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SIP करने वालों को Expense Ratio पर जरूर ध्यान देना चाहिए. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
2026 में म्यूचुअल फंड निवेशकों के बीच एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पहले जहां ज्यादातर लोग सिर्फ रिटर्न देखकर फंड चुनते थे, वहीं अब Expense Ratio यानी फंड मैनेजमेंट की लागत पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है. वजह साफ है. Expense Ratio जितना कम होगा, निवेशक का उतना ज्यादा पैसा बाजार में निवेशित रहेगा और लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा उतना बड़ा बन सकता है.
एक्सपर्ट मानते हैं कि सालाना सिर्फ 0.5% से 1% तक का अंतर भी लंबे समय में निवेशकों की कुल संपत्ति पर बड़ा असर डाल सकता है. खासतौर पर Flexi Cap Funds में यह बात ज्यादा अहम हो जाती है क्योंकि ये फंड बड़े, मिड और स्मॉल कैप शेयरों के बीच अपने निवेश को बदल सकते हैं.
2026 में कम लागत वाले Flexi Cap Funds तेजी से निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं. Direct Plan वाले कई फंड ऐसे हैं जो कम Expense Ratio के साथ अच्छा प्रदर्शन भी दिखा रहे हैं.
सबसे पहले बात Edelweiss Flexi Cap Fund की करें तो इसका Expense Ratio सिर्फ 0.46% है. इस फंड ने पिछले कई सालों में लगातार मजबूत प्रदर्शन दिखाया है. पिछले 1 साल में फंड ने 8.64% रिटर्न दिया है. वहीं 5 साल का रिटर्न 18.04% और 10 साल का रिटर्न 16.61% रहा है.
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इस फंड की खास बात इसकी लगातार बेहतर परफॉर्मेंस मानी जा रही है. फंड ने पिछले 10 सालों में अपने Benchmark और कैटेगरी दोनों को पीछे छोड़ा है. Risk Adjusted Return के मामले में भी यह मजबूत दिखाई देता है. इसका Sharpe Ratio 0.72 और Alpha 3.48 है. इससे पता चलता है कि फंड ने जोखिम के मुकाबले बेहतर रिटर्न देने की कोशिश की है.
पोर्टफोलियो की बात करें तो इसमें HDFC Bank और ICICI Bank जैसे वित्तीय शेयरों पर मजबूत फोकस है. इसके अलावा Reliance Industries और Larsen & Toubro जैसे बड़े नाम भी पोर्टफोलियो में शामिल हैं.
दूसरा नाम Nippon India Flexi Cap Fund का है. इसका Expense Ratio भी 0.46% है. यह फंड 2021 में लॉन्च हुआ था और तेजी से बढ़कर 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के Assets तक पहुंच गया है.
पिछले 1 साल में इस फंड ने 5.84% रिटर्न दिया है जबकि 3 साल का रिटर्न 17.72% रहा है. फंड का प्रदर्शन ज्यादातर Benchmark के आसपास रहा है लेकिन हल्का बेहतर भी माना गया है. हालांकि यह अपनी कैटेगरी के मुकाबले थोड़ा पीछे रहा.
Risk Metrics पर नजर डालें तो इसका Beta 0.98 और Alpha 0.73 है. यानी फंड का मूवमेंट काफी हद तक बाजार के साथ चलता है और इसमें ज्यादा आक्रामक रणनीति नहीं दिखती.
इस फंड के पोर्टफोलियो में भी वित्तीय सेक्टर का दबदबा है. HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank इसके बड़े होल्डिंग्स में शामिल हैं. इसके अलावा Industrial और Consumption सेक्टर में भी निवेश किया गया है.
तीसरे नंबर पर Mirae Asset Flexi Cap Fund आता है. इसका Expense Ratio 0.51% है. यह फंड 2023 में लॉन्च हुआ था लेकिन कम समय में ही मजबूत प्रदर्शन दिखाने में सफल रहा है.
पिछले 1 साल में इस फंड ने 10.38% रिटर्न दिया जबकि 3 साल का रिटर्न 18.21% रहा है. फंड ने Benchmark और अपनी कैटेगरी दोनों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है. इससे यह संकेत मिलता है कि फंड की Stock Selection और Asset Allocation रणनीति फिलहाल असरदार रही है.
Risk और Return के संतुलन की बात करें तो इसका Sharpe Ratio 0.62 और Alpha 1.90 है. यानी सीमित ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद फंड ने संतुलित प्रदर्शन दिखाया है.
इस फंड के पोर्टफोलियो में State Bank of India, Infosys और Bharti Airtel जैसे शेयर प्रमुख हैं. हालांकि यहां भी वित्तीय शेयरों का झुकाव साफ दिखाई देता है.
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पांचवें नंबर पर Tata Flexi Cap Fund है जिसका Expense Ratio 0.59% है. इस फंड का हालिया प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा है लेकिन लंबे समय की तस्वीर कुछ बेहतर दिखाई देती है.
पिछले 1 साल में फंड ने 3.75% रिटर्न दिया है. वहीं 3 साल का रिटर्न 17.91% और 5 साल का रिटर्न 14.24% रहा है.
दिलचस्प बात यह है कि फंड का Beta 0.87 है जो बाकी कई फंड्स के मुकाबले कम Volatility दिखाता है. साथ ही Alpha 2.11 यह संकेत देता है कि भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बन सकती है.
इस फंड के पोर्टफोलियो में भी वित्तीय सेक्टर का अच्छा हिस्सा है. इसके अलावा Maruti Suzuki और ITC जैसे शेयरों के जरिए Consumption और Infrastructure सेक्टर में निवेश किया गया है.
दरअसल FY26 में Flexi Cap Funds में निवेशकों की दिलचस्पी काफी तेजी से बढ़ी है. Association of Mutual Funds in India यानी AMFI के आंकड़ों के मुताबिक इस कैटेगरी में FY26 के दौरान 79,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया. Equity Segment में यह सबसे ज्यादा निवेश पाने वाली कैटेगरी रही.
सिर्फ मार्च 2026 में ही Flexi Cap Funds में रिकॉर्ड 10,054 करोड़ रुपये का निवेश आया. बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को यह कैटेगरी इसलिए पसंद आ रही है क्योंकि इसमें फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के हिसाब से Large Cap, Mid Cap और Small Cap शेयरों के बीच तेजी से बदलाव कर सकते हैं.
हालांकि निवेशकों के लिए सिर्फ कम Expense Ratio या पुराना रिटर्न देखना काफी नहीं माना जाता. किसी भी फंड में पैसा लगाने से पहले उसकी अलग-अलग बाजार परिस्थितियों में स्थिरता, फंड मैनेजर की रणनीति, Risk Adjusted Return और अपने वित्तीय लक्ष्यों के साथ उसका मेल भी देखना जरूरी है.
कुल मिलाकर देखा जाए तो कम लागत वाले Flexi Cap Funds लॉन्ग टर्म में मजबूत Wealth Creation का मौका दे सकते हैं. खासतौर पर ऐसे समय में जब बाजार में Volatility बनी हुई हो, तब Flexibility रखने वाले फंड निवेशकों को बेहतर संतुलन देने की कोशिश करते हैं. लेकिन सबसे अच्छा फंड वही माना जाएगा जो कम लागत, लगातार प्रदर्शन और नियंत्रित जोखिम के बीच सही संतुलन बना सके.
(डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Expense Ratio क्या होता है?
Expense Ratio वह शुल्क होता है जो म्यूचुअल फंड निवेशकों से फंड मैनेजमेंट के लिए लिया जाता है.
Q2 कम Expense Ratio का क्या फायदा होता है?
कम Expense Ratio का मतलब है कि निवेशक का ज्यादा पैसा निवेशित रहता है और लंबे समय में बेहतर कंपाउंडिंग मिल सकती है.
Q3 FY26 में Flexi Cap Funds में कितना निवेश आया?
AMFI के मुताबिक FY26 में इस कैटेगरी में 79,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आया.
Q4 सबसे कम Expense Ratio वाला कौन सा Flexi Cap Fund है?
Edelweiss Flexi Cap Fund और Nippon India Flexi Cap Fund दोनों का Expense Ratio 0.46% है.
Q5 Flexi Cap Funds में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
क्योंकि ये फंड Large Cap, Mid Cap और Small Cap शेयरों के बीच लचीलापन रखते हैं और बाजार की स्थिति के हिसाब से रणनीति बदल सकते हैं.