Mutual fund Investment: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय नॉमिनेशन करना बेहद जरूरी है.तो अगर निवेशक की मृत्यु हो जाए और नॉमिनी दर्ज न हो तो परिवार को पैसा पाने में कानूनी परेशानियां आ सकती हैं.तो जानिए SEBI के नियम और नॉमिनेशन से जुड़ी जरूरी बातें.
1/10आजकल लाखों लोग अपनी बचत को म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं.असल में SIP के जरिए धीरे-धीरे पैसा जोड़कर लोग फ्यूचर सेफ करना चाहते हैं. लेकिन कई बार इन्वेस्टमेंट करते टाइम एक छोटी सी मिस्टेक आगे चलकर परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है.असल में यह गलती है Nomination यानी नॉमिनी न जोड़ना या गलत जानकारी देना है.जी हां अगर किसी निवेशक की मृत्यु हो जाती है और उसके म्यूचुअल फंड में नॉमिनी दर्ज नहीं है, तो परिवार को पैसा निकालने के लिए लंबी कानूनी प्रोसेस से गुजरना पड़ सकता है.
2/10म्यूचुअल फंड निवेश में Nominee वह व्यक्ति होता है जिसे निवेशक की मृत्यु के बाद फंड की यूनिट्स ट्रांसफर की जाती हैं.जी हांअगर नॉमिनी दर्ज है तो प्रोसेस काफी आसान हो जाता है.असल में परिवार को केवल कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं और फंड ट्रांसमिट हो जाता है, लेकिन अगर नॉमिनी नहीं है तो मामला परेशानी से भरा हो सकता है,
3/10अगर म्यूचुअल फंड में नॉमिनी नहीं है तो परिवार को पैसा निकालने के लिए Succession Certificate,Legal Heir Certificate और एक्स्ट्रा कानूनी डाक्यूमेंट्स जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ सकता है. असल में कई मामलों में इसमें काफी समय और खर्च लग सकता है.
4/10Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने निवेशकों के लिए साफ नियम बनाया है कि निवेशक को Nomination दर्ज करना होगा या Opt-out declaration देना होगा, लेकिन अगर इनमें से कोई भी विकल्प नहीं चुना गया तो म्यूचुअल फंड फोलियो फ्रीज हो सकता है.
5/10बहुत से लोग सोचते हैं कि नॉमिनी बना देने से वही व्यक्ति उस पैसे का मालिक बन जाता है,लेकिन कानूनी रूप से ऐसा नहीं है.असल में नॉमिनी को केवल पैसा प्राप्त करने का अधिकार होता है.असल में असली अधिकार उन लोगों का होता है जो कानूनी वारिस होते हैं या जिनका नाम वसीयत (Will) में लिखा होता है.
6/10सबसे बड़ी और आम गलती हैआधार कार्ड और म्यूचुअल फंड रिकॉर्ड में नॉमिनी के नाम की स्पेलिंग अलग होना.असल में अगर आपकी पत्नी का नाम 'Sangeeta' है और रिकॉर्ड में 'Sangita' लिखा है, तो फंड हाउस पैसा देने से मना कर सकता है.तो हमेशा नॉमिनी का वही नाम लिखें जो उसके पैन कार्ड या आधार कार्ड पर है.इसके साथ ही, नॉमिनी का पता और जन्मतिथि भी अपडेट रखें.
7/10म्यूचुअल फंड निवेश में निवेशक अधिकतम तीन नॉमिनी बना सकता है.असल में हर नॉमिनी की प्रतिशत हिस्सेदारी तय कर सकता है. जैसे करीब -पत्नी -50%, बच्चा- 25%, दूसरा बच्चा- 25% हो सकता है.असल में इससे भविष्य में विवाद की संभावना कम हो जाती है.
8/10निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनी को आमतौर पर डेथ सर्टिफिकेट,KYC दस्तावेज,बैंक डिटेल्स,ट्रांसमिशन फॉर्म जैसे दस्तावेज देने होते हैं.इसके बाद फंड हाउस यूनिट्स को नॉमिनी के नाम ट्रांसफर कर देता है.
9/10अगर आपने म्यूचुअल फंड में निवेश किया है तो अपने सभी निवेश में नॉमिनी अपडेट करें, नॉमिनी की जानकारी KYC के अनुसार सही रखें,परिवार को बताएं कि आपने कहां निवेश किया है.असल में कई बार जानकारी के अभाव में करोड़ों रुपये का निवेश सालों तक Unclaimed पड़ा रहता हैय
10/10म्यूचुअल फंड निवेश केवल पैसा कमाने का जरिया नहीं बल्कि परिवार की सुरक्षा का भी जरिया है.तो इसलिए निवेश करते समय नॉमिनेशन को हल्के में नहीं लेना चाहिए.इसलिए सही तरीके से नॉमिनी जोड़ने से यह सुनिश्चित होता है कि जरूरत पड़ने पर आपके परिवार को बिना परेशानी आपकी मेहनत की कमाई मिल सके.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)