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टैक्स बचाने के साथ-साथ अच्छा रिटर्न कमाने का जरिया अगर किसी म्यूचुअल फंड कैटेगरी को कहा जाए तो वो है Equity Linked Savings Scheme (ELSS). ये फंड निवेशकों को पुराने टैक्स रेजीम के तहत धारा 80C में ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट दिलाते हैं. साथ ही, इनका लॉक-इन पीरियड सिर्फ 3 साल का होता है, जो कि टैक्स सेविंग FD (5 साल) और PPF (15 साल) से काफी कम है.
पिछले कुछ सालों में ELSS फंड्स ने बेहतरीन रिटर्न दिए हैं और कई कैटेगरी जैसे लार्ज कैप और फ्लेक्सी कैप फंड्स से बेहतर प्रदर्शन किया है. वैल्यू रिसर्च के मुताबिक, इस कैटेगरी ने 3 साल में औसतन 15.68% और 5 साल में 20.12% का सालाना रिटर्न दिया है. आइए जानते हैं वो 3 टॉप ELSS फंड्स जिन्होंने पिछले 3 और 5 सालों में शानदार रिटर्न दिया है.
Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund जनवरी 2015 में लॉन्च हुआ था. यह फंड NIFTY 500 TRI को बेंचमार्क करता है और "बहुत हाई रिस्क" कैटेगरी में आता है. 31 जुलाई 2025 तक इस फंड के पास ₹4,402 करोड़ की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) हैं और इसका एक्सपेंस रेशियो 0.65% है.
3 साल का रिटर्न: 25.38% CAGR (बेंचमार्क से कहीं ज्यादा, जिसने सिर्फ 14.41% दिया).
5 साल का रिटर्न: 25.48% CAGR (बेंचमार्क का रिटर्न 20.33%).
अगर किसी ने इसमें 1 लाख रुपये 3 साल पहले लगाए होते, तो आज वो ₹1.98 लाख बन चुके होते. वहीं, 5 साल पहले का निवेश ₹3.10 लाख में बदल जाता.
SBI ELSS Tax Saver Fund जनवरी 2013 में लॉन्च हुआ था और शुरुआत से अब तक इसका रिटर्न 16.31% रहा है. यह भी BSE 500 TRI को फॉलो करता है और "बहुत हाई रिस्क" कैटेगरी में शामिल है. जुलाई 2025 तक इस फंड का AUM ₹30,271 करोड़ है और इसका एक्सपेंस रेशियो 0.95% है.
3 साल का रिटर्न: 23.42% CAGR (बेंचमार्क का 14.41% से कहीं बेहतर).
5 साल का रिटर्न: 25.40% CAGR (बेंचमार्क का 20.33%).
इस फंड में अगर किसी ने 1 लाख रुपये 3 साल पहले लगाए होते, तो आज वो ₹1.88 लाख हो जाते. वहीं, 5 साल पहले का निवेश आज ₹3.10 लाख बन चुका होता.
HDFC ELSS Tax Saver Fund भी जनवरी 2013 में लॉन्च हुआ था. यह NIFTY 500 TRI को बेंचमार्क करता है और "बहुत हाई रिस्क" कैटेगरी में आता है. जुलाई 2025 तक इस फंड का AUM ₹16,579 करोड़ है और इसका एक्सपेंस रेशियो 1.09% है.
3 साल का रिटर्न: 21.74% CAGR (बेंचमार्क का 14.41% से बेहतर).
5 साल का रिटर्न: 25.14% CAGR (बेंचमार्क का 20.33%).
अगर किसी ने इस फंड में 1 लाख रुपये 3 साल पहले लगाए होते, तो आज वो ₹1.84 लाख बन चुके होते. वहीं, 5 साल का निवेश ₹2.98 लाख तक पहुंच चुका होता.
टैक्स बचत - पुराने टैक्स रेजीम के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट.
कम लॉक-इन पीरियड - सिर्फ 3 साल का लॉक-इन, बाकी टैक्स सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स से कम.
लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन - मार्केट से जुड़ा होने के कारण लंबे समय में अच्छा रिटर्न.
डाइवर्सिफिकेशन - इक्विटी और डेरिवेटिव्स में निवेश करके बैलेंस्ड ग्रोथ.
पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होता. यानी 3 या 5 साल के अच्छे रिटर्न का मतलब ये नहीं है कि आगे भी ऐसा ही होगा. ELSS फंड्स का रिटर्न मार्केट की स्थिति, इकॉनमी और कंपनियों की परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है. निवेश से पहले अपनी रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में रखना जरूरी है.
Q1. ELSS फंड्स में लॉक-इन पीरियड कितना होता है?
सिर्फ 3 साल.
Q2. ELSS में कितना टैक्स बचाया जा सकता है?
पुराने टैक्स रेजीम में ₹1.5 लाख तक.
Q3. कौन से ELSS फंड्स टॉप परफॉर्मर हैं?
Motilal Oswal, SBI और HDFC ELSS फंड्स.
Q4. क्या ELSS फंड्स मार्केट से जुड़े होते हैं?
हां, ये इक्विटी मार्केट से जुड़े होते हैं.
Q5. क्या पिछले रिटर्न भविष्य की गारंटी हैं?
नहीं, ये केवल पिछला रिकॉर्ड दिखाते हैं.
(डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)
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