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लॉन्ग टर्म निवेश के लिए कौन सा Mutual Fund है सबसे दमदार? प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
म्यूचुअल फंड निवेश में सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं होता, बल्कि यह समझना भी जरूरी होता है कि उस रिटर्न तक पहुंचने का सफर कितना उतार-चढ़ाव भरा रहा. पिछले कुछ सालों में Focused Funds ने कई बार शानदार रिटर्न देकर निवेशकों का ध्यान खींचा, लेकिन बाजार में गिरावट आते ही इन्हीं फंड्स में तेज नुकसान भी देखने को मिला.
वहीं Flexi Cap Funds ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन दिखाया. ऐसे में लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सवाल यही है कि आखिर किस कैटेगरी का फंड ज्यादा बेहतर माना जाए.
SEBI की 2020 की री-कैटेगराइजेशन के बाद Flexi Cap Funds को अलग कैटेगरी के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया. इन फंड्स में कम से कम 65 प्रतिशत निवेश इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में रखना जरूरी होता है. बाकी हिस्सा कैश, बॉन्ड्स या अन्य इंस्ट्रूमेंट्स में रखा जा सकता है. फंड मैनेजर को अलग-अलग मार्केट कैप और सेक्टर्स में निवेश करने की पूरी स्वतंत्रता होती है.

वहीं Focused Funds का ढांचा ज्यादा सीमित होता है. इन फंड्स में अधिकतम 30 स्टॉक्स ही रखे जा सकते हैं. यानी हर स्टