SIP में निवेश तो कर दिया, फिर अचानक पड़ी पैसों की जरूरत- कैसे बेचें यूनिट्स, कैसे करें विड्रॉल? जानें सही जवाब

SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) से पैसे निकालने का मतलब है आपके की तरफ से निवेश किए गए म्यूचुअल फंड की यूनिट्स को बेचना, जिसे तकनीकी भाषा में 'रिडीम' (Redeem) करना कहते हैं. यह प्रक्रिया आसान है और इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है.
SIP में निवेश तो कर दिया, फिर अचानक पड़ी पैसों की जरूरत- कैसे बेचें यूनिट्स, कैसे करें विड्रॉल? जानें सही जवाब

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन का सबसे बेहतरीन जरिया माना जाता है. आप और हम जैसे लाखों निवेशक 'थोड़ा-थोड़ा करके बहुत कुछ' बनाने के सपने के साथ इसमें हर महीने निवेश करते हैं. लेकिन जिंदगी हमेशा प्लान के मुताबिक नहीं चलती. कभी-कभी अचानक पैसों की ऐसी जरूरत आ पड़ती है कि निवेश तोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं दिखता.

अगर आप भी ऐसी ही किसी स्थिति में हैं और सोच रहे हैं कि अपनी SIP से पैसे कैसे निकालें, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. यह प्रोसेस उतना मुश्किल नहीं है, जितना लगता है. आज हम आपको SIP से पैसे निकालने यानी म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका, इस पर लगने वाले चार्ज और आपके फाइनल कॉर्पस पर पड़ने वाले असर के बारे में सब कुछ आसान भाषा में बताएंगे.

सबसे पहले ये कन्फ्यूजन दूर करें: SIP से पैसा नहीं निकलता

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एक बात जो हर निवेशक को समझनी चाहिए, वो ये है कि आप सीधे 'SIP' से पैसा नहीं निकालते. SIP तो बस एक तरीका है जिससे आप हर महीने एक तय तारीख पर म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदते हैं. जब आपको पैसों की जरूरत होती है, तो आप असल में उन खरीदी हुई यूनिट्स को बेचते हैं, जिसे टेक्निकली 'रिडीम' (Redeem) करना कहते हैं. यूनिट्स बेचने पर जो पैसा मिलता है, वो सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में आ जाता है.

SIP यूनिट्स बेचने या रिडीम करने के दो मुख्य तरीके

आप अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन, किसी भी तरीके से अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेच सकते हैं.

आजकल ज्यादातर लोग इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं. यह बेहद आसान और सुविधाजनक है.

  • स्टेप 1: अपने प्लेटफॉर्म पर लॉग-इन करें

आपने जिस भी प्लेटफॉर्म (जैसे Groww, Zerodha Coin, Upstox, Paytm Money) या सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की वेबसाइट (जैसे HDFC Mutual Fund, ICICI Prudential Mutual Fund) से निवेश किया है, वहां अपने यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉग-इन करें.

  • स्टेप 2: पोर्टफोलियो या डैशबोर्ड पर जाएं

लॉग-इन करने के बाद आपको अपना डैशबोर्ड या पोर्टफोलियो दिखेगा. यहां आपके सभी निवेशों की लिस्ट होती है.

  • स्टेप 3: उस म्यूचुअल फंड को चुनें जिससे पैसे निकालने हैं

​​​​​​​उस स्पेसिफिक म्यूचुअल फंड स्कीम पर क्लिक करें, जिसकी यूनिट्स आप बेचना चाहते हैं.

  • स्टेप 4: 'Redeem' या 'Sell' का ऑप्शन चुनें

​​​​​​​फंड की डिटेल्स में आपको 'Invest More', 'Redeem', 'Sell', 'Withdraw' जैसे ऑप्शन दिखेंगे. आपको 'Redeem' या 'Sell' पर क्लिक करना है.

