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Flexi Cap Funds.
पिछले कुछ महीनों में म्यूचुअल फंड निवेश के पैटर्न में साफ बदलाव देखा जा रहा है. पारंपरिक रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में निवेशक का रुझान ज्यादा था, लेकिन अब निवेशकों का इंटरेस्ट Flexi Cap Fund की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहा है. फ्लेक्सीकैप फंड्स ऐसे इक्विटी फंड होते हैं जो लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों में डायनामिक तरीके से निवेश कर सकते हैं.
नवंबर महीने के लिए म्यूचुअल फंड्स का जो डेटा जारी किया गया है उससे साफ पता चलता है कि अब फ्लेक्सीकैप फंड्स नया किंग है. AMFI डेटा के मुताबिक, नवंबर महीने में इक्विटी फंड्स में नेट आधार पर 29911 करोड़ रुपए का इन्फ्लो दर्ज किया गया. सबसे ज्यादा फ्लेक्सीकैप फंड्स में 8135 करोड़ रुपए आए. मिडकैप्स में 4486 करोड़ और स्मॉलकैप फंड्स में 4406 करोड़ रुपए आए.

मंथली आधार पर तुलना करें तो अक्टूबर महीने में इक्विटी फंड्स में 24690 करोड़ रुपए का नेट इन्फ्लो आया था. सबसे ज्यादा Flexi Cap Funds में 8928 करोड़ रुपए का नेट इन्फ्लो आया. मिडकैप फंड्स में 3807 करोड़ रुपए, स्मॉलकैप फंड्स में 3476 करोड़ रुपए आया था.

2025 में अब तक 11 महीनों में इक्विटी फंड्स इन्फ्लो की बात करें तो इक्विटी फंड्स में नेट आधार पर कुल 322097 करोड़ रुपए का इन्फ्लो दर्ज किया गया जबकि फ्लेक्सी कैप फंड्स में 2025 में अब तक 70957 करोड़ रुपए का इन्फ्लो आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि निवेशकों को आगे क्या करना चाहिए.
इस बदलते ट्रेंड पर टाटा असेट मैनेजमेंट के CIO, इक्विटी, राहुल सिंह ने कहा कि अगर आप कोर इक्विटी निवेशक हैं तो फ्लेक्सीकैप फंड्स में निवेश किया जा सकता है. लॉन्ग टर्म में वेल्थ बनाने के लिए यह सुटेबल स्कीम है. फ्लेक्सीकैप फंड मैनेजर जरूरत के हिसाब से लार्ज और मिड एंड स्मॉलकैप्स में एलोकेशन घटा-बढ़ा सकते हैं. ऐसे में जब रिस्क हाई होता है तो लार्जकैप एलोकेशन बढ़ाकर स्टैबिलिटी पर फोकस होता है. हाई ग्रोथ फेज आने पर स्मॉल एंड मिडकैप्स पर फोकस होता है जहां से हाई रिटर्न मिलता है.

फ्लेक्सीकैप फंड्स मॉडरेट रिस्क के साथ मॉडरेट-टू-हाई रिटर्न देते हैं. आसान भाषा में कहें तो मिडकैप, स्मॉलकैप, मल्टीकैप के मुकाबले रिस्क कम होता है जबकि रिटर्न के मामले में लार्जकैप से बेहतर होते हैं. अगर म्यूचुअल फंड निवेश के ट्रेंड में बदलाव देखा जा रहा है तो इसका सबसे बड़ा यही कारण है.
वेल्थ कंपनी म्यूचुअल फंड की CIO, इक्विटी, अपर्णा शंकर ने कहा कि फ्लेक्सीकैप फंड्स कोर इक्विटी इन्वेस्टमेंट है. ऐसे में कम से कम 5 साल के नजरिए से ही निवेश करना चाहिए. दूसरी बात, अगर आप लिमिटेड स्कीम्स के साथ पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं तो फ्लेक्सीकैप फंड्स एक सही विकल्प है. इसमें सिंगल फंड डायवर्सिफाइड एक्सपोजर रखता है. रीटेल निवेशकों के लिए यह एक ऐसा फंड है जो उनके पोर्टफोलियो में कोर इक्विटी स्कीम्स का रोल प्ले करता है.
डेटा से साफ पता चलता है कि इन्वेस्टमेंट का ट्रेंड बदल रहा है. फ्लेक्सीकैप फंड्स डायवर्सिफिकेशन और फ्लेक्सिबिलिटी दोनों एकसाथ देने में सक्षम होते हैं. इस समय मिडकैप और स्मॉलकैप्स अंडरपरफॉर्म भी कर रहे हैं. ऐसे में फ्लेक्सीकैप फंड्स के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है. अगर आप भी निवेश करना चाहते हैं तो कम से कम 5 साल का नजरिया जरूर रखें.
Q1. Flexi Cap Funds क्या होते हैं?
Flexi Cap Funds ऐसे ओपन एंडेड इक्विटी म्यूचुअल फंड हैं जो लार्ज, मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में बिना किसी फिक्स्ड एलोकेशन के डायनामिक तरीके से निवेश कर सकते हैं.
Q2. किन निवेशकों के लिए Flexi Cap Funds उपयुक्त हैं?
ये उन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं जो लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन चाहते हैं और अपने पोर्टफोलियो में बैलेंस्ड एक्सपोजर चाहते हैं.
Q3. Flexi Cap Funds में कितने समय के लिए निवेश करना चाहिए?
कम से कम 5 साल या उससे अधिक समय के लिए निवेश करना बेहतर माना जाता है ताकि मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जा सके.
Q4. क्या Flexi Cap Funds रिस्क फ्री होते हैं?
ये फंड्स भी बाजार जोखिम के प्रति संवेदनशील होते हैं, लेकिन डायवर्सिफिकेशन और लचीलापन के कारण जोखिम को संतुलित रहते हैं.
Q5. Flexi Cap Funds और Multi-Cap Funds में क्या फर्क है?
फ्लेक्सीकैप फंड्स में फंड मैनेजर के लिए कोई तय सीमा नहीं होती कि कितने % शेयर किस कैप में रखना है, जबकि मल्टीकैप फंड्स में हर कैप में मिनिमम एलोकेशन तय होता है.