रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम चाहते हैं? तो फिर SWP (सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान) आपके लिए 'सुपरहिट' फॉर्मूला साबित हो सकता है. अब जानिए कैसे यह पेंशन जैसा फायदा देता है, एफडी से बेहतर रिटर्न और टैक्स बचत में मदद करता है.सेफ फ्यूचर के लिए SWP का सही कैलकुलेशन यहां विस्तार से समझें
1/8SWP Retirement Planning: नौकरी के दौरान हर महीने आने वाली सैलरी हमें एक फाइनेंशियल सेफ्टी देती है. लेकिन जब रिटायरमेंट करीब आता है, तो सबसे बड़ी टेंशन होती है कि अब हर महीने घर का खर्च कैसे चलेगा? क्या बरसों की जमा पूंजी अगले 25-30 सालों तक मेरा साथ निभा पाएगी? अगर बाकियों की तरह से आपकी परेशानी कारण यही है तो फिर आज हम आपको निवेश की दुनिया के एक ऐसे 'धुरंधर' के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपकी सारी टेंशन दूर कर सकता है. जी हां इसका नाम है SWP यानी सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (Systematic Withdrawal Plan).तो आइए समझते हैं कि कैसे ये जादुई फॉर्मूला आपकी सेविंग्स को एक परमानेंट मंथली इनकम में बदल सकता हैय
2/8SWP अब निवेश का बेस्ट ऑप्शन बन रहा है, इसे आप 'उल्टा SIP' कह सकते हैं. SIP में आप हर महीने इन्वेस्टमेंट करते हैं, जबकि SWP में आप म्यूचुअल फंड में जमा अपनी बड़ी रकम से हर महीने एक फिक्स राशि निकालते हैं. इस निवेश की सबसे बड़ी खासियत ये है कि आप जितनी रकम निकालते हैं, केवल उतनी ही यूनिट्स कम होती हैं, बाकी बचा हुआ पैसा मार्केट में निवेशित रहता है और उस पर रिटर्न बढ़ता रहता है.
3/8SWP रिटायरमेंट पर पेंशन वाला अहसास देगा. असल में मान लीजिए आपने तय किया कि आपको हर महीने ₹20,000 या ₹25,000 की जरूरत है ,तो फंड हाउस हर महीने एक फिक्स डेट को ये रकम सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर देगा. आपको बार-बार बैंक जाने या फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती है. इतना ही नहीं विड्रॉल पर आपका पूरा कंट्रोल होता है. मतलब ये है कि अगर कभी किसी कारण से पैसों की ज्यादा जरूरत हो या कभी आप विड्रॉल रोकना चाहें, तो आप अपनी मर्जी से इसे घटा-बढ़ा सकते हैं.
4/8अगर आप SWP से रेगुलर इनकम चाहते हैं, तो सालाना 6% से 8% तक ही पैसा निकालना अच्छा माना जा सकता है, असल में यह दर सबसे सेफ माना जा सकता है. मान लें कि अगर आपका निवेश ₹50 लाख है, तो महीने के ₹20,000 से ₹25,000 निकालना सही रहेगा. जी हां इससे आपका जमा किया हुआ मूल पैसा भी बचा रहेगा और लंबे समय तक आपकी जरूरतें पूरी होती रहेंगी.
5/8रिटायरमेंट के बाद घर का किराया, राशन और मेडिकल बिल जैसे खर्चे कभी कम नहीं होते, बल्कि महंगाई के साथ बढ़ते ही जाते हैं. तो ये निवेश इन जरूरतों को पूरा करने में का आता है. SWP को एक 'सपोर्ट लेयर' की तरह इस्तेमाल करना चाहिए.
6/8SWP का यूज करते समय एक बात का ध्यान रखें कि मार्केट का रिस्क. जी हां अगर आप पूरी तरह SWP पर डिपेंड हैं और किसी साल मार्केट बहुत बुरा रूप दिखाता है, तो आपकी पूंजी तेजी से घट सकती है. तो इसीलिए समझदारी इसी में है कि अपनी पूंजी को सिर्फ इक्विटी (शेयर बाजार) में न रखकर हाइब्रिड या डेट फंड्स में भी रखें. एक बैलेंस पोर्टफोलियो होने से बाजार की गिरावट का निवेश पर ज्यादा असर नहीं होता है.
7/8रिटायर्ड लोगों के लिए टैक्स बचाना भी टेंशन वाला होता है. लेकिन SWP में मिलने वाली रकम को आपकी पूरी इनकम नहीं माना जाता. असल में मानते हैं कि SWP में जो पैसा आप निकालते हैं, उसका एक बड़ा हिस्सा आपका अपना मूलधन (Principal) होता है और उस टैक्स नहीं गलता है. असल में केवल मुनाफे वाले हिस्से पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है.तो फिर अगर आपका इन्वेस्टमेंट एक साल से पुराना है, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के तहत यानी 1.25 लाख रुपये से अधिक के लॉन्ग टर्म गेन्स पर केवल 12.5% की दर से टैक्स लगता है.
8/8SWP उन लोगों के लिए बेस्ट होता है जो अपने खर्चों पर नजर रख सकते हैं और जिन्हें थोड़ी ग्रोथ की चाहत है.असल में ये आपको वो लचीलापन और कंट्रोल देता है जो पुराने जमाने के प्रोडक्ट्स में नहीं मिलता है. तो फिर अगर आपके पास एक अच्छा रिटायरमेंट फंड तैयार है और आप एक सुरक्षित इनकम सोर्स के साथ इसे जोड़कर चलाते हैं, तो ये आपके सुनहरे फ्यूचर का सबसे भरोसेमंद साथी बन सकता है.