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SIP+SWP का ये फॉर्मूला खत्म कर सकता है रिटायरमेंट की टेंशन.
अक्सर हम जब रिटायरमेंट की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में बुढ़ापा, दवाइयां और पैसों की तंगी जैसे ख्याल आने लगते हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि एक बड़ी रकम जमा करना उनके बस की बात नहीं है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप आज से ही एक छोटी सी शुरुआत करें, तो आने वाले 20 सालों में आप खुद का एक ऐसा सिस्टम खड़ा कर सकते हैं जो आपको हर महीने एक शानदार सैलरी की तरह पैसे देगा.
इसे मुमकिन बनाने का एक बहुत ही सरल और असरदार तरीका है जिसे एक्सपर्ट्स '10-12-20 स्ट्रैटेजी' कहते हैं. यह कोई जादू नहीं है, बल्कि निवेश करने का एक अनुशासित तरीका है. आइए समझते हैं कि यह पूरा गणित काम कैसे करता है और आप कैसे अपनी अगली पारी को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकते हैं.
इस स्ट्रैटेजी को समझना बहुत आसान है. इसमें तीन मुख्य हिस्से हैं जो आपके निवेश की दिशा तय करते हैं-
यह फॉर्मूला उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो अभी अपने करियर के शुरुआती या मिड लेवल पर हैं और धीरे-धीरे अपनी बचत बढ़ाना चाहते हैं.
मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप आज से 5,000 रुपये की मंथली एसआईपी (SIP) शुरू करते हैं. जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़ती है, वैसे-वैसे आप हर साल अपने निवेश को 10% बढ़ा देते हैं. यानी पहले साल 5,000 रुपये, दूसरे साल 5,500 रुपये और इसी तरह आगे भी.
अगर आप इसे 20 साल तक जारी रखते हैं और आपको 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो 20 साल पूरे होने पर आपके पास करीब 78 लाख रुपये का एक बड़ा फंड तैयार हो जाएगा. यह ताकत है 'कंपाउंडिंग' की, जहां आपका पैसा ही आपके लिए पैसा कमाता है.
म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए निवेश करने के कई ऐसे फायदे हैं जो आम तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट या बचत खाते में नहीं मिलते-
कंपाउंडिंग की पावर: इसमें आपको मिलने वाले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है. आप जितना लंबा समय देंगे, आपका पैसा उतनी ही तेजी से बढ़ेगा.
रुपया कॉस्ट एवरेजिंग: बाजार कभी ऊपर जाता है तो कभी नीचे. एसआईपी में आप हर महीने निवेश करते हैं, जिससे जब मार्केट गिरता है तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बढ़ता है तो कम. इससे आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है.
अनुशासन और सुविधा: आपको एक साथ बहुत बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं है. आप छोटी रकम से शुरू कर सकते हैं और इसे ऑटोमेट कर सकते हैं ताकि हर महीने आपके खाते से पैसे कटते रहें.
जब 20 साल बाद आपके पास 78 लाख रुपये जमा हो जाएंगे, तब बारी आती है इस पैसे का फायदा उठाने की. यहां काम आता है 'सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान' यानी एसडब्ल्यूपी (SWP). यह आपकी खुद की बनाई हुई पेंशन स्कीम की तरह काम करता है.
आप अपने जमा किए हुए 78 लाख रुपये को किसी ऐसे फंड (जैसे हाइब्रिड या बैलेंस्ड फंड) में डाल सकते हैं जहां रिस्क कम हो और सालाना करीब 8% का रिटर्न मिलता रहे. अब इस फंड से आप हर महीने 45,000 रुपये निकालना शुरू कर सकते हैं.
सबसे कमाल की बात यह है कि जब आप हर महीने 45,000 रुपये निकाल रहे होंगे, तब भी आपका बचा हुआ पैसा मार्केट में निवेशित रहेगा और उस पर 8% का रिटर्न मिलता रहेगा. इस हिसाब से-
एसडब्ल्यूपी (SWP) के कई ऐसे फीचर्स हैं जो इसे ट्रेडिशनल पेंशन प्लान से अलग और बेहतर बनाते हैं. सबसे पहले तो इसमें लचीलापन (Flexibility) है. आप जब चाहें अपनी निकासी की रकम को घटा या बढ़ा सकते हैं. दूसरा बड़ा फायदा है टैक्स में बचत. इसमें केवल आपके मुनाफे वाले हिस्से पर ही टैक्स लगता है, जिससे फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले यह ज्यादा टैक्स-फ्रेंडली साबित होता है. इसके अलावा, आपका पैसा मार्केट में बना रहता है जिससे इसमें आगे भी बढ़ोतरी की गुंजाइश बनी रहती है.
भले ही यह स्ट्रैटेजी कागजों पर बहुत शानदार लगती है, लेकिन निवेश में कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. 10-12-20 की यह स्ट्रैटेजी 12% और 8% के अनुमानित रिटर्न पर आधारित है. असल में मार्केट का रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है. यह पूरी तरह से बाजार की स्थिति और आपके द्वारा चुने गए फंड के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. इसलिए, निवेश शुरू करने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता को जरूर समझें और जरूरत पड़े तो किसी एक्सपर्ट की सलाह लें.