SIP vs STP: मंथली सैलरी वालों के लिए क्या है बेस्ट,किसे करना चाहिए STP? CA भंवर बोराना से जानें निवेश का असली फॉर्मूला और ऑप्शन

म्यूचुअल फंड निवेश में SIP और STP के बीच क्या अंतर है? ज़ी बिज़नेस के शो 'Paison Ki Pathshala' में CA भंवर बोराना ने समझाया है कि मंथली इनकम वालों के लिए SIP और एकमुश्त रकम (Lump sum) रखने वालों के लिए STP क्यों जरूरी है, निवेश के इन दोनों टूल के फायदों को विस्तार से जानें.
SIP vs STP: मंथली सैलरी वालों के लिए क्या है बेस्ट,किसे करना चाहिए STP? CA भंवर बोराना से जानें निवेश का असली फॉर्मूला और ऑप्शन

म्यूचुअल फंड निवेश में SIP और STP के बीच क्या अंतर है?  (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt) 

म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने वाले लोग अक्सर इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि उनके लिए SIP सही है या STP. लोगों को समझ ही नहीं आता है कि इन दोनों में किसको चुनना चाहिए और किसको नहीं. तो आपके इसी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए ज़ी बिज़नेस के खास पॉडकास्ट शो 'Paison Ki Pathshala' में CA Bhawar Borana ने इन दोनों के बीच का फर्क और इनके यूज का सही तरीका समझाया है.

SIP: किसके लिए है?

CA भंवर बोराना के मुताबिक, SIP उन लोगों के लिए सबसे अच्छा टूल है जिनकी हर महीने सैलरी आती है. जी हां, अगर आप अपनी मंथली इनकम में से एक फिक्स हिस्सा इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो SIP बेस्ट है.

कैसे काम करता है: वैसे तो एक उदाहरण के तौर पर, अगर आपको हर महीने अपनी सैलरी से 20,000 रुपये निवेश करने हैं, तो यह पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट से कटकर म्यूचुअल फंड में चला जाता है.

STP (Systematic Transfer Plan): कब अपनाएं यह तरीका?

STP का मतलब है 'सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान'.जी हां यह उन लोगों के लिए है जिनके पास एक साथ बड़ी रकम (Lump sum) मौजूद है. भंवर बोराना बताते हैं कि तो अगर आपके पास अभी 20 लाख रुपये हैं और आप उन्हें एक साथ किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में नहीं डालना चाहते, बल्कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा लेना चाहते हैं, तो STP करना चाहिए.

STP का प्रोसेस: असल में इसमें आप सबसे पहले अपनी बड़ी रकम को एक 'लिक्विड फंड' में डाल देते हैं. लिक्विड फंड एक सुरक्षित म्यूचुअल फंड है जहां रिस्क बहुत कम होता है (हालांकि रिटर्न भी कम मिलता है).लेकिन इसके बाद, वहां से हर महीने एक फिक्स राशि 'इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड' में ट्रांसफर होती रहती है.जी हां, लिक्विड फंड से इक्विटी फंड में इस तरह पैसे भेजने को ही STP कहते हैं.:

लिक्विड फंड से इक्विटी फंड में होता है ट्रांसफर

CA Bhawar Borana के अनुसार, लिक्विड फंड भी एक तरह का म्यूचुअल फंड होता है, जिसे अपेक्षाकृत सेफ माना जाता है.तो इसमें जोखिम काफी कम होता है, हालांकि रिटर्न भी कम होते हैं,

इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि जब एक बार पैसा लिक्विड फंड में डाल दिया जाता है, तो वहां से हर महीने एक तय रकम इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में ट्रांसफर की जाती है.इस प्रक्रिया को STP यानी Systematic Transfer Plan कहा जाता है.

SIP और STP में किसे चुनें?

अगर किसी व्यक्ति की नियमित मासिक आय है और वह हर महीने निवेश करना चाहता है, तो उसके लिए SIP चुनें लेकिन अगर किसी के पास पहले से एक बड़ी रकम है और धीरे-धीरे निवेश करना चाहता है, तो STP का इस्तेमाल करना चाहिए.

सिंपल शब्दों में समझें किसे चुनें?

सरल शब्दों में कहें तो अगर आपकी मंथली इनकम है और आप नियमित निवेश करना चाहते हैं, तो SIP करिए. लेकिन अगर आपके पास एकमुश्त फंड (Lump sum) रखा है और आप उसे सिस्टमैटिक तरीके से धीरे-धीरे इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो STP का विकल्प चुनें.

आपके काम की बात

एक बात साफ है कि निवेश का सही चुनाव आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है.तो अगर आप वेतनभोगी हैं और हर महीने बचत करना चाहते हैं, तो SIP एक अनुशासित तरीका है. वहीं, अगर आपके पास एकमुश्त बड़ी राशि है और आप जोखिम कम करते हुए मार्केट का लाभ उठाना चाहते हैं, तो STP सबसे बेहतर विकल्प है.

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