मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप में क्या होता है अंतर? कौन सा म्यूचुअल फंड देता है सबसे ज्यादा रिटर्न

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप फंड का अंतर जानना बेहद जरूरी है. दोनों में बड़ी, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में निवेश होता है, लेकिन नियम, रिस्क और प्रॉफिट के लिहाज से इनमें बड़ा फर्क है.
मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप में क्या होता है अंतर? कौन सा म्यूचुअल फंड देता है सबसे ज्यादा रिटर्न

मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप में क्या होता है अंतर?

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले अक्सर उलझन में रहते हैं कि मल्टी कैप फंड चुनें या फ्लेक्सी कैप. दोनों ही फंड्स लार्ज, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में पैसा लगाते हैं, लेकिन फर्क ये है कि मल्टी कैप में नियम तय हैं और फ्लेक्सी कैप में मैनेजर को पूरी आज़ादी है. यही कारण है कि दोनों का रिस्क और रिटर्न प्रोफाइल अलग-अलग होता है.

क्या होते हैं मल्टी कैप फंड?

मल्टी कैप फंड में निवेश का ढांचा SEBI ने तय किया है. इसमें फंड मैनेजर को हर हाल में बड़ी, मिड और स्मॉल कैप कंपनियों में 25-25% निवेश करना होता है. इस वजह से इन फंड्स में डायवर्सिफिकेशन तो अच्छा होता है, लेकिन मिड और स्मॉल कैप के चलते जोखिम भी बना रहता है.

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फ्लेक्सी कैप फंड कैसे काम करते हैं?

फ्लेक्सी कैप फंड को ज्यादा फ्रीडम दिया गया है. फंड मैनेजर मार्केट सिचुएशन के हिसाब से लार्ज, मिड या स्मॉल कैप में निवेश का अनुपात बदल सकता है. अगर मार्केट स्थिर नहीं है, तो मैनेजर बड़ी कंपनियों में पैसा डाल सकता है, जबकि बुल रन में मिड और स्मॉल कैप पर फोकस बढ़ा सकता है.

रिस्क और रिटर्न का अंतर

मल्टी कैप फंड में स्मॉल और मिड कैप एक्सपोजर अनिवार्य होने से जोखिम ज्यादा रहता है, लेकिन लंबे समय में अच्छे रिटर्न की संभावना रहती है. वहीं फ्लेक्सी कैप फंड में रिस्क कम हो सकता है क्योंकि मैनेजर सही समय पर पोर्टफोलियो शिफ्ट कर सकता है.

किन निवेशकों के लिए कौन सा फंड सही?

मल्टी कैप फंड, उन लोगों के लिए सही हैं जो लंबी अवधि तक सभी कैटेगरी में एक्सपोजर बनाए रखना चाहते हैं और थोड़ा ज्यादा रिस्क लेने को तैयार हैं.

जबकि फ्लेक्सी कैप फंड, उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो प्रोफेशनल मैनेजमेंट पर भरोसा करते हैं और चाहते हैं कि उनका पैसा मार्केट की सिचुएशन के हिसाब से स्मार्टली एडजस्ट हो.

खबर से जुड़े 5 FAQS

Q1. मल्टी कैप फंड और फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

मल्टी कैप फंड में हर कैटेगरी (लार्ज, मिड और स्मॉल कैप) में कम से कम 25% निवेश अनिवार्य है, जबकि फ्लेक्सी कैप फंड में मैनेजर को अलोकेशन बदलने की पूरी आज़ादी होती है.

Q2. किस फंड में रिस्क ज्यादा होता है?

मल्टी कैप फंड में स्मॉल और मिड कैप का एक्सपोजर तय होने से रिस्क ज्यादा होता है. फ्लेक्सी कैप फंड में रिस्क मैनेजर की स्ट्रेटेजी के हिसाब से कंट्रोल किया जा सकता है.

Q3. लंबे समय के लिए कौन सा फंड बेहतर है?

मल्टी कैप फंड 5-7 साल की लंबी अवधि के लिए अच्छे हैं, जबकि फ्लेक्सी कैप फंड मीडियम से लॉन्ग टर्म दोनों के लिए सही विकल्प हो सकते हैं.

Q4. टैक्सेशन में कोई फर्क है क्या?

नहीं, दोनों कैटेगरी पर टैक्स के नियम एक जैसे हैं. एक साल से कम में गेन पर 15% टैक्स और एक साल से ज्यादा होल्डिंग पर 1 लाख रुपए तक टैक्स फ्री, उसके ऊपर 10% टैक्स.

Q5. कौन से निवेशक किस फंड में निवेश करें?

अगर आप स्थिर और तय डायवर्सिफिकेशन चाहते हैं तो मल्टी कैप फंड चुनें. अगर आप चाहते हैं कि आपका पैसा मार्केट की सिचुएशन के हिसाब से स्मार्टली मैनेज हो तो फ्लेक्सी कैप फंड बेहतर रहेंगे.

(डिस्‍क्‍लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)

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