तो ये है सही तरीका...SIP करने वाले 70% लोगों को नहीं पता म्यूचुअल फंड्स का ये खास नियम

भारत में म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. लेकिन कई लोग जरूरत से ज्यादा स्कीमें लेकर पोर्टफोलियो को बर्बाद कर रहे हैं.
तो ये है सही तरीका...SIP करने वाले 70% लोगों को नहीं पता म्यूचुअल फंड्स का ये खास नियम

म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते हैं तो जरूर जान लें ये खास नियम

भारत में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है. जून 2025 तक म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 24.13 करोड़ हो गई है, जिसमें से लगभग 19.07 करोड़ फोलियो रिटेल निवेशकों और हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के हैं.

यह दिखाता है कि लोग अब म्यूचुअल फंड को पैसा बनाने का मजबूत जरिया मान रहे हैं. इस समय भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 74.41 ट्रिलियन रुपए तक पहुंच चुका है. हालांकि, इसके बाद भी हजारों लाखों ऐसे लोग हैं, जिन्हें नहीं पता कि म्यूचुअल फंड्स में निवेश करते समय किन खास बातों का ख्याल रखना चाहिए.

इक्विटी पोर्टफोलियो में कितने स्कीम रखना चाहिए?

इक्विटी पोर्टफोलियो में 5 से 7 यूनिक स्कीमें पर्याप्त मानी जाती हैं. इसके लिए आप कोर और सैटेलाइट स्ट्रैटेजी अपनाएं. कोर हिस्से में 65-70 फीसदी निवेश बड़े और भरोसेमंद फंड्स में करें जैसे- एक बड़ा Large Cap Fund, Flexi-Cap या Multi-Cap Fund, एक Value Fund और एक Contra Fund.

सैटेलाइट हिस्से में 30-35 फीसदी निवेश मिड कैप फंड या Aggressive Hybrid Fund में किया जा सकता है. अगर जोखिम उठाने की क्षमता ज्यादा हो तो Small Cap Fund भी एक विकल्प हो सकता है. इस पूरे इक्विटी पोर्टफोलियो के लिए 7 से 8 साल या उससे ज्यादा का निवेश समय जरूरी है. टैक्स बचत के लिए ELSS फंड्स भी एक विकल्प हो सकते हैं.

डेट फंड्स में निवेश का सही तरीका

डेट फंड्स को लोग अक्सर सुरक्षित मानते हैं, लेकिन इनमें भी जोखिम होते हैं. निवेश से पहले अपने कैश की जरूरत और निवेश के टाइम पर ध्यान दें. अगर आपका समय 2-3 साल है तो Banking & PSU Debt Fund लिया जा सकता है. ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए Dynamic Bond Fund बेहतर विकल्प हो सकता है.

1-2 साल के लिए Short Duration Fund चुना जा सकता है जिसमें ज्यादातर सरकारी या अर्ध-सरकारी बॉन्ड हों. एक साल से भी कम के लिए Liquid Fund सबसे बेहतर हैं जो T-bills, Call Money और अन्य शॉर्ट-टर्म पेपर में निवेश करते हैं.

पोर्टफोलियो में जरूर हो गोल्ड स्कीम

पोर्टफोलियो में गोल्ड स्कीम की मौजूदगी आर्थिक अनिश्चितता के वक्त काफी मददगार हो सकती है. इसके लिए Gold ETF या Gold Savings Fund का विकल्प चुन सकते हैं. Gold ETF के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी होता है, जबकि Gold Savings Fund को सीधे फंड हाउस या एजेंट के जरिए खरीदा जा सकता है.

मल्टी एसेट फंड

अगर आप इक्विटी, डेट और गोल्ड, तीनों में एक साथ निवेश करना चाहते हैं तो Multi Asset Fund एक बेहतर विकल्प हो सकता है. इन फंड्स में फंड मैनेजर अपने हिसाब से इन एसेट क्लासेज़ में निवेश करते हैं. कुछ फंड्स सिल्वर ETF, REITs, अंतरराष्ट्रीय इक्विटीज और डेरिवेटिव्स में भी निवेश करते हैं. ये फंड्स 3 से 5 साल की अवधि में अच्छा रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न दे सकते हैं.

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