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शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड के बीच सही चुनाव कैसे करें?(प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
नौकरी शुरू होते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल आता है पैसा Stock Market में लगाएं या Mutual Fund में? असल में सोशल मीडिया पर कोई शेयर खरीदने की सलाह देता है, तो कोई SIP शुरू करने को कहता है.तो ऐसे में नए निवेशक अक्सर कन्फ्यूज हो जाते हैं और कई बार बिना समझे-समझे निवेश भी कर बैठते हैं.
ज़ी बिज़नेस के खास शो 'Bucks Talk' में फाइनेंस कंटेंट क्रिएटर संजय कथूरिया ने इसी मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि निवेश की दुनिया में सबसे बड़ी गलती क्या है और एक नए निवेशक को कहां से शुरुआत करनी चाहिए.
संजय कथूरिया का मानना है कि इन्वेस्टमेंट शुरू करने से पहले सीखना बेहद जरूरी है. उनके मुताबिक, लोग स्कूल, कॉलेज और प्रोफेशनल डिग्री पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन निवेश सीखने के लिए थोड़ा समय भी नहीं देना चाहते.
उनका कहना है कि अगर आपको निवेश की समझ नहीं है तो दो ही रास्ते हैं या तो पहले सीखिए या फिर किसी एक्सपर्ट की मदद लीजिए.
बिना जानकारी के निवेश करना वैसा ही है जैसे बिना मेडिकल पढ़ाई किए खुद डॉक्टर बनने की कोशिश करना, ऐसी स्थिति में गलती होने के चांस भी काफी बढ़ जाते हैं.
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संजय कथूरिया के मुताबिक, Stock Market वह जगह है जहां देश की कंपनियां लिस्टेड होती हैं और निवेशक उनके शेयर खरीद सकते हैं.
जब कोई निवेशक किसी कंपनी का शेयर खरीदता है तो वह उस कंपनी के कारोबार और मुनाफे का हिस्सेदार बन जाता है.
तो अगर किसी कंपनी के 100 शेयर हैं और आपके पास उसका एक शेयर है, तो आप उसके मुनाफे में भी हिस्सेदार हैं. कंपनी जितनी बढ़ेगी, उसके शेयर की वैल्यू भी उतनी बढ़ सकती है.
मार्केट का बंटवारा: लार्ज, मिड और स्मॉल कैप
शेयर बाजार को कंपनियों की वैल्यू (कैपिटलाइजेशन) के हिसाब से बांटा जाता है:
इसके अलावा कंपनियों को सेक्टर के आधार पर भी बांटा जाता है, जैसे फार्मा, आईटी और अन्य उद्योग आधारित कंपनियां।
संजय कथूरिया का साफ जवाब है नहीं....असल में किसी कंपनी का बिजनेस मॉडल क्या है, उसका रेवेन्यू कहां से आता है, कौन सी खबर उसके कारोबार को प्रभावित कर सकती है, यह समझना आसान नहीं है.
यही वजह है कि बहुत से निवेशकों के लिए सीधे शेयर चुनना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
संजय कथूरिया के अनुसार, Mutual Fund निवेशकों की ओर से निवेश करता है.असल में हर Mutual Fund का एक उद्देश्य होता है
उदाहरण के तौर पर अगर कोई फंड केवल Small Cap कंपनियों में निवेश करता है तो वह Small Cap Mutual Fund कहलाता है
तो ऐसे फंड में रिस्क ज्यादा हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना भी हो सकती है
संजय कथूरिया ने एक बेहद अहम बात कही है. जी हां उनके मुताबिक, निवेशक अक्सर किसी फंड या शेयर का पिछला रिटर्न देखकर निवेश कर देते हैं.
लेकिन निवेश का फैसला केवल रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए.तो किसी भी निवेश को चुनने से पहले दो चीजें समझना जरूरी है:
उनका कहना है कि रिटर्न हमारे नियंत्रण में नहीं होते, लेकिन रिस्क और निवेश की अवधि को समझना हमारे हाथ में होता है.
संजय कथूरिया के उदाहारण के रूप में समझाते हुए कहा कि कैसे खाने की परफेक्ट खाली होती है वैसे ही असल में आपका पोर्टफोलियो होना चाहिए. अगर आप पूरी थाली सिर्फ मीठे (ज्यादा रिस्क वाले रिटर्न) से भर लेंगे, तो यह आपको 'डायबिटीज' (नुकसान) दे सकता है
निवेश में दो चीजें सबसे अहम हैं:
वो कहते हैं कि रिटर्न्स के पीछे मत भागो, रिस्क को मैनेज करो, रिटर्न अपने आप आएंगे.तो एक सफल फंड मैनेजर भी हमेशा रिस्क मैनेज करने पर ध्यान देता है.
संजय कथूरिया का मानना है कि अगर किसी व्यक्ति को निवेश की पर्याप्त जानकारी नहीं है तो उसे सलाह लेने में संकोच नहीं करना चाहिए. तो आज बाजार में कई रजिस्टर्ड फाइनेंशियल प्लानर, एडवाइजर और म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर मौजूद हैं जो निवेशकों को उनके लक्ष्य और जरूरत के हिसाब से सही दिशा दिखा सकते हैं.
कई बार निवेशक खुद नहीं जानते कि उन्हें पैसा कब और किस काम के लिए चाहिए.घर खरीदना है, बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड बनाना है या फ्यूचर के लिए बचत करनी है. तो इन सभी लक्ष्यों के हिसाब से निवेश की प्लानिंग अलग हो सकती है.
संजय कथूरिया का संदेश बेहद साफ है कि Stock Market और Mutual Fund में से कौन बेहतर है, इसका कोई एक जवाब नहीं है.तो सही ऑप्शन इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी रिस्क उठाने की क्षमता क्या है, आपका लक्ष्य क्या है और आप निवेश को कितना समय दे सकते हैं. जी हांअगर जानकारी नहीं है तो पहले सीखिए या फिर किसी विशेषज्ञ की सलाह लीजिए, क्योंकि निवेश में जल्दबाजी से ज्यादा नुकसान और समझदारी से लिया गया फैसला ही लंबे समय में संपत्ति बनाता है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 सीखने का टाइम नहीं है, तो सीधे शेयर खरीदें?
बिल्कुल नहीं, या तो खुद समय देकर सीखें या एक्सपर्ट की मदद लें, बिना जानकारी के निवेश करना खुद का गलत इलाज करने जैसा है
Q2 स्मॉल कैप में पैसा लगाना कब सही है?
सिर्फ तब, जब आप लंबे समय (Long Term) के लिए निवेश कर रहे हों. छोटी कंपनियां बढ़ेंगी तो मुनाफा बड़ा होगा, लेकिन इसमें रिस्क भी ज्यादा रहता है
Q3 पोर्टफोलियो में सबसे जरूरी क्या है- रिटर्न या रिस्क?
रिटर्न के पीछे न भागें, सिर्फ 'रिस्क' और 'समय' पर ध्यान दें, अगर आपने रिस्क मैनेज कर लिया, तो रिटर्न अपने आप पीछे-पीछे आएगा
Q4 क्या सारा पैसा म्यूचुअल फंड में ही डाल देना चाहिए?
निवेश एक 'मिक्स थाली' जैसा होना चाहिए, अपनी जरूरत और रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से अलग-अलग फंड्स का बैलेंस बनाएं
Q5 एक्सपर्ट या एडवाइजर की फीस क्यों दें?
आपको निवेश में 'क्लेरिटी' मिले, एक अच्छा कोच आपके गोल्स के हिसाब से सही रास्ता बताता है, जिससे आप महंगी गलतियों से बच जाते हैं