आप तो नहीं हो गए Flexi Cap Funds vs Multi Cap Funds में कंफ्यूज, एक को कहते हैं गिरते बाजार का बाहुबली

बीएसई सेंसेक्स इस साल अब तक 5.96% गिर चुका है. यही हाल बीएसई मिड-कैप इंडेक्स और बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स का भी है. इससे इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन पर भी काफी प्रभाव पड़ा है. ऐसे में अगर आप निवेश की सोच रहे हैं और फ्लेक्सी कैप बनाम मल्टी कैप फंड्स के बीच कंफ्यूज हैं तो ये स्टोरी आपके लिए है. 
आप तो नहीं हो गए Flexi Cap Funds vs Multi Cap Funds में कंफ्यूज, एक को कहते हैं गिरते बाजार का बाहुबली

भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों के लिए जबरदस्त संपत्ति बनाई है. खासतौर पर महामारी के बाद, कॉर्पोरेट आय में वृद्धि के साथ, भारतीय बाजारों ने शानदार प्रदर्शन किया और कई इंडेक्स नई ऊंचाइयों पर पहुंचे. आईपीओ (IPO) और एनएफओ (NFO) की बढ़ती संख्या ने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ाया. अब वो अलग बात है कि पिछले 6 महीने से स्थिति निवेशक के कंट्रोल से बाहर हो गई है, लेकिन फिर अगर आप इसे लॉन्ग टर्म के व्यू से देखते हैं तो आपको पॉजिटव रिजल्ट ही मिलता है.

यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि 2025 में वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण बाजार में अस्थिरता काफी बढ़ गई है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय इक्विटी की भारी बिकवाली से बाजार में घबराहट का माहौल बन गया है. बीएसई सेंसेक्स इस साल अब तक 5.96% गिर चुका है. यही हाल बीएसई मिड-कैप इंडेक्स और बीएसई स्मॉल-कैप इंडेक्स का भी है. इससे इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स के प्रदर्शन पर भी काफी प्रभाव पड़ा है. ऐसे में अगर आप निवेश की सोच रहे हैं और फ्लेक्सी कैप बनाम मल्टी कैप फंड्स के बीच कंफ्यूज हैं तो ये स्टोरी आपके लिए है.

कौन बेहतर?

इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में फ्लेक्सी कैप और मल्टी कैप फंड्स को निवेशकों का अच्छा समर्थन मिला है. हालांकि हालिया गिरावट में दोनों कैटेगरी के फंड्स औसतन 16% तक की गिरावट आई है, लेकिन फ्लेक्सी कैप फंड्स की गिरावट अपेक्षाकृत कम रही है.

फ्लेक्सी कैप फंड्स की रणनीति

फ्लेक्सी कैप फंड्स की खासियत यह है कि ये मार्केट कैप के बीच लचीलापन बनाए रखते हैं और आमतौर पर बड़े शेयरों में अधिक निवेश करते हैं. गिरावट के समय यह रणनीति ‘मार्जिन ऑफ सेफ्टी’ देती है. साथ ही, इन फंड्स ने मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करने में सतर्कता बरती है. यही वजह है कि इसे गिरते बाजार का बाहुबली कहा जाता है. हालांकि, यह रणनीति कभी-कभी इनके लिए नुकसानदायक भी साबित होती है, क्योंकि कुछ अच्छे मिड-कैप और स्मॉल-कैप अवसरों को ये चूक जाते हैं. इस कारण फ्लेक्सी कैप फंड्स ने मल्टी कैप फंड्स की तुलना में थोड़ा कम रिटर्न दिया है.

मल्टी कैप फंड्स की मजबूती और जोखिम

मल्टी कैप फंड्स को सेबी (SEBI) के नियमों के तहत अपने पोर्टफोलियो का 25% बड़े शेयरों में, 25% मिड-कैप में और 25% स्मॉल-कैप में निवेश करना अनिवार्य है. यह रणनीति लंबे समय में अच्छा रिटर्न देती है, क्योंकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां बाजार में तेज़ी के समय तेजी से ग्रोथ करती हैं. हालांकि, इसमें एक बड़ा जोखिम यह भी है कि मंदी के समय मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. इस वजह से मल्टी कैप फंड्स निवेशकों को ज्यादा जोखिम (Standard Deviation के अनुसार) में डाल देता है.

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