SIP investment mistakes: सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) यानी एसआईपी में निवेश की 5 बड़ी गलतियां आपका मुनाफा कम कर सकती हैं.तो ऐसे में बाजार गिरने पर निवेश रोकना या केवल पिछला रिटर्न देखकर फंड चुनना भारी पड़ सकता है.इसलिए एक्सपर्ट तारेश भाटिया से समझिए वेल्थ क्रिएशन का सही मंत्र और बढ़ाएं अपना निवेश.
1/8आने वाले कल को टेंशन फ्री रखने के लिए केवल पैसे कमाना काफी नहीं होता है, उस पैसे को सही जगह निवेश करना भी जरूरी होता है.जी हां अगर आप फ्यूचर में इन्वेस्टमेंट से अच्छा फंड चाहते हैं तो एसआईपी में निवेश कर सकते हैं. आज के टाइम में हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार एसआईपी में निवेश कर रहा है. भले ही एसआईपी में 12 से 15 फीसदी तक का औसत रिटर्न मिल जाता हो, लेकिन फिर भी कई बार हमारे द्वारा की जाने वाली कुछ गलतियों के कारण अच्छा रिटर्न ना मिलने से फ्यूचर में तगड़ा फंड नहीं बन पाता है.
2/8जी हां कई इन्वेस्टर मानते हैं कि SIP से हमेशा एक जैसा रिटर्न मिलता है.लेकिन असल में, SIP इन्वेस्टिंग मार्केट साइकिल के हिसाब से काम करती है, वैसे कुछ समय के लिए खराब परफॉर्मेंस अक्सर लंबे समय में पैसा बनाने का हिस्सा होती है. तो चलिए जानेंगे एक्सपर्ट तारेश भाटिया ने कौन सी 5 गलतियां बताऊ हैं जो निवेशक एआईपी इन्वेस्टमेंट में करते हैं.
3/8बाजार की गिरावट से घबराकर SIP रोकना फाइनेंशियल गलती हो सकती है. असल में, मार्केट करेक्शन कोई खतरा नहीं, बल्कि एक डिस्काउंट सेल हो सकता है.जी हां जब बाजार नीचे होता है, तो आपकी उतनी ही इन्वेस्टमेंट राशि से आपको म्यूचुअल फंड की ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जिसे रुपया-कॉस्ट एवरेजिंगकहते हैं. अगर मार्केट गिरने पर निवेश बंद करेंगे तो फ्यूचर में मिलने वाले तगड़े रिटर्न का मौका खो सकते हैं.
4/8इक्विटी म्यूचुअल फंड लॉन्ग टर्म वाले होते हैं इनसे एक-दो साल में तगड़ा मुनाफे की उम्मीद करना सबसे बड़ी गलती है. एसआईपी का असली जादू कंपाउंडिंग में छिपा होता है, जिसका असर करीब 5 से 10 साल बाद ही सही से दिखना शुरू होता है. शुरू में भले ही आपको मुनाफा अच्छा ना दिखे लेकिन लॉन्ग टर्म में आपको फायदा मिलता दिखेगा.इसलिए अगर आपका टारगेट बहुत छोटा है और आप पैसा इक्विटी में डाल रहे हैं, तो आप रिस्क मोल ले रहे हैं.
5/8बिना एसेट एलोकेशन के एसआईपी में इन्वेस्टमेंट करना बड़ी गलती मानी जा सकती है.असल में एसेट एलोकेशन का सीधा मतलब है अपने पैसे को केवल एक जगह रखने के बजाय इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसी अलग-अलग संपत्तियों में सही अनुपात में बांटना.जी हां अगर आप अपना पूरा पैसा केवल शेयर बाजार में लगा देते हैं, तो फिर मार्केट की एक गिरावट आपके पूरे पोर्टफोलियो को बिगाड़ कर सकती है.इसलिए डिफरेंट एसेट क्लास में पैसा लगाने से पोर्टफोलियो बैलेंस रहता है और मार्केट के उतार-चढ़ाव के दौरान टेंशन या फाइनेंशियल नुकसान नहीं झेलना पड़ता.
6/8अक्सर ऐसा ही होता है कि निवेशक ये ही करते हैं कि वो एसआईपी में निवेश करते टाइम वो केवल पिछले फंड के रिटर्न को देकर आंख बंद करके उसमें अपनी कमाई को लगा देते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती होती है, क्योंकि कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए.असल में हमेशा याद रखें कि लास्ट प्रदर्शन फ्यूचर के रिटर्न की गारंटी नहीं होता है. तो फिर हमेशा ही फंड के फंडामेंटल्स, फंड मैनेजर का अनुभव और निवेश की प्लानिंग को समझना जरूरी है
7/8सैलरी बढ़ने के साथ एसआईपी को ना बढ़ाना एक बड़ी फाइनेंशियल मिस्टेक मानी जा सकती है, असल में अगर आप हर साल अपने निवेश में कम से कम 10% की बढ़ोतरी नहीं करते, तो आप बढ़ती महंगाई को मात नहीं दे पाएंगे और कंपाउंडिंग के असली जादू से भी दूर हो सकते हैं. जी हां इनकम बढ़ते ही इन्वेस्टमेंट को बढ़ाना आपको रिटायरमेंट तक लाखों का एक्स्ट्रा फंड भी दे सकता है
8/8तारेश भाटिया के अनुसार इन्वेस्टर्स को SIP निवेश में कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए.जैसे इक्विटी फंड के लिए कम से कम 5-7 साल, पूरे मार्केट साइकिल को समझना .जी हां साफ है कि आपकी एक गलती से फ्यूचर के फंड पर असर हो सकता है.