Mutual Fund Mistake: म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले 7 रेड फ्लैग्स जरूर चेक करें. हाई एक्सपेंस रेशियो, लगातार खराब परफॉर्मेंस, हाई टर्नओवर, मैनेजर बदलाव, AUM साइज, सेक्टर कंसंट्रेशन और फंड हाउस ट्रैक रिकॉर्ड समझकर स्मार्ट निवेश करें.
1/9म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट आजकल पॉपुलर है, लेकिन गलत फंड चुनने से नुकसान हो सकता है.म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट के दौरान अक्सर लोग रेड फ्लैग्स को इग्नोर कर देते हैं. जी हां ये रेड फ्लैग्स वो संकेत हैं जो फंड की कमजोरी दिखाते हैं. एक्सपेंस रेशियो और रिस्क पर नजर ना रखना कई बार भारी पड़ जाता है. तो बिना देरी किए समझेंगे कि म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट से पहले कौन से 7 रेड फ्लैग्स का ध्यान रखना चाहिए ताकि फ्यूचर में आपको खुद के द्वारा की गई गलती पर पछताना ना पड़े.
2/9एक्सपेंस रेशियो एक फंड मैनेजमेंट का खर्च है, जो निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है.तो अगर कोई फंड 12% रिटर्न दे रहा है और उसका एक्सपेंस रेशियो 2% है, तो निवेशक के हाथ में केवल 10% बच सकता है. इसलिए निवेशकों को हमेशा 0.5% से 1% तक के कम एक्सपेंस रेशियो वाले फंड चुनने चाहिए.
3/9जी हां अगर कोई फंड लगातार 3 साल से कम रिटर्न दे रहा है, तो यह निवेशकों के लिए खतरे की घंटी हो सकती है. मार्केट से पीछे रहना निवेशक को नुकसान में डाल सकता है. ऐसे फंड में निवेश करने से पहले हमेशा उसका लॉन्ग टर्म का प्रदर्शन देखें.इससे बेहतर होगा कि 5-10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखकर ही निवेश करें. लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड आमतौर पर स्थिर रिटर्न देते हैं और जोखिम कम रखते हैं. यह तरीका स्मार्ट निवेश के लिए जरूरी है.
4/9अगर फंड मैनेजर लगातार शेयर खरीद-बिक्री करता है, तो इसे हाई टर्नओवर रेशियो कहते हैं. तो इसका सीधा असर निवेशकों पर होता है क्योंकि बार-बार ट्रांजेक्शन करने से कॉस्ट बढ़ जाती है और रिटर्न कम हो सकता है. ऐसे में फंड में निवेश करने से पहले टर्नओवर रेशियो जरूर जांचें. बेहतर होता है कि 20-50% टर्नओवर वाले फंड का चयन किया जाए. इससे निवेश पर अनावश्यक खर्च कम होगा और लॉन्ग टर्म में रिटर्न सुरक्षित रहेगा.
5/9अगर फंड का अच्छा मैनेजर छोड़ देता है, तो फंड की दिशा और परफॉर्मेंस बदल सकती है. नया मैनेजर अपनी रणनीति (strategy) बदल सकता है, जिससे निवेशकों को मन चाहा रिटर्न नहीं मिल पाता.तो इसलिए फंड में निवेश करने से पहले नए मैनेजर का अनुभव, ट्रैक रिकॉर्ड और निवेश शैली जरूर जांचें.अनुभवी और भरोसेमंद मैनेजर वाले फंड में निवेश करना लॉन्ग-टर्म रिटर्न के लिए बेहतर माना जाता है. यह सावधानी निवेश की समझदारी का हिस्सा है.
6/9AUM यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट बहुत छोटा (500 करोड़ से कम) या बहुत बड़ा (50,000 करोड़ से ज्यादा) होने पर निवेशकों के लिए चुनौती बन सकता है.असल में छोटा AUM होने पर फंड की लिक्विडिटी में समस्या आ सकती है और बड़े AUM वाले फंड में लचीलापन कम हो जाता है.तो इसलिए हमेशा निवेश से पहले 5,000 से 20,000 करोड़ AUM वाले फंड को चुनना बेहतर माना जा सकता है.
7/9अगर किसी फंड का लगभग 50% निवेश केवल एक ही सेक्टर (जैसे IT) में किया गया हो, तो यह रिस्क बढ़ा देता है. ऐसा होने पर अगर वह सेक्टर नीचे गिरता है, तो फंड का रिटर्न भी प्रभावित होगा.तो इसलिए निवेश करते समय डाइवर्सिफाइड फंड चुनना चाहिए, जो पैसे को अलग-अलग सेक्टर्स और कंपनियों में फैलाता है.ऐसा करने से ना केवल नुकसान का रिस्क कम होता है बल्कि फंड की स्थिरता और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है.
8/9अगर किसी AMC (Asset Management Company) का इतिहास अच्छा नहीं है, यानी पिछले फंड्स लगातार खराब प्रदर्शन कर चुके हैं, तो निवेशकों का उस फंड पर भरोसा कम हो जाता है,ऐसा होने पर नया फंड भी अपेक्षित रिटर्न नहीं दे सकता. तो इसलिए निवेश करते समय हमेशा विश्वसनीय और बड़े AMC जैसे SBI, HDFC, ICICI आदि चुनें. इनका लंबा अनुभव और भरोसेमंद ट्रैक रिकॉर्ड निवेशकों के लिए सुरक्षा और बेहतर रिटर्न तय करता है.
9/9स्मार्ट निवेश के लिए फंड का हाई एक्सपेंस रेशियो, लगातार खराब परफॉर्मेंस, हाई टर्नओवर, मैनेजर बदलाव, बहुत छोटा या बड़ा AUM, हाई सेक्टर कंसंट्रेशन और फंड हाउस का खराब ट्रैक रिकॉर्ड जरूर देखें.जी हां ये 7 रेड फ्लैग्स फंड के जोखिम और संभावित नुकसान को समझने में मदद करते हैं. इन पर ध्यान देकर आप अपने पैसे को सुरक्षित रखते हुए बेहतर रिटर्न कमा सकते हैं.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)