेश का मौका न्यू फंड ऑफरिंग (NFO) के साथ खुलता है और NFO की समापन तिथि को खत्म हो जाता है. ऐसे में इसमें आपको NFO समाप्त होने से पहले ही निवेश करना होता है. FMP में निवेश की अवधि आमतौर पर 30 दिन से लेकर 5 साल तक की हो सकती है.
वे लोग जो अपने निवेश पर स्थिर और अनुमानित रिटर्न चाहते हैं. वे निवेशक जो मध्यम अवधि (1-5 वर्ष) के लिए निवेश करना चाहते हैं और बेहतर रिटर्न चाहते हैं. इसके अलावा जो लोग बाजार की अस्थिरता से बचना चाहते हैं. हालांकि, निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श जरूर कर लेना चाहिए ताकि आपको ये पता रहे कि FMP आपकी जरूरतों के मुताबिक है या नहीं.