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म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने से पहले सही स्कीम का चुनाव बहुत जरूरी है, क्योंकि एक छोटी सी गलती आपके रिटर्न को घटा सकती है. कई इन्वेस्टर्स केवल पिछले रिटर्न देखकर फंड चुन लेते हैं, जबकि उन्हें अपने इन्वेस्टमेंट के टारगेट, रिस्क और टाइमिंग को ध्यान में रखना चाहिए.असल में एक गलत कैटेगरी के फंड में पैसा लगाने से बाजार में गिरावट के दौरान नुकसान बढ़ सकता है.तो हमेशा फंड के परफॉर्मेंस, एक्सपेंस रेश्यो, फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड और अपने फाइनेंशियल टारगेट का रिव्यू करके ही म्यूचुअल फंड का चयन करें.तो जानेंगे म्यूचुअल फंड में निवेश करके धनवान बनना है तो कौन सी गलतियां कभी ना करें.
अक्सर निवेशक केवल इसलिए फंड चुनते हैं क्योंकि उसने पिछले साल अच्छा रिटर्न दिया था, लेकिन शेयर मार्केट हर साल बदलता है जो फंड आज टॉप पर है, वो अगले साल नीचे भी जा सकता है. तो बेहतर ये ही है कि आप फंड के लॉन्ग टाइम के प्रदर्शन, फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड और बेंचमार्क से तुलना पर ध्यान दें. इसके साथ ही याद रखें, स्थिर प्रदर्शन ज़्यादा अहम है, न कि एक साल का ऊंचा रिटर्न.
हर म्यूचुअल फंड में कुछ न कुछ रिस्क होता है. इक्विटी फंड ज्यादा रिस्क वाले होते हैं लेकिन लॉन्ग टर्म में बेहतर रिटर्न देते हैं, जबकि डेट फंड सुरक्षित होते हैं पर रिटर्न कम देते हैं.इसके साथ ही अक्सर निवेशक बिना अपनी रिस्क टॉलरेंस या टारगेट समझे बिना फंड चुन लेते हैं, जिससे निवेश उनके अनुरूप नहीं रहता है. असल में किसी भी स्कीम में पैसा लगाने से पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता जरूर समझें.
डायवर्सिटी रिस्क कम करती है, लेकिन बहुत ज्यादा फंड रखना उल्टा नुकसानदेह हो सकता है. कई लोग 10-15 फंड में निवेश कर लेते हैं, जबकि उनमें से कई एक जैसे ही होते हैं.तो ऐसे पोर्टफोलियो को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है और फायदा भी खास नहीं मिलता. आप याद रखिए किए 4 से 6 अच्छे फंड वाला पोर्टफोलियो ही आमतौर पर स्थिरता और विकास दोनों के लिए पर्याप्त होता है.
हर म्यूचुअल फंड निवेश प्रबंधन के लिए एक्सपेंस रेशियो चार्ज करता है, जो सीधे आपके रिटर्न को प्रभावित करता है.जी हां दो फंड अगर एक जैसी स्कीम चला रहे हैं, तो भी ज्यादा खर्च वाला फंड कम रिटर्न देगा.हमेशा कोशिश करें कि आप डायरेक्ट प्लान चुनें क्योंकि इनमें खर्च कम होता . तो अगर आपने इस पहलू पर ध्यान नहीं दिया, तो लंबे समय में बड़ा नुकसान हो सकता है.
आमतौर पर कई लोग बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य के म्यूचुअल फंड में पैसा लगा देते हैं.जैसे कि 20 साल बाद रिटायरमेंट के लिए शॉर्ट-टर्म डेट फंड में निवेश करना, या कुछ महीनों में बच्चे की फीस के लिए हाई-रिस्क इक्विटी फंड लेना.तो ऐसे निवेश से लक्ष्य पूरे नहीं होते हैं. यही कारण है कि हर फंड का चयन आपके फाइनेंशियल टारगेट, समय अवधि और जोखिम स्तर के अनुसार होना चाहिए.
अच्छे म्यूचुअल फंड का चयन सिर्फ रिटर्न चार्ट देखने से नहीं होता,तो अगर आप पिछले रिटर्न्स के पीछे भागने, जोखिम को न समझने या जरूरत से ज्यादा फंड रखने जैसी गलतियों से बचें , जी हां आप एक ऐसा पोर्टफोलियो बना सकते हैं जो लंबे समय तक काम करे. ऐसे में हमेशा अपने निवेश को लॉन्ग टर्म के प्लानिंग से जोड़ें, खर्चों पर नजर रखें, और फंड के प्रदर्शन की नियमित रिव्यू करें.जी हां सही प्लानिंग अपनाने पर म्यूचुअल फंड *आपके लिए सबसे भरोसेमंद वेल्थ-बिल्डिंग टूल साबित हो सकता है.नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)
5 FAQs
1. म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले सबसे जरूरी बात क्या है?
निवेश से पहले अपनी जोखिम सहन क्षमता (Risk Profile), निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को समझना सबसे जरूरी है.
2. क्या सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड चुनना सही है?
नहीं, केवल पिछले रिटर्न पर भरोसा करना गलत है, फंड का लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस और फंड मैनेजर का रिकॉर्ड देखना चाहिए.
3. म्यूचुअल फंड में कितने फंड रखने चाहिए?
आम निवेशकों के लिए 4 से 6 अच्छे फंड पर्याप्त होते हैं, बहुत ज्यादा फंड रखने से ट्रैक करना मुश्किल और रिटर्न कम हो सकता है.
4. एक्सपेंस रेशियो क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
एक्सपेंस रेशियो फंड मैनेजमेंट की फीस होती है, जो सीधे रिटर्न को प्रभावित करती है, कम एक्सपेंस रेशियो वाले डायरेक्ट प्लान बेहतर माने जाते हैं.
5. क्या म्यूचुअल फंड निवेश को लक्ष्य से जोड़ना जरूरी है?
हाँ, हर निवेश को आपके वित्तीय लक्ष्य और अवधि से जोड़ना चाहिए, इससे फंड चयन सही होता है और लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं.
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