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जैसे-जैसे बजट 2026 की तारीख करीब आ रही है, वैसे-वैसे निवेशकों और बाजार के दिग्गजों की धड़कनें तेज हो रही हैं. इस बार सबकी नजरें एक खास मुद्दे पर टिकी हैं - डे्ट म्यूचुअल फंड पर मिलने वाला इंडेक्सेशन बेनेफिट. पिछले दो सालों में जिस तरह से डे्ट फंड्स के टैक्स नियमों में बदलाव हुए हैं, उसने फिक्स्ड इनकम में निवेश करने वालों को थोड़ा मायूस कर दिया था. लेकिन अब खबर आ रही है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की संस्था एम्फी (AMFI) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने एक मजबूत प्रस्ताव रखा है.
कहानी सिर्फ टैक्स बचाने की नहीं है, बल्कि उस भरोसे की है जो एक आम आदमी अपने रिटायरमेंट के लिए जमा किए गए पैसों पर करता है. आज के समय में जब महंगाई दर और टैक्स का बोझ बढ़ रहा है, तब इंडेक्सेशन जैसा हथियार निवेशकों के लिए किसी ढाल से कम नहीं होता. आइए समझते हैं कि आखिर क्या है ये पूरा मामला और इस बार बजट से क्या उम्मीदें लगाई जा रही हैं.
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पिछले दो बजटों ने डे्ट म्यूचुअल फंड के निवेश के तरीके को पूरी तरह बदल दिया. साल 2023 में सरकार ने अचानक इंडेक्सेशन का फायदा खत्म कर दिया और फिर 2024 के बजट में नियमों को और भी सख्त बना दिया गया. नतीजा ये हुआ कि अब डे्ट फंड से होने वाली कमाई पर निवेशक को उसके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है.
यानी अगर आप 30 प्रतिशत वाले स्लैब में आते हैं, तो आपको अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सरकार को देना होगा, चाहे आपने पैसा कितने भी समय के लिए निवेश किया हो. इन्हीं बदलावों की वजह से पिछले तीन सालों में डे्ट फंड्स में आने वाले पैसे (Net Inflows) में भारी गिरावट देखी गई है. जो लोग सुरक्षित निवेश चाहते थे, उन्होंने अब इन फंड्स से दूरी बनाना शुरू कर दिया है.
एम्फी ने सरकार से गुहार लगाई है कि 36 महीने (3 साल) से ज्यादा समय तक रखे जाने वाले डे्ट म्यूचुअल फंड्स पर इंडेक्सेशन का फायदा दोबारा बहाल किया जाए. एम्फी का कहना है कि टैक्स की दर को 12.5% रखा जाए या फिर इंडेक्सेशन के साथ 20% का विकल्प दिया जाए. इसके लिए इनकम टैक्स एक्ट की अलग-अलग धाराओं (जैसे सेक्शन 2, 48, 50AA और 112) में जरूरी बदलाव किए जाएं.
यह मांग इसलिए भी अहम है क्योंकि इंडेक्सेशन के बिना डे्ट फंड्स का आकर्षण खत्म होता जा रहा है. इंडेक्सेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महंगाई के हिसाब से खरीद की कीमत को बढ़ा दिया जाता है, जिससे टैक्स का बोझ कम हो जाता है.
इस फैसले का सबसे बड़ा असर हमारे देश के बुजुर्गों और सीनियर सिटीजन्स पर पड़ेगा. अक्सर रिटायरमेंट के बाद लोग अपने पैसे ऐसी जगह लगाना चाहते हैं जहां जोखिम कम हो और नियमित आमदनी होती रहे. डे्ट फंड्स उनके लिए एक बेहतरीन जरिया थे.
एम्फी का तर्क है कि इंडेक्सेशन खत्म होने से रूढ़िवादी निवेशक और रिटायर लोग हतोत्साहित हुए हैं. अगर यह फायदा वापस आता है, तो उनके हाथ में टैक्स कटने के बाद ज्यादा पैसा (Post-tax returns) बचेगा. इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि वे ज्यादा भरोसे के साथ कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में अपना पैसा लगा सकेंगे.
डे्ट फंड्स में निवेश बढ़ने का मतलब सिर्फ निवेशकों का फायदा नहीं है, बल्कि यह देश के विकास के लिए भी जरूरी है. कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूती, जब लोग डे्ट फंड में पैसा लगाते हैं, तो वह पैसा बड़ी कंपनियों और सरकारी प्रोजेक्ट्स में जाता है. इससे विकास कार्यों के लिए फंड जुटाना आसान हो जाता है. सरकार चाहती है कि लोग अपने घरों में पैसा रखने के बजाय उसे फाइनेंशियल एसेट्स में लगाएं. इंडेक्सेशन वापस आने से लोग लॉन्ग टर्म के लिए बचत करने को प्रेरित होंगे.
बजट 2026 में क्या होगा, ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इंडस्ट्री का दबाव और निवेशकों की जरूरत को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि सरकार कुछ राहत जरूर देगी. अगर वित्त मंत्री एम्फी की बात मान लेती हैं, तो डे्ट म्यूचुअल फंड एक बार फिर निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया बन सकते हैं.
डे्ट म्यूचुअल फंड पर इंडेक्सेशन की वापसी सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं होगा, बल्कि यह करोड़ों निवेशकों के लिए राहत की खबर होगी. यह फैसला न केवल सीनियर सिटीजन्स को संबल देगा, बल्कि देश के बॉन्ड मार्केट में भी जान फूंक देगा. अब सबकी निगाहें वित्त मंत्री के पिटारे पर टिकी हैं कि क्या वे इस बार इंडेक्सेशन का तोहफा देंगी या फिर पुराने नियम ही लागू रहेंगे.
Q-1: इंडेक्सेशन का फायदा वापस मिलने से निवेशकों को क्या लाभ होगा?
A: इंडेक्सेशन से निवेशकों को महंगाई दर के हिसाब से टैक्स छूट मिलती है. इससे लंबी अवधि के निवेश पर लगने वाला टैक्स कम हो जाता है और हाथ में आने वाला मुनाफा (Post-tax return) बढ़ जाता है.
Q-2: एम्फी (AMFI) ने बजट 2026 के लिए क्या सुझाव दिया है?
A: एम्फी ने सुझाव दिया है कि 3 साल से अधिक समय तक रखे गए डे्ट फंड्स पर 12.5% टैक्स या इंडेक्सेशन के साथ 20% टैक्स का नियम दोबारा शुरू किया जाए.
Q-3: वर्तमान में डे्ट म्यूचुअल फंड पर कितना टैक्स लगता है?
A: अभी ज्यादातर डे्ट फंड्स से होने वाले मुनाफे को निवेशक की कुल आय में जोड़ दिया जाता है और उस पर उनके रेगुलर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है.
Q-4: क्या इस बदलाव से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भी असर पड़ेगा?
A: अगर डे्ट फंड्स पर इंडेक्सेशन वापस आता है, तो वे एफडी के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो जाएंगे क्योंकि एफडी के ब्याज पर पूरा टैक्स लगता है, जबकि डे्ट फंड्स में टैक्स की बचत का मौका मिलेगा.
Q-5: क्या सरकार को इनकम टैक्स एक्ट में बदलाव करना होगा?
A: हां, इंडेक्सेशन को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 48 और 112 जैसी प्रमुख धाराओं में संशोधन करना होगा.