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1 अप्रैल से बदल गए म्यूचुअल फंड के ये नियम. (Image Source-AI)
नया वित्त वर्ष अपने साथ निवेश की दुनिया में एक बहुत बड़ी हलचल लेकर आया है. अगर आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो सावधान हो जाइए क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से आपके निवेश का गणित पूरी तरह बदल गया है. सेबी (SEBI) के नए 'म्यूचुअल फंड रेगुलेशन 2026' आज से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं. इस बदलाव का सीधा असर आपके उस पैसे पर पड़ेगा जो फंड हाउस अपनी फीस और खर्चों के नाम पर आपसे काटते हैं.
देश के दिग्गज फंड हाउस जैसे क्वॉन्ट (Quant), आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ((ICICI Prudential)) और आदित्य बिड़ला सन लाइफ (Aditya Birla Sun Life) ने रातों-रात अपने 'एक्सपेंस स्ट्रक्चर' यानी खर्चों के ढांचे में बड़े बदलाव कर दिए हैं. कंपनियों ने इसके लिए बाकायदा नोटिस और एडेंडम जारी किए हैं. अच्छी बात यह है कि आपकी स्कीम की खूबियां वैसी ही रहेंगी, लेकिन अब आपके बिल का ब्रेकअप बदल जाएगा. चलिए समझते हैं कि आज से क्या-क्या बदल गया है और एक निवेशक के तौर पर आपको किन बातों का ध्यान रखना है.
सेबी (SEBI) ने करीब 30 साल पुराने नियमों को रिटायर कर दिया है. अब तक आप जिसे टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के नाम से जानते थे, उसे अब 'बेस एक्सपेंस रेशियो' (BER) कहा जाएगा. सरकार चाहती है कि निवेशकों को यह साफ पता चले कि उनका पैसा कहां जा रहा है. अब फंड हाउस को अपनी फीस, ब्रोकरेज और सरकारी टैक्स को अलग-अलग दिखाना होगा. इससे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और छिपे हुए खर्चे खत्म होंगे.
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क्वॉन्ट म्यूचुअल फंड ने अपने सभी जरूरी दस्तावेजों (SID और KIM) में बदलाव का एलान कर दिया है. इनका पूरा जोर अब 'एनुअल स्कीम रिकरिंग एक्सपेंस' (ASRE) पर है. वहीं, जेएम फाइनेंशियल एसेट मैनेजमेंट ने अपनी इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट फीस और एडवाइजरी फीस को नए सिरे से तय किया है. ये बदलाव आज यानी 1 अप्रैल 2026 से ही लागू मान लिए गए हैं.
मार्केट के दिग्गज खिलाड़ी आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल (ICICI Prudential) और आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी (Aditya Birla Sun Life) ने भी अपने खर्चों के सेक्शन को अपडेट कर दिया है. आईसीआईसीआई ने अपनी सभी स्कीमों के लिए रिकरिंग एक्सपेंस के नियमों को बदला है. वहीं, आदित्य बिड़ला ने टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) के पूरे फ्रेमवर्क को रिवाइज किया है. हालांकि, इन कंपनियों ने साफ किया है कि निवेश की रणनीति (Investment Strategy) में कोई बदलाव नहीं होगा, बस खर्चों को दिखाने और काटने का तरीका बदलेगा.
बड़ौदा बीएनपी पारिबा एएमसी (Baroda BNP Paribas AMC) ने अपनी स्कीमों के खर्चों की गणना (Computation) करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. पीजीआईएम इंडिया म्यूचुअल फंड ने भी अपनी सभी पुरानी और नई स्कीमों के दस्तावेजों में सुधार कर दिया है. इन दोनों फंड हाउस का कहना है कि सेबी के नए नियम निवेशकों के हक में हैं, क्योंकि अब उन्हें अपनी लागत का सही अंदाजा हो पाएगा.
इनवेस्को म्यूचुअल फंड ने अपनी सालाना स्कीम रिकरिंग एक्सपेंस वाली शर्तों में संशोधन किया है. वहीं, एडलवाइस एएमसी ने अपने पूरे टीईआर (TER) स्ट्रक्चर को फिर से तैयार किया है. इन दोनों कंपनियों ने अपने निवेशकों को सलाह दी है कि वे निवेश से पहले नए दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें क्योंकि पुराने खर्चे अब मान्य नहीं होंगे.
1 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ यह नया दौर म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को और भी ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा. सेबी के इस कदम से फंड हाउस की मनमानी पर लगाम लगेगी और निवेशकों को यह पता होगा कि उनके हर एक रुपये का इस्तेमाल कैसे हो रहा है. अगर आप एक जागरूक निवेशक हैं, तो आपको अपने फंड हाउस की वेबसाइट पर जाकर नए एक्सपेंस रेशियो को जरूर चेक करना चाहिए. याद रखिए, कम खर्च का मतलब है लंबी अवधि में आपके लिए ज्यादा मुनाफा.
Q.1: 1 अप्रैल से म्यूचुअल फंड में क्या बड़ा बदलाव हुआ है?
Answer: सेबी के नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड्स के खर्चों का ढांचा बदल गया है. अब फंड हाउस को अपने सालाना खर्चों (ASRE) और एक्सपेंस रेशियो को नए पारदर्शी तरीके से दिखाना होगा.
Q.2: बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) क्या है?
Answer: सेबी ने टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) का नाम बदलकर अब बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) कर दिया है. इसमें फंड मैनेजर की फीस और अन्य परिचालन खर्चों को ब्रोकरेज और वैधानिक टैक्स से अलग करके दिखाया जाएगा.
Q.3: क्या इन नए नियमों से मेरा पुराना निवेश प्रभावित होगा?
Answer: आपकी स्कीम की निवेश रणनीति या पोर्टफोलियो नहीं बदलेगा, लेकिन आपके फंड से जो सालाना फीस काटी जाती है, उसके कैलकुलेशन और रिपोर्टिंग का तरीका बदल जाएगा.
Q.4: किन कंपनियों ने अपने एक्सपेंस रेशियो में बदलाव किए हैं?
Answer: क्वॉन्ट, जेएम फाइनेंशियल, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल, आदित्य बिड़ला सन लाइफ, बड़ौदा बीएनपी पारिबा, पीजीआईएम इंडिया, इनवेस्को और एडलवाइस समेत लगभग सभी बड़े फंड हाउस ने बदलाव किए हैं.
Q.5: निवेशकों को इस बदलाव का क्या फायदा होगा?
Answer: इस बदलाव से निवेश में पारदर्शिता आएगी. अब निवेशकों को यह साफ पता चलेगा कि वे फंड चलाने के लिए कितनी फीस दे रहे हैं और ब्रोकरेज या टैक्स के रूप में उनका कितना पैसा जा रहा है.