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भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में शीर्ष 30 शहरों के बाद आने वाले शहरों (बी30) की हिस्सेदारी सितंबर में बढ़कर 19 फीसदी हो गई है. यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई थी. बी30 शहरों की असेट्स अगस्त के 14.14 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर सितंबर में 14.50 लाख करोड़ रुपए हो गई, जो कि मासिक आधार पर 2.6 फीसदी की वृद्धि को दर्शाती है, जबकि सालाना आधार पर इसमें 15 फीसदी की वृद्धि हुई.
ICRA एनालिटिक्स ने एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "इस बीच, शीर्ष 30 शहरों (टी30 शहरों) की असेट्स भी सितंबर 2025 में सालाना आधार पर 14 फीसदी बढ़ी." रिपोर्ट के अनुसार, बी30 शहरों में इक्विटी असेट्स की ओर रुझान बना रहा. सितंबर में बी30 शहरों की लगभग 76.60 फीसदी असेट्स इक्विटी स्कीम में और 9.12 फीसदी बैलेंस स्कीमों में थीं. वहीं, बी30 शहरों की लगभग 11.67 फीसदी असेट्स डेट-केंद्रित स्कीमों में थीं, जबकि टी30 शहरों की 30.39 फीसदी असेट्स केंद्रित योजनाओं में थीं.
सितंबर 2025 में बी 30 शहरों में 27.52 फीसदी असेट्स व्यक्तिगत निवेशकों द्वारा होल्ड की जा रही है, जबकि बाकी की 4.93 फीसदी असेट्स संस्थागत निवेशकों द्वारा होल्ड की जा रही हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि सितंबर 2024 में, 26.94 फीसदी असेट्स बी30 शहरों में व्यक्तिगत निवेशकों के पास और 4.82 फीसदी संस्थागत असेट्स बी30 स्थानों के पास थीं.
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 तक, लगभग 27.37 फीसदी खुदरा निवेशकों ने प्रत्यक्ष निवेश का विकल्प चुना, जबकि 65.30 फीसदी खुदरा निवेशक गैर-सहयोगी वितरकों के माध्यम से आए. उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों (HNI) की लगभग 28.90 फीसदी असेट्स प्रत्यक्ष रूप से निवेशित थीं. इसके अतिरिक्त, म्यूचुअल फंड उद्योग की 47.70 फीसदी असेट्स प्रत्यक्ष रूप से निवेशित थीं, और 45.96 फीसदी गैर-सहयोगी वितरकों से आईं.