जंग के बीच आपके पैसे के लिए 'बुलेटप्रूफ' जैकेट है ये म्यूचुअल फंड, गिरावट में भी नहीं डगमगाएगा आपका पोर्टफोलियो!

युद्ध और ग्लोबल तनाव के बीच फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड को क्यों माना जाता है सबसे सुरक्षित? जानें कैसे यह फंड मार्केट की गिरावट में आपके पैसे को बचाता है.
जंग के बीच आपके पैसे के लिए 'बुलेटप्रूफ' जैकेट है ये म्यूचुअल फंड, गिरावट में भी नहीं डगमगाएगा आपका पोर्टफोलियो!

जंग के बीच आपके पैसे के लिए 'बुलेटप्रूफ' जैकेट है ये म्यूचुअल फंड. (Image Source-AI)

ईरान के साथ चल रहे अमेरिका-इजरायल के जंग की वजह से मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है. यहां तक कि म्यूचुअल फंड में भी लोग निवेश करने से बच रहे हैं. अब ऐसे माहौल में हर किसी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर अपना पैसा कहां सुरक्षित रखें? इसी का जवाब है 'फ्लेक्सी-कैप फंड' (Flexi-cap Funds). अपने फ्लेक्सिबल निवेश रणनीति के कारण ये फंड इस मुश्किल वक्त में सबसे भरोसेमंद साथी साबित हो सकते हैं.

दरअसल, यह फंड किसी एक दायरे में बंधा नहीं होता. जब युद्ध या तनाव की वजह से बाजार डगमगाता है, तो इस फंड के मैनेजर के पास यह आजादी होती है कि वह आपके पैसे को सुरक्षित बड़ी कंपनियों (Large-caps) में डाल दे या फिर मौका देखकर छोटी कंपनियों (Mid & Small-caps) में निवेश बढ़ा दे. यही वजह है कि फरवरी के महीने में निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा इसी कैटेगरी पर दिखाया है.

बाजार की गिरावट में कैसे काम करता है यह फंड

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फ्लेक्सी-कैप फंड की संरचना कुछ ऐसी होती है कि यह हर मौसम का सामना कर सके. जब बाजार में बहुत ज्यादा उथल-पुथल होती है, तो छोटे और मिड-कैप शेयरों में बड़ी गिरावट आती है. ऐसे में फ्लेक्सी-कैप फंड का मैनेजर चालाकी से पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा स्थिर और मजबूत बड़ी कंपनियों की तरफ मोड़ देता है. इससे आपके पोर्टफोलियो में होने वाली गिरावट (Drawdown) कम हो जाती है.

साल 2025 के उतार-चढ़ाव भरे दौर में भी यही देखा गया. कई फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने अपना झुकाव बड़ी कंपनियों की तरफ बढ़ा दिया, जबकि मिड-कैप में 15 से 20 फीसदी हिस्सा बनाए रखा और ज्यादा जोखिम वाले स्मॉल-कैप शेयरों से दूरी बना ली. यह तालमेल ही इस फंड को युद्ध जैसे संकट के समय सुरक्षित बनाता है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि कमाई के मामले में भी फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने सबको चौंकाया है. अगर हम पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इन फंड्स ने दूसरी डाइवर्सिफाइड इक्विटी कैटेगरी के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है. कैटेगरी डेटा के मुताबिक, पिछले तीन सालों में इन फंड्स ने 17 फीसदी का सालाना रिटर्न (CAGR) दिया है.

पिछला 3 साल17%अन्य इक्विटी कैटेगरी से बेहतर प्रदर्शन
पिछला 5 साल14.2%लंबी अवधि में मजबूत और स्थिर वेल्थ क्रिएशन

वहीं, अगर पांच साल की लंबी अवधि की बात करें, तो इन्होंने 14.2 फीसदी की दर से निवेशकों का पैसा बढ़ाया है. यह आंकड़े बताते हैं कि अगर आप थोड़ा धैर्य रखें और बाजार के उतार-चढ़ाव को झेलने की ताकत रखें, तो फ्लेक्सी-कैप फंड आपकी दौलत को धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से बढ़ाने का काम करता है.

निवेशकों का बढ़ता भरोसा

फरवरी के महीने में जो आंकड़े सामने आए, वे हैरान करने वाले हैं. फ्लेक्सी-कैप फंड्स में करीब 6,925 करोड़ रुपये का निवेश आया है. इक्विटी फंड की सभी कैटेगरी में यह सबसे ज्यादा है. इसका मतलब साफ है कि आज का निवेशक समझदार हो गया है. वह केवल जोश में आकर पैसा नहीं लगा रहा, बल्कि वह ऐसे फंड मैनेजर को अपना पैसा देना चाहता है जिसके पास बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से चलने की खुली छूट हो.

जब फंड मैनेजर को लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप के बीच घूमने की आजादी मिलती है, तो वह ज्यादा बेहतर तरीके से रिटर्न निकाल पाता है. निवेशक अब समझ चुके हैं कि युद्ध या आर्थिक संकट के समय किसी एक जगह टिके रहना नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए वे फ्लेक्सी-कैप जैसी कैटेगरी को चुन रहे हैं.

पोर्टफोलियो का 'कोर' हिस्सा होना चाहिए फ्लेक्सी-कैप

विशेषज्ञों का कहना है कि हर निवेशक को अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का एक बड़ा और अहम हिस्सा फ्लेक्सी-कैप फंड्स को देना चाहिए. इसे आप अपने निवेश की बुनियाद मान सकते हैं. आने वाले समय में बाजार 'अर्निंग्स-ड्रिवन' होने वाला है, यानी जिस कंपनी की कमाई अच्छी होगी, उसका शेयर भागेगा. ऐसे में फ्लेक्सी-कैप फंड्स उन चुनिंदा कंपनियों को पकड़ने में माहिर होते हैं.

अगर आप अनुशासित तरीके से लंबे समय तक एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करते हैं, तो आपको मार्केट साइकल का पूरा फायदा मिलता है. कंपाउंडिंग की ताकत तभी काम करती है जब आप बाजार की गिरावट में डरे बिना निवेश जारी रखें. फ्लेक्सी-कैप फंड आपको वह स्थिरता देता है कि आप मुश्किल दौर में भी निवेशित रह सकें.

मार्केट रोटेशन को पकड़ने की ताकत

जियोपॉलिटिकल तनाव यानी देशों के बीच झगड़ों की वजह से अक्सर बाजार में 'रोटेशन' देखने को मिलता है. इसका मतलब है कि कभी बैंकिंग सेक्टर चलता है, तो कभी आईटी, और कभी डिफेंस. फ्लेक्सी-कैप फंड्स की बनावट ही ऐसी है कि वे इन बदलावों को तुरंत पकड़ लेते हैं.

जब वैल्यूएशन और ग्रोथ की संभावनाएं अलग-अलग सेगमेंट में बदलती हैं, तो फंड मैनेजर अपना पैसा वहां लगाते हैं जहां जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा (Risk-Reward) दिखने की उम्मीद होती है. यह लचीलापन ही इस फंड को स्ट्रक्चरल तौर पर मजबूत बनाता है, जिससे यह लंबी अवधि में विजेता बनकर उभरता है.

निवेश से पहले किन बातों का रखें ख्याल

हालांकि यह फंड सुरक्षित माना जाता है, लेकिन निवेश करने से पहले आपको कुछ जरूरी चेकलिस्ट पर गौर करना चाहिए-

फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड: देखिए कि फंड मैनेजर ने पिछले संकटों (जैसे कोरोना या मंदी) के दौरान कैसा प्रदर्शन किया है.

निवेश का नजरिया: फ्लेक्सी-कैप फंड उन्हीं के लिए हैं जिनका नजरिया कम से कम 5 से 7 साल का है.

एक्सपेंस रेशियो: फंड चलाने का खर्चा कितना है, इसे जरूर देखें क्योंकि यह आपके लॉन्ग-टर्म रिटर्न को प्रभावित करता है.

रिस्क मैनेजमेंट: फंड हाउस जोखिम को कैसे मैनेज करता है और पोर्टफोलियो में कितनी विविधता (Diversification) है, इसकी जांच करें.

(डिस्‍क्‍लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)

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