NFO: फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने लॉन्च किया फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी फैक्टर फंड, ₹500 से SIP शुरू, जानें पूरी डीटेल

NFO Alert: यह न्यू फंड ऑफर (NFO) 10 नवंबर 2025 से 24 नवंबर 2025 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. इस अवधि के दौरान यूनिट्स 10 रुपये प्रति यूनिट की कीमत पर उपलब्ध होंगी.
NFO: फ्रैंकलिन टेम्पलटन ने लॉन्च किया फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी फैक्टर फंड, ₹500 से SIP शुरू, जानें पूरी डीटेल

NFO Alert: फ्रैंकलिन टेम्पलटन (इंडिया) ने मंगलवार (4 नंबर) अपना न्यू फंड ऑफर (NFO), फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी-फैक्टर फंड (Franklin India Multi-Factor Fund) लॉन्च करने की घोषणा की है. यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है जो मल्टी-फैक्टर आधारित क्वांटिटेडिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी को फॉलो करती है.

कब से खुलेगा NFO?

यह न्यू फंड ऑफर (NFO) 10 नवंबर 2025 से 24 नवंबर 2025 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. इस अवधि के दौरान यूनिट्स 10 रुपये प्रति यूनिट की कीमत पर उपलब्ध होंगी. यह योजना 2 दिसंबर से निरंतर खरीद और पुनर्खरीद के लिए फिर से खुलेगी. FIMF शेयरों को चुनने के लिए एक डेटा-आधारित, व्यवस्थित तरीका अपनाता है. यह क्वालिटी, वैल्यू, सेंटीमेंट और अल्टरनेटिव्स जैसे फैक्टर का इस्तेमाल करता है.

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₹500 से SIP की शुरुआत

NFO में न्यूनतम निवेश राशि ₹5,000 तय की गई है. अतिरिक्त निवेश के लिए न्यूनतम राशि ₹1,000 होगी. रिडेम्पशन के लिए भी न्यूनतम राशि ₹1,000 तय की गई है. उपरोक्त न्यूनतम राशि से ज्यादा सब्सक्रिप्शन या रिडेम्पशन किसी भी राशि में ₹1 के गुणक में किया जा सकता है. एसआईपी (SIP) के लिए न्यूनतम निवेश राशि ₹500 होगी.

एग्जिट लोड

फंड के प्रदर्शन का मूल्यांकन BSE 200 TRI बेंचमार्क के आधार पर किया जाएगा. अगर निवेशक आवंटन की तारीख से 1 वर्ष के भीतर रिडेम्पशन करते हैं, तो 0.50% का एग्जिट लोड लागू होगा. हालांकि, निवेशक 10% तक की यूनिट्स बिना किसी लोड के स्विच आउट या रिडीम कर सकते हैं. 1 वर्ष के बाद रिडेम्पशन करने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लिया जाएगा.

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कहां होगा निवेश?

निवेश के लिए यह फंड मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की टॉप 500 लिस्टेड कंपनियों में से शेयर चुनता है. इस फंड का लक्ष्य एक अनुशासित, मॉडल-आधारित प्रक्रिया को फंड मैनेजर की समझ के साथ मिलाकर जोखिम को ध्यान में रखते हुए अच्छा रिटर्न देना है.

टीम के पास 160 साल से ज्यादा का निवेश अनुभव

एनएफओ लॉन्च पर फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया के प्रेसिडेंट अविनाश सत्वालेकर ने कहा कि, आज टेक्नोलॉजी हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी है. यह हमारे काम करने, बात करने और फैसले लेने के तरीके को बदल रही है. टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से अब बड़े पैमाने पर डेटा का विश्लेषण करना और उसके आधार पर क्वांटिटेटिव मॉडल बनाना संभव हो गया है, जिससे पोर्टफोलियो मैनेजर बेहतर निवेश अवसर खोज सकते हैं.

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फ्रैंकलिन टेम्पलटन इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एंड हेड, एडम पेट्रिक ने कहा कि, फ्रैंकलिन टेम्पलटन इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस टीम 9,800 डॉलर से ज्यादा का प्रबंधन करती है. हमारी टीम के पास 160 साल से ज्यादा का निवेश अनुभव है. हमारा ग्लोबल क्वांटिटेटिव इन्वेस्टमेंट्स टीम पारंपरिक फंडामेंटल निवेश शैली से अलग, गहरी समझ और सिस्टमैटिक तरीके से निवेश करती है.

Franklin Templeton Mutual

फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी-फैक्टर फंड के फंड मैनेजर, अरिहंत जैन ने कहा कि फ्रैंकलिन इंडिया मल्टी-फैक्टर फंड (Franklin India Multi-Factor Fund), डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाने के लिए एक अनुशासित, क्वांटिटेटिव-आधारित प्रक्रिया का उपयोग करता है. शेयरों का मूल्यांकन करने के लिए यह क्वांट मॉडल चार प्रमुख कैटेगरी - क्वालिटी, वैल्यू, सेंटीमेंट और अल्टरनेटिव्स की जांच करता है. इन 4 फैक्टर्स के अंदर कई छोटे-छोटे मापदंड होते हैं, जो कंपनी के प्रदर्शन के अलग-अलग पहलुओं को पकड़ते हैं..

उन्होंने आगे कहा कि, अलग अलग मार्केट साइकिल में अलग-अलग फैक्टर अच्छा काम करते हैं. इसलिए, क्वालिटी, वैल्यू, मोमेंटम और लो वोलैटिलिटी जैसे फैक्टर्स में निवेश करने से एक ही फैक्टर पर निर्भर रहने का जोखिम कम हो जाता है. मॉडल गुणात्मक (क्वालिटेटिव) और मात्रात्मक (क्वांटिटेटिव) दोनों तरह के डेटा को प्रोसेस करता है और तय नियमों के आधार पर स्कोर देता है. पोर्टफोलियो बनाने में यह क्वांट मॉडल 40 से ज्यादा फैक्टर्स का उपयोग करता है. इसके अलावा सेक्टर, कंपनी का आकार, रिस्क और निवेश शैली को भी संतुलित किया जाता है ताकि किसी एक दिशा में ज्यादा जोखिम न बढ़े. पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिए रिस्क मैनेजमेंट रणनीतियाँ भी शामिल की जाती हैं.

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FIMF के लिए निवेश मॉडल, क्वांट निवेश के साथ भारतीय इक्विटी बाजारों के व्यापक विश्लेषण को जोड़ता है. यह मॉडल मौजूदा फैक्टर्स का व्यवस्थित रूप से पुनर्मूल्यांकन करके, नए फैक्टर्स को शामिल करके, और संकेतों की विश्वसनीयता बनाए रखकर, बदलती बाजार स्थितियों के अनुसार लगातार ढलने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है.

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