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गोल्ड फंड्स की सुनामी में बही बड़ी-बड़ी इक्विटी कैटेगरी!
निवेश की दुनिया में अक्सर कहा जाता है कि अगर अमीर बनना है तो इक्विटी यानी शेयर बाजार में पैसा लगाओ. लेकिन पिछले कुछ सालों में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने बड़े-बड़े दिग्गजों को सोचने पर मजबूर कर दिया है.
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स ने दबे पांव एक ऐसी बढ़त बनाई है कि म्यूचुअल फंड की लगभग हर कैटेगरी पीछे छूट गई है. चाहे बात 1 साल की हो, 3 साल की या 5 साल की, सोने की चमक के सामने बड़े-बड़े इक्विटी फंड्स फीके पड़ गए हैं.
हैरानी की बात यह है कि जब हम 10 साल के लंबे वक्त की बात करते हैं, तो पूरे म्यूचुअल फंड ब्रह्मांड में सिर्फ एक ही ऐसी कैटेगरी बची है जिसने सोने को मामूली अंतर से मात दी है. वह है 'स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड'.
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एम्फी (AMFI) और वैल्यू रिसर्च के ताजा आंकड़े बताते हैं कि सोना अब सिर्फ बुरे वक्त का साथी नहीं रहा, बल्कि यह दौलत बनाने का एक दमदार जरिया बन चुका है. आइए समझते हैं कि कैसे सोने ने निवेश के पारंपरिक गणित को बदल कर रख दिया है.
जब हम लॉन्ग टर्म यानी 10 साल के निवेश की बात करते हैं, तो गोल्ड म्यूचुअल फंड्स ने 15.87 प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है. एक ऐसे एसेट के लिए जिसे लोग अक्सर सिर्फ सुरक्षा के लिए खरीदते हैं, यह रिटर्न वाकई हैरान करने वाला है. इसने लार्ज कैप, मिड कैप, फ्लेक्सी कैप और हाइब्रिड जैसी दिग्गज श्रेणियों को पीछे छोड़ दिया है.
| गोल्ड म्यूचुअल फंड | 59.08% | 24.68% | 32.56% | 15.87% |
| स्मॉल कैप फंड | नकारात्मक (Negative) | 17.87% | 17.27% | 15.95% |
इस पूरी रेस में सिर्फ स्मॉल कैप फंड्स ही ऐसे रहे जो सोने से थोड़ा आगे निकल पाए. स्मॉल कैप फंड्स ने इसी दौरान 15.95 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. यानी बढ़त तो है, लेकिन फासला बहुत ही कम है. अगर हम थीम आधारित फंड्स को देखें, तो पीएसयू (PSU) फंड्स ने 16.50 प्रतिशत का रिटर्न देकर सबको चौंकाया है, लेकिन मुख्य कैटेगरीज में मुकाबला सिर्फ सोने और स्मॉल कैप के बीच ही सिमट कर रह गया है.
लॉन्ग टर्म में भले ही स्मॉल कैप थोड़ा आगे हो, लेकिन पिछले 1 से 5 साल के आंकड़ों को देखें तो सोना एक तरफा राजा बनकर उभरा है. गोल्ड म्यूचुअल फंड्स के रिटर्न पर एक नजर डालिए-
ये आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक साल में सोने की कीमतों में जो उछाल आया है, उसने निवेशकों की चांदी कर दी है. सिल्वर यानी चांदी ने भी पिछले 1 से 3 साल में सोने से ज्यादा रिटर्न दिया है, लेकिन जब बात भरोसे और निरंतरता की आती है, तो सोना सबसे मजबूत खिलाड़ी साबित होता है.
सोने की इस जबरदस्त बढ़त के पीछे शेयर बाजार की सुस्ती भी एक बड़ी वजह है. पिछले एक साल में ज्यादातर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है. मिडकैप फंड्स को अगर छोड़ दें, तो लार्ज कैप, स्मॉल कैप, ईएलएसएस और मल्टीकैप जैसी प्रमुख श्रेणियों ने निवेशकों को निराश किया है और इनका रिटर्न निगेटिव (नकारात्मक) रहा है.
बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 जैसे बेंचमार्क इंडेक्स भी पिछले एक साल में 3 से 5 प्रतिशत तक लुढ़के हैं. हालांकि, स्मॉल कैप फंड्स ने मध्यम अवधि (3 से 5 साल) में 17 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न देकर अपनी क्षमता दिखाई है, लेकिन हालिया बाजार की उठापटक ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों यानी सोने की तरफ मुड़ने पर मजबूर कर दिया है.
म्यूचुअल फंड्स के साथ-साथ फिजिकल गोल्ड यानी असली सोने की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखी गई है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़े बताते हैं कि-
2016 से 2026 तक: सोने की कीमत लगभग 30,000 रुपये से बढ़कर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गई है. यह 10 साल में करीब 390 प्रतिशत का कुल रिटर्न है.
पिछले 5 साल में: 2021 में जो सोना 47,000 रुपये का था, वह आज 1.47 लाख रुपये का है.
सिर्फ 1 साल में: 2025 में सोना 72,000 रुपये के आसपास था, जो महज एक साल में दोगुना होकर 1.47 लाख रुपये हो गया. यानी निवेशकों का पैसा एक साल में ही डबल हो गया.
आखिर ऐसा क्या हुआ कि सोने की कीमतें रॉकेट बन गईं? इसके पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं-
ग्लोबल अनिश्चितता: दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव ने निवेशकों को डरा दिया है. जब भी दुनिया में अस्थिरता होती है, लोग शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं.
महंगाई से सुरक्षा: सोना हमेशा से महंगाई के खिलाफ एक ढाल की तरह काम करता आया है. जब चीजों के दाम बढ़ते हैं, तो सोने की वैल्यू भी सुरक्षित रहती है.
घरेलू मांग और डॉलर: भारत में सोने की पारंपरिक मांग हमेशा बनी रहती है. साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये की हलचल ने भी सोने की घरेलू कीमतों को सहारा दिया है.
यह तुलना हमें एक बहुत जरूरी सीख देती है. स्मॉल कैप और गोल्ड, दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग है. जहां गोल्ड फंड्स आपको स्थिरता और बुरे वक्त में सुरक्षा देते हैं, वहीं स्मॉल कैप फंड्स में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है लेकिन वहां ग्रोथ की संभावना ज्यादा रहती है.
सोने ने पिछले 1, 3 और 5 सालों में अपनी ताकत दिखाई है, जबकि स्मॉल कैप ने 10 साल के लंबे सफर में अपनी बढ़त बनाए रखी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक समझदार निवेशक को इनमें से किसी एक को चुनने के बजाय दोनों का तालमेल बिठाना चाहिए.
Q: पिछले 10 साल में सोने ने कितना रिटर्न दिया है?
A: गोल्ड म्यूचुअल फंड्स ने पिछले 10 साल में 15.87 प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है.
Q: क्या किसी इक्विटी फंड ने सोने से ज्यादा रिटर्न दिया है?
A: हां, मुख्य श्रेणियों में सिर्फ 'स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड' ने 15.95 प्रतिशत के रिटर्न के साथ सोने को बहुत मामूली अंतर से पीछे छोड़ा है.
Q: पिछले 1 साल में सोने की कीमतों में कितनी तेजी आई है?
A: पिछले 1 साल में सोने की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं. यह 72,000 रुपये से बढ़कर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई हैं, जो करीब 104 प्रतिशत का रिटर्न है.
Q: सोने की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़त की मुख्य वजह क्या है?
A: वैश्विक स्तर पर जारी तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा की भावना ने सोने की मांग और कीमतों को बढ़ाया है.
Q: निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प क्या है - गोल्ड या स्मॉल कैप?
A: दोनों के फायदे अलग हैं. स्मॉल कैप लंबी अवधि में ज्यादा ग्रोथ दे सकते हैं, जबकि गोल्ड फंड्स बाजार की गिरावट और अनिश्चितता के समय सुरक्षा प्रदान करते हैं. एक बैलेंस्ड पोर्टफोलियो में दोनों का होना फायदेमंद है.