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आजकल कई लोग अपनी पूरी बचत म्यूचुअल फंड्स में निवेश कर रहे हैं, लेकिन इमरजेंसी फंड नहीं बना रहे. अचानक मेडिकल इमरजेंसी हो, घर का कोई बड़ा खर्चा आ जाए, या नौकरी चली जाए. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि पैसे का जुगाड़ कैसे होगा? अधिकतर लोग ऐसे हालात में पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड या अपने निवेश को बेचने का विकल्प चुनते हैं. लेकिन ये तरीके लंबी अवधि में नुकसानदायक साबित हो सकते हैं.
म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेचने से आपको टैक्स और एग्जिट लोड देना पड़ सकता है, जिससे आपके रिटर्न्स कम हो सकते हैं. निवेश बेचने का मतलब लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल्स को खतरे में डालना है. ऐसे में आपके पास एक विकल्प है. म्यूचुअल फंड्स को गिरवी रखकर लोन लेना. जिसे बिजनेस की भाषा में Loan Against Mutual Funds (LAMF) कहा जाता है. इस लोन में आपको अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स बैंक या NBFC के पास गिरवी रखने होते हैं, लेकिन आप उन्हें बेच नहीं सकते जब तक कि लोन चुकता न हो जाए.
ICICI बैंक, SBI, HDFC बैंक और Bajaj Finserv जैसी कंपनियां Loan Against Mutual Funds ऑफर करती हैं. ICICI बैंक में न्यूनतम लोन ₹50,000 और अधिकतम ₹20 लाख (इक्विटी फंड) एवं ₹1 करोड़ (डेब्ट फंड) तक मिलता है. ज्यादातर बैंक केवल CAMS-रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड्स पर लोन देते हैं.
जब आपको इमरजेंसी में फंड्स की जरूरत हो, लेकिन निवेश बेचना न चाहें. जब आप पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड के महंगे ब्याज से बचना चाहें. जब आपके पास लोन चुकाने की योजना हो और आप अतिरिक्त कर्ज में न फंसे.