  • स्टेप 5: अमाउंट या यूनिट्स एंटर करें

​​​​​​​अब आपके सामने दो ऑप्शन आएंगे. या तो आप वो अमाउंट भरें जितने पैसे आपको चाहिए, या फिर ये बताएं कि आप कितनी यूनिट्स बेचना चाहते हैं. सिस्टम अपने आप कैलकुलेट कर लेगा. यहां आपको पार्शियल (कुछ यूनिट्स) और फुल (सभी यूनिट्स) रिडेंप्शन का विकल्प मिलता है.

  • स्टेप 6: ट्रांजैक्शन कन्फर्म करें

​​​​​​​डिटेल्स कन्फर्म करने के बाद ट्रांजैक्शन को पूरा करें. इसके लिए आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल पर एक OTP आएगा, जिसे आपको एंटर करना होगा.

बस हो गया काम. आमतौर पर इक्विटी फंड्स का पैसा आपके बैंक अकाउंट में T+2 (ट्रांजैक्शन डे + 2 वर्किंग दिन) में क्रेडिट हो जाता है.

2. ऑफलाइन तरीका

अगर आप टेक्नोलॉजी में सहज नहीं हैं, तो आप ऑफलाइन तरीका भी अपना सकते हैं.

  • आपको संबंधित म्यूचुअल फंड हाउस (AMC) के ऑफिस या उनके रजिस्ट्रार (जैसे CAMS या KFintech) के ऑफिस जाना होगा.

  • वहां से एक रिडेंप्शन फॉर्म लें और उसे सावधानी से भरें. इसमें आपको अपना फोलियो नंबर, स्कीम का नाम और कितनी यूनिट्स बेचनी हैं, यह सब भरना होगा.

  • फॉर्म के साथ अपने PAN कार्ड की एक कॉपी और एक कैंसल्ड चेक लगाकर जमा कर दें.

  • प्रोसेसिंग के बाद पैसा आपके रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में भेज दिया जाएगा. इस प्रोसेस में ऑनलाइन के मुकाबले थोड़ा ज्यादा समय लगता है.

विड्रॉल से कुल कॉर्पस पर कैसे असर पड़ता है? देखें कैलकुलेशन

SIP से समय से पहले पैसा निकालना आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग को झटका दे सकता है. यह सिर्फ आपके वर्तमान कॉर्पस को कम नहीं करता, बल्कि भविष्य में उस पैसे पर मिलने वाले कंपाउंडिंग के फायदे को भी खत्म कर देता है.

आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं.

मान लीजिए, आपने 3 साल पहले ₹5,000 महीने की SIP शुरू की थी और आपको सालाना 12% का औसत रिटर्न मिल रहा है.

पैरामीटरकैलकुलेशन
मासिक SIP₹5,000
निवेश की अवधि36 महीने (3 साल)
कुल निवेशित राशि₹5,000 x 36 = ₹1,80,000
12% सालाना रिटर्न पर अनुमानित कॉर्पसकरीब ₹2,16,368
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अब, मान लीजिए आपको ₹50,000 की जरूरत पड़ी
निकाली गई राशि₹50,000
विड्रॉल के बाद बचा हुआ कॉर्पस₹2,16,368 - ₹50,000 = ₹1,66,368

असर देखें

आपने सिर्फ ₹50,000 निकाले, लेकिन अब आपका भविष्य का रिटर्न ₹1,66,368 पर बनेगा, न कि ₹2,16,368 पर. यह ₹50,000 अगर अगले 10 साल और निवेशित रहता तो 12% की दर से बढ़कर लगभग ₹1,55,292 बन सकता था. यानी, आपने असल में सिर्फ ₹50,000 नहीं, बल्कि भविष्य के ₹1.55 लाख से ज्यादा का नुकसान किया.

आपने सिर्फ ₹50,000 निकाले, लेकिन यह एक छोटी रकम नहीं है. आपने असल में भविष्य में बढ़ने वाली एक बड़ी वेल्थ का गला घोंट दिया है. इसे कंपाउंडिंग के नजरिए से समझिए.

यह ₹50,000 अगर निवेशित रहता तो 12% के सालाना रिटर्न पर:

  • 10 साल मेंबढ़कर लगभग ₹1.55 लाख बन सकता था.

  • 20 साल मेंबढ़कर लगभग ₹4.82 लाख बन सकता था.

  • और 25 साल में यही ₹50,000 बढ़कर ₹8.50 लाख का विशाल कॉर्पस बना सकता था.

यानी, आज की एक छोटी सी जरूरत पूरी करने के लिए आपने सिर्फ ₹50,000 नहीं, बल्कि भविष्य में बनने वाले ₹8.50 लाख से अपना हाथ खींच लिया. यह है समय से पहले निवेश तोड़ने का असली नुकसान, जो अक्सर छोटा दिखाई देता है लेकिन होता बहुत बड़ा है.

विड्रॉल से पहले इन 2 चार्जेज को न भूलें

यूनिट्स बेचते समय आपको दो तरह के चार्ज देने पड़ सकते हैं.

  • एग्जिट लोड (Exit Load)

​​​​​​​अगर आप निवेश करने के एक तय समय (आमतौर पर 1 साल) से पहले अपनी यूनिट्स बेचते हैं, तो AMC आपसे एक छोटा सा चार्ज वसूलती है, जिसे एग्जिट लोड कहते हैं. यह आमतौर पर 1% होता है. अगर आप 1 साल के बाद यूनिट्स बेचते हैं, तो ज्यादातर इक्विटी फंड्स में कोई एग्जिट लोड नहीं लगता.

  • कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax)

म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचने से हुए मुनाफे पर आपको टैक्स देना पड़ता है.

  • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG)

अगर आप इक्विटी फंड की यूनिट्स 1 साल के अंदर बेचते हैं, तो मुनाफे पर फ्लैट 15% टैक्स लगता है.

  • लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG)

​​​​​​​अगर आप 1 साल के बाद यूनिट्स बेचते हैं, तो एक वित्तीय वर्ष में ₹1 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है. ₹1 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 10% टैक्स लगता है.

Conclusion

SIP से पैसा निकालना एक आसान प्रक्रिया है, लेकिन यह हमेशा आखिरी विकल्प होना चाहिए. यह आपके लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों, जैसे रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई, को प्रभावित कर सकता है. पैसा निकालने से पहले एग्जिट लोड, कैपिटल गेन टैक्स और आपके कॉर्पस पर पड़ने वाले असर का आकलन जरूर करें. अगर संभव हो तो पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. लेकिन अगर कोई रास्ता न बचे, तो ऊपर बताया गया प्रोसेस आपको सुरक्षित और सही तरीके से पैसे निकालने में मदद करेगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. SIP से पैसा बैंक अकाउंट में आने में कितना समय लगता है?

  • इक्विटी फंड्स में आमतौर पर 2-3 वर्किंग दिन और डेट फंड्स में 1-2 वर्किंग दिन लगते हैं.

2. क्या मैं अपनी SIP से थोड़ा सा पैसा निकाल सकता हूं?

  • हां, आप अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ यूनिट्स बेचकर पार्शियल विड्रॉल कर सकते हैं.

3. क्या पैसे निकालने के बाद मेरी SIP बंद हो जाएगी?

  • नहीं, यूनिट्स बेचने से आपकी चल रही SIP पर कोई असर नहीं पड़ता, वह हर महीने कटती रहेगी.

4. एग्जिट लोड क्या होता है?

  • यह एक फीस है जो म्यूचुअल फंड कंपनी तब लेती है जब आप तय समय से पहले यूनिट्स बेचते हैं.

5. क्या मुझे हमेशा विड्रॉल पर टैक्स देना होगा?

  • नहीं, टैक्स सिर्फ मुनाफे पर लगता है और लॉन्ग-टर्म में ₹1 लाख तक का मुनाफा टैक्स-फ्री होता है.

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