क्या गिरते बाजार का सिंघम है मल्टीकैप म्यूचुअल फंड? यहां समझें तीन जरूरी कारण

शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है. कई सारे म्यूचुअल फंड्स इस समय बाजार की तरह निगेटिव रिटर्न दे रहे हैं. ऐसे में जो निवेशक बाजार के बजाय म्यूचुअल फंड में निवेश की सोच रहे हैं. उन्हें किस कैटेगरी के फंड में निवेश करना चाहिए. यह एक बड़ा सवाल है. चलिए इसका जवाब तलाशते हैं.
क्या गिरते बाजार का सिंघम है मल्टीकैप म्यूचुअल फंड? यहां समझें तीन जरूरी कारण

शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी है. कई सारे म्यूचुअल फंड्स इस समय बाजार की तरह निगेटिव रिटर्न दे रहे हैं. ऐसे में जो निवेशक बाजार के बजाय म्यूचुअल फंड में निवेश की सोच रहे हैं. उन्हें किस कैटेगरी के फंड में निवेश करना चाहिए. यह एक बड़ा सवाल है. इस सवाल का काफी हद तक जवाब देता है मल्टी कैप फंड्स का विकल्प. मल्टी-कैप फंड्स आज के समय में निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरे हैं. यह फंड स्मॉल, मिड और लार्ज कैप में पैसा इंवेस्ट करते हैं. यही वजह है कि कुछ एक्सपर्ट मल्टी कैप फंड को बाजार का सिंघम कहते हैं. क्योंकि इस फंड को गिरते बाजार में भी बेहतर रिटर्न देने की कला आती है.

क्या हैं मल्टी कैप फंड्स के बेस्ट प्वाइंट?

मल्टी-कैप फंड्स का सबसे बड़ा फायदा उनकी डायवर्सिफिकेशन का मिलता है. ये फंड्स अलग-अलग मार्केट कैप और सेक्टर वाली कंपनियों में निवेश करते हैं, जिससे किसी एक निवेश से जुड़े जोखिम कम हो जाते हैं. अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश करने की वजह से ये फंड्स बाजार की बदलती परिस्थितियों में स्थिर रिटर्न देने में सक्षम होते हैं.

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रिस्क मैनेजमेंट में हैं किंग

मल्टी-कैप फंड्स की लचीलापन उन्हें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करने की अनुमति देती है. उदाहरण के लिए यदि छोटे शेयर महंगे हो जाते हैं, तो फंड मैनेजर ज्यादा स्थिर बड़े शेयरों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं. इस तरह का मैनेजमेंट न केवल रिटर्न को बढ़ाने में मदद करता है बल्कि अस्थिर बाजार के दौरान जोखिम को कम करता है.

क्यों होती है रिटर्न की अधिक गुंजाइश?

मल्टी-कैप फंड्स, सिंगल-कैप फंड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न प्रदान कर सकते हैं. ये फंड्स अलग-अलग सेगमेंट्स में निवेश करते हैं और साथ ही डाउनसाइड रिस्क को भी प्रभावी तरीके से मैनेज करते हैं. स्थिरता और वृद्धि के इस संतुलन से निवेशक अपने पोर्टफोलियो के परफॉर्मेंस में स्थायित्व सुनिश्चित कर सकते हैं. एक बात और यहां ध्यान रहे कि सेबी के नियम के मुताबिक, मल्टी कैप फंड्स को अपना निवेश 25 फीसदी के बराबर निवेश कैपिटल के साथ स्मॉल, मिड और लार्ज कैप कंपनियों में करना होता है. बाकि के बचे 25 फीसदी वह अपनी सुविधानुसार निवेश कर सकते हैं. यही वजह है कि ये फंड्स नॉर्मल फंड्स की तुलना में अच्छा रिटर्न दे पाते हैं.

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