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भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में मल्टीकैप फंड्स ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह का स्थिर और दमदार प्रदर्शन किया है, उसने निवेशकों के बीच इनकी लोकप्रियता को तेजी से बढ़ा दिया है. AMFI की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा डेटा बताता है कि कई मल्टीकैप फंड्स ने लॉन्ग टर्म में बेहतरीन रिटर्न दिया है, जिनमें निप्पॉन इंडिया मल्टीकैप फंड, महिंद्रा मैनुलाइफ मल्टीकैप फंड और क्वांट मल्टीकैप फंड सबसे आगे हैं.
इन फंड्स का रिस्कोमीटर भले "बहुत ज्यादा" दिखाता हो, लेकिन तीनों वर्गों में संतुलित निवेश की वजह से ये फंड्स मार्केट की हर चाल का फायदा उठाते हैं और निवेशकों के पोर्टफोलियो को स्थिर बनाए रखने में मदद करते हैं.
मल्टीकैप फंड वह इक्विटी म्यूचुअल फंड होता है जिसमें लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप तीनों वर्गों में कम से कम 25% हिस्सा रखना अनिवार्य होता है. इस संरचना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को एक ही फंड में स्थिरता, मध्यम गति की ग्रोथ और तेज़ी, तीनों का मिश्रण मिलता है.
लार्जकैप हिस्सेदारी पोर्टफोलियो को मजबूती देती है, मिडकैप लगातार बढ़ने का अवसर प्रदान करता है और स्मॉलकैप तेज़ रिटर्न की संभावना को बढ़ाता है. मार्केट चाहे ऊपर जाए, नीचे गिरे या स्थिर चले, मल्टीकैप फंड अपनी विविधता की वजह से किसी न किसी स्थिति में लाभ पहुंचा देते हैं. इसी संतुलन की वजह से यह फंड उन निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प बन जाते हैं जो ज्यादा रिस्क लिए बिना अच्छा रिटर्न चाहते हैं.
AMFI वेबसाइट के आंकड़े बताते हैं कि कुछ मल्टीकैप फंड्स ने पांच साल की अवधि में बेहद आकर्षक रिटर्न दिए हैं. निप्पॉन इंडिया मल्टीकैप फंड ने लगभग 28.59% का सालाना रिटर्न दिया है, जो इस कैटेगरी में सबसे ज्यादा है. इसका एनएवी 335 रुपये से ऊपर पहुंच चुका है और इसका AUM भी काफी बड़ा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा इस फंड में लगातार बढ़ रहा है.
महिंद्रा मैनुलाइफ मल्टीकैप फंड ने भी 25.39% का पांच वर्षीय रिटर्न दिया है, जो कि एक स्थिर और अनुशासित प्रबंधन का परिणाम है. इसका एयूएम भले कम हो, लेकिन फंड की निवेश रणनीति इसे लगातार मजबूत प्रदर्शन करने में मदद करती रही है.
क्वांट मल्टीकैप फंड अपनी तेज़ और सक्रिय निवेश रणनीति के लिए जाना जाता है. इसके फाइव-ईयर रिटर्न 23.49% के करीब हैं और इसका एनएवी 686 रुपये के आसपास जा पहुंचा है. यह फंड मार्केट की तेजी या गिरावट के दौरान तेजी से अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करता है, इसीलिए इसका प्रदर्शन अक्सर कैटेगरी औसत से बेहतर दिखता है.
मल्टीकैप फंड्स की सबसे बड़ी ताकत उनका विस्तृत डाइवर्सिफिकेशन है. जब मार्केट में गिरावट आती है तो लार्जकैप हिस्सेदारी पोर्टफोलियो को संभालने का काम करती है. वहीं स्थिर या मध्यम गति वाले दौर में मिडकैप कंपनियां रिटर्न को आगे बढ़ाती हैं.
जब मार्केट में तेज़ी आती है, तब स्मॉलकैप तेज़ी से प्रदर्शन करते हैं और पोर्टफोलियो में बड़ा योगदान देते हैं. इस संतुलन की वजह से निवेशक को बहुत अधिक उठा-पटक से बचाव मिलता है और पूरी यात्रा में एक स्थिर फ्लो बना रहता है.
वे निवेशक जिन्हें यह चिंता रहती है कि किस कैटेगरी में कितना निवेश किया जाए, उनके लिए भी मल्टीकैप फंड एक आसान समाधान है. फंड मैनेजर मार्केट की स्थितियों के अनुसार समय-समय पर बदलाव करते रहते हैं, जिससे निवेशक को रिस्क और रिटर्न का सही मिश्रण मिलता है.
अर्जुन एक नौकरी पेशा व्यक्ति है जिसे समय निकालकर मार्केट का विश्लेषण करना मुश्किल लगता था. वह चाहता था कि उसका पैसा सुरक्षित भी रहे और बढ़े भी. उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि लार्जकैप में जाए या स्मॉलकैप में निवेश करे. ऐसे समय में उसके वित्तीय सलाहकार ने उसे मल्टीकैप फंड की सलाह दी.
अर्जुन ने इस सलाह के आधार पर एक मल्टीकैप फंड में निवेश शुरू किया. आने वाले वर्षों में मार्केट कई बार गिरा और कई बार तेजी से उछला भी, लेकिन अर्जुन के पोर्टफोलियो में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं आया. गिरावट के समय लार्जकैप ने पोर्टफोलियो को बचाए रखा, जबकि तेज़ी के समय मिडकैप और स्मॉलकैप हिस्से ने अच्छे प्रॉफिट दिलाए. अर्जुन को मार्केट टाइमिंग की चिंता नहीं करनी पड़ी और पोर्टफोलियो लगातार संतुलित बना रहा.
1. मल्टीकैप फंड किसके लिए बेहतर है?
यह उन निवेशकों के लिए बिल्कुल सही है जो एक ही फंड में सुरक्षित और तेज़ दोनों तरह का रिटर्न चाहते हैं.
2. क्या मल्टीकैप फंड में रिस्क ज्यादा है?
हां, क्योंकि इसमें मिडकैप और स्मॉलकैप भी शामिल होते हैं, लेकिन लार्जकैप इसे संतुलित रखते हैं.
3. मल्टीकैप और फ्लेक्सीकैप में क्या अंतर है?
मल्टीकैप में तीनों वर्गों में 25% निवेश जरूरी है, जबकि फ्लेक्सीकैप में कोई सीमा नहीं होती.
4. क्या मल्टीकैप फंड लॉन्ग टर्म के लिए सही है?
हां, इसके आंकड़े बताते हैं कि लॉन्ग टर्म में यह अच्छा रिटर्न देता है.
5. क्या एसआईपी करना बेहतर रहेगा?
हां, मार्केट की चाल को देखते हुए एसआईपी को बेहतर माना जाता है.
(डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)