ईरान-इजरायल युद्ध के बीच डिफेंस म्यूचुअल फंड्स बचाएंगे आपका पोर्टफोलियो! ये हैं टॉप 3 नाम

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय डिफेंस सेक्टर निवेशकों के लिए सुरक्षा कवच बन रहा है. जानिए उन 3 बेहतरीन डिफेंस म्यूचुअल फंड्स के बारे में जो आपके पोर्टफोलियो को हेज कर सकते हैं.
ईरान-इजरायल युद्ध के बीच डिफेंस म्यूचुअल फंड्स बचाएंगे आपका पोर्टफोलियो! ये हैं टॉप 3 नाम

सांकेतिक तस्वीर

दुनिया के नक्शे पर नजर डालें तो इस वक्त हालात सामान्य नहीं हैं. पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में छिड़ी जंग अब सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह ग्लोबल इकोनॉमी और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है. रूस-यूक्रेन से लेकर ईरान और इजराइल तक, बारूद की गंध अब भारत के तटों के करीब भी महसूस की जा रही है.

लेकिन कहते हैं कि आपदा में भी अवसर छिपा होता है. भारत ने पिछले कुछ सालों में रक्षा के क्षेत्र में जो 'आत्मनिर्भर' बनने का सफर तय किया है, उसने निवेशकों के लिए दौलत बनाने के नए दरवाजे खोल दिए हैं. आज हम बात करेंगे उन 3 डिफेंस म्यूचुअल फंड्स की, जो युद्ध के इस दौर में आपके पोर्टफोलियो के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकते हैं.

जब घर के पास ही फटने लगे बम

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दुनियाभर में भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) अपने चरम पर है. 4 मार्च 2026 को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास, जो भारत से महज 100 नॉटिकल मील दूर है, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को निशाना बनाया. यह घटना बताती है कि जंग अब हमारे दरवाजे तक पहुंच चुकी है. भारत अब रक्षा पर खर्च करने के मामले में दुनिया में पांचवें नंबर पर आ गया है. हम अपनी जीडीपी का करीब 2% हिस्सा अपनी सेनाओं को मजबूत करने में लगा रहे हैं.

आत्मनिर्भर भारत की ताकत

भारत ने असेंबली से आगे बढ़कर अब खुद के डिजाइन और डेवलपमेंट पर फोकस किया है. इसमें प्राइवेट और सरकारी दोनों सेक्टर मिलकर काम कर रहे हैं-

  • हवाई ताकत: एलसीए तेजस (LCA Tejas) और प्रचंड हेलीकॉप्टर्स.
  • समुद्री सुरक्षा: आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) विमानवाहक पोत.
  • मिसाइल सिस्टम: ब्रह्मोस (BrahMos) और आकाश (Akash) मिसाइल सिस्टम.
  • जमीनी जंग: अर्जुन (Arjun MBT) जैसे मेन बैटल टैंक.

रक्षा उत्पादन और बजट का सफर

नीचे दी गई टेबल से आप समझ सकते हैं कि पिछले कुछ सालों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में कितनी लंबी छलांग लगाई है-

रक्षा उत्पादन (Production)46,429 करोड़ रुपये1.54 लाख करोड़ रुपये
रक्षा बजट (Budget)2.53 लाख करोड़ रुपये7.85 लाख करोड़ रुपये
निर्यात लक्ष्य (2029)-50,000 करोड़ रुपये
उत्पादन लक्ष्य (2029)-3 लाख करोड़ रुपये

ये 3 फंड्स जो पोर्टफोलियो को देंगे सुरक्षा

भारतीय बाजार में फिलहाल तीन ऐसे फंड्स हैं जो डिफेंस सेक्टर पर फोकस कर रहे हैं. इनके प्रदर्शन और पोर्टफोलियो की बनावट नीचे दी गई है-

टॉप 3 डिफेंस फंड्स की तुलना (डेटा: फरवरी 2026)

HDFC Defence Fund2283.4%36.0%
Motilal Oswal Defence Index Fund1889.8%38.9%
Aditya Birla SL Defence Index Fund1889.5%38.5%

डिफेंस सेक्टर के 'मल्टीबैगर' खिलाड़ी

निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने 31.9% की सालाना रफ्तार से रिटर्न दिया है. इसमें शामिल कुछ प्रमुख कंपनियां जिन्होंने निवेशकों को मालामाल किया है-

  • सरकारी कंपनियां (PSUs): भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचएएल (HAL), मजगांव डॉक, भारत डायनेमिक्स और कोचीन शिपयार्ड.
  • प्राइवेट सेक्टर: एलएंडटी (L&T), भारत फोर्ज, डेटा पैटर्न्स, सोलर इंडस्ट्रीज और पारस डिफेंस.

कुल रक्षा उत्पादन में सरकारी कंपनियों का हिस्सा 77% है, जबकि प्राइवेट सेक्टर 23% योगदान दे रहा है. हालांकि, निर्यात के मामले में प्राइवेट सेक्टर 64% के साथ आगे है.

निवेश से पहले ये बातें जरूर जान लें

भले ही ये फंड्स बहुत आकर्षक लग रहे हों, लेकिन कुछ कड़वी हकीकत भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता-

  • महंगा वैल्युएशन: डिफेंस इंडेक्स का पीई (PE) रेशियो फिलहाल 54 के करीब है, जो कि 5 साल के औसत (45) से ज्यादा है. यानी शेयर महंगे हैं.
  • सेक्टर कंसंट्रेशन: यह फंड सिर्फ एक ही सेक्टर में निवेश करता है. अगर रक्षा क्षेत्र में कोई गिरावट आती है, तो पूरा फंड डूब सकता है.
  • रणनीति: अपने कुल निवेश का केवल 5 से 10% हिस्सा ही इन फंड्स में लगाएं. यह आपके पोर्टफोलियो को युद्ध के समय एक 'बफर' देगा.

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FAQs

Q1: क्या अभी डिफेंस फंड्स में निवेश करना सही समय है?
A1: लॉन्ग टर्म के लिए सेक्टर मजबूत है, लेकिन वैल्युएशन महंगा होने के कारण एकमुश्त पैसे के बजाय एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करना ज्यादा सुरक्षित है.

Q2: एक्टिव और पैसिव डिफेंस फंड में क्या अंतर है?
A2: एचडीएफसी डिफेंस फंड एक एक्टिव फंड है जहां मैनेजर अपनी मर्जी से स्टॉक चुनते हैं, जबकि मोतीलाल ओसवाल और आदित्य बिरला के फंड सीधे इंडेक्स को कॉपी करते हैं.

Q3: भारत के रक्षा निर्यात की क्या स्थिति है?
A3: भारत आज अमेरिका और फ्रांस सहित 100 से ज्यादा देशों को रक्षा सामान निर्यात कर रहा है. प्राइवेट कंपनियां इसमें 64% का योगदान दे रही हैं.

Q4: इन फंड्स में निवेश का कितना जोखिम है?
A4: ये सेक्टर फंड हैं, इसलिए इनमें रिस्क ज्यादा होता है. अगर सरकारी नीतियों में बदलाव होता है या सेक्टर सुस्त पड़ता है, तो बड़ा नुकसान हो सकता है.

Q5: क्या एचडीएफसी डिफेंस फंड में एकमुश्त पैसा लगा सकते हैं?
A5: फिलहाल एचडीएफसी डिफेंस फंड ऊंचे वैल्युएशन के कारण एकमुश्त (Lump sum) निवेश स्वीकार नहीं कर रहा है, केवल 5000 रुपये तक की मंथली एसआईपी ही संभव है.

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