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भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का दायरा लगातार बढ़ रहा है. खासकर स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है. इसकी बड़ी वजह है इन फंड्स से मिलने वाले हाई रिटर्न, बेहतर ग्रोथ के अवसर और हाल के नियामक सुधार.वैसे सोमवार को जारी आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में मिड-कैप स्कीमों में 5,331 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो हुआ, जो सालाना आधार पर 74.5% की बढ़त है. इसी तरह, स्मॉल-कैप फंड्स में 4,993 करोड़ रुपए का इनफ्लो दर्ज किया गया, जो सालाना आधार पर 55.6% अधिक है. इसके मुकाबले, लार्ज-कैप फंड्स में केवल 2,835 करोड़ रुपए का इनफ्लो हुआ, जो केवल 7.5% की ग्रोथ को दिखाता है.इससे साफ है कि रिटेल निवेशकों का रुझान अब तेजी से स्मॉल और मिड-कैप फंड्स की ओर बढ़ रहा है.
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अगस्त 2025 तक मिड-कैप फंड का AUM 10.9% बढ़कर 4.27 लाख करोड़ रुपए हो गया. स्मॉल-कैप फंड्स का AUM 9.56% बढ़कर 3.51 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, वहीं, लार्ज-कैप फंड्स का AUM 5.86% बढ़कर 3.90 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया.वैसे यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशक अब उन फंड्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां ज्यादा ग्रोथ की संभावना है.
आईसीआरए एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केट डेटा हेड अश्विनी कुमार ने कहा कि लार्ज-कैप कंपनियां पहले से ही मजबूत और स्थापित होती हैं, इसलिए उनकी ग्रोथ अक्सर सीमित होती है.तो वहीं, स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों के पास तेजी से विस्तार करने, इनोवेशन लाने और मार्केट शेयर बढ़ाने के ज्यादा मौके होते हैं.उन्होंने कहा कि लार्ज-कैप कंपनियां स्थिरता के कारण अक्सर महंगे मूल्यांकन पर कारोबार करती हैं. इससे उनका संभावित लाभ सीमित हो सकता है, लेकिन स्मॉल और मिड-कैप कंपनियां कम अंदाज पर मौजूद होती हैं, जिससे उनमें इन्वेस्टमेंट करने पर निवेशकों को बेहतर प्राइस-टू-अर्निंग रेश्यो और एसेट पर रिटर्न मिल जाता है.
कुमार ने आगे कहा कि सरकार की ओर से एमएसएमई को समर्थन देने के लिए कई नई पहल की गई हैं. इसके अलावा बेहतर कॉर्पोरेट डिस्क्लोजर और स्ट्रेस टेस्टिंग जैसे सुधारों ने भी स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों को आगे बढ़ने के लिए एक मजबूत माहौल दिया है. यही वजह है कि इन कंपनियों पर आधारित फंड्स में निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
तो अगर पिछले एक साल के रिटर्न पर नजर डालें तो लार्ज-कैप फंड्स का रिटर्न -3.8%,मिड-कैप का -3.9% और स्मॉल-कैप का -6.4% रहा है, यानी शॉर्ट-टर्म में इन फंड्स ने चुनौतियों का सामना किया है.लेकिन लंबी अवधि में तस्वीर अलग है. तीन साल का रिटर्न देखें तो लार्ज-कैप फंड्स ने 13.5%, मिड-कैप ने 19.6% और स्मॉल-कैप फंड्स ने 19.3% रिटर्न दिया है. यह बताता है कि लंबे समय तक निवेश करने वालों को इन फंड्स से अच्छा मुनाफा मिल सकता है.
रिपोर्ट साफ करती है कि स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में निवेश का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में ये फंड्स बेहतर रिटर्न और मजबूत ग्रोथ की संभावना रखते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर निवेशक रिस्क लेने के लिए तैयार हैं और लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं, तो स्मॉल और मिड-कैप फंड्स उनकी वेल्थ क्रिएशन की जर्नी में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
FAQs
Q1. स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड क्या होते हैं?
ये म्यूचुअल फंड कैटेगरी है, जो छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं.
Q2. अगस्त 2025 में स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड में कितना निवेश हुआ?
स्मॉल-कैप में 4,993 करोड़ और मिड-कैप में 5,331 करोड़ का इनफ्लो दर्ज हुआ.
Q3. इन फंड्स में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
उच्च रिटर्न, सरकार की नीतियां और रेगुलेटरी सुधारों की वजह से.
Q4. क्या स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में रिस्क ज्यादा होता है?
हाँ, शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव ज्यादा होते हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म में अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं.
Q5. निवेशक किसके लिए स्मॉल और मिड-कैप फंड चुनें?
जो निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं और रिस्क लेने को तैयार हैं, उनके लिए ये फंड बेहतर हैं.
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