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इन दिनों ग्लोबल मार्केट्स में अनिश्चितता बनी हुई है. कहीं भू-राजनीतिक तनाव खत्म नहीं हो रहे, तो कहीं ट्रेड से जुड़े हालात लगातार बदल रहे हैं. वहीं, सेंट्रल बैंकों की पॉलिसियां भी बार-बार एडजस्ट हो रही हैं.
इस माहौल में सोने की कीमतें बढ़ रही हैं, क्योंकि निवेशक सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं. साथ ही महंगाई की चिंता और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी गोल्ड को और चमका रही हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या कोई एक एसेट क्लास हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न दे सकता है?
जवाब है- नहीं. यही वजह है कि अब निवेशक सिर्फ शेयर या डेट पर निर्भर रहने के बजाय डाइवर्सिफिकेशन अपना रहे हैं. यहीं पर मल्टी-एसेट फंड्स की अहमियत बढ़ जाती है.
शेयर मार्केट जहां ग्रोथ का मौका देता है, वहीं डेट फंड्स स्थिरता लाते हैं. दूसरी ओर, गोल्ड और सिल्वर जैसे कमोडिटी निवेशकों को महंगाई और उतार-चढ़ाव से बचाते हैं. मल्टी-एसेट फंड्स इन तीनों को मिलाकर एक ही पैकेज में पेश करते हैं.
मतलब, निवेशक को यह तय करने की जरूरत नहीं कि शेयर खरीदें या सोना, बल्कि एक ही फंड में तीनों का बैलेंस्ड कॉम्बिनेशन मिल जाता है. इससे टाइमिंग का रिस्क कम हो जाता है और लंबे समय में रिटर्न बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है.
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स में बढ़िया इनफ्लो देखने को मिला. हाइब्रिड फंड्स के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹10.7 लाख करोड़ हो गए, जो अगस्त 2024 से 20.22% ज्यादा हैं.
इस कैटेगरी में सबसे ज्यादा इनफ्लो मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में आया. अगस्त 2025 में इसमें ₹3,527.91 करोड़ का शुद्ध निवेश हुआ, जो पिछले साल अगस्त 2024 के ₹2,826.89 करोड़ से काफी ज्यादा है. यानी, निवेशक साफ तौर पर अब डाइवर्सिफिकेशन की ओर बढ़ रहे हैं.
मल्टी-एसेट फंड्स अपना पैसा कम से कम तीन अलग-अलग एसेट क्लास में लगाते हैं. आम तौर पर इनकी निवेश रणनीति इस तरह होती है-
इक्विटी- इसमें कंपनियों के शेयरों में निवेश होता है ताकि लंबी अवधि में ग्रोथ और ऊंचा रिटर्न मिल सके.
डेट (बॉन्ड, डिबेंचर, सरकारी सिक्योरिटीज़)- यह हिस्सा स्थिरता लाता है और नियमित ब्याज आय (इंटरेस्ट इनकम) दिलाता है.
कमोडिटीज़ (सोना, चांदी)- गोल्ड और सिल्वर जैसे कीमती धातुओं में निवेश महंगाई से बचाव (hedge) और अनिश्चित समय में सुरक्षा प्रदान करता है.
वहीं कुछ मल्टी-एसेट फंड्स अपने मैन्डेट के हिसाब से रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs), विदेशी मार्केट्स या अन्य एसेट क्लास में भी थोड़ा पैसा लगा सकते हैं.
जैसे- Nippon India Multi Asset Allocation Fund की बात करें तो ये शेयर, डेट के साथ-साथ गोल्ड और सिल्वर में भी निवेश करता है. वहीं Nippon India Multi-Asset Omni FoF की बात करें तो ये थोड़ा अलग मॉडल पर काम करता है. यह क्वांट-ड्रिवन एल्गोरिथ्म से तय करता है कि किस एसेट क्लास में कितना निवेश होना चाहिए. इसमें कमोडिटी एसेट्स को भी शामिल किया जाता है.
आसान भाषा में कहें तो, ग्लोबल मार्केट में जारी अनिश्चितता और महंगाई की चिंता के बीच, मल्टी-एसेट फंड्स निवेशकों के लिए एक स्मार्ट विकल्प बनकर उभरे हैं. शेयरों से ग्रोथ, डेट से स्थिरता और गोल्ड-सिल्वर से सुरक्षा, तीनों का कॉम्बिनेशन इस वक्त सबसे ज्यादा आकर्षक लग रहा है.
मल्टी-एसेट फंड्स क्या होते हैं?
ये फंड्स शेयर, डेट और गोल्ड-सिल्वर जैसे कमोडिटीज का कॉम्बिनेशन होते हैं.
अगस्त 2025 में इन फंड्स में कितना इनफ्लो आया?
करीब ₹3,527.91 करोड़ का शुद्ध निवेश आया.
इन फंड्स में निवेश करने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
रिस्क और रिटर्न का संतुलन बना रहता है और डाइवर्सिफिकेशन मिलता है.
क्या इसमें SIP के जरिए निवेश किया जा सकता है?
हां, निवेशक इसमें SIP और लंपसम दोनों तरह से निवेश कर सकते हैं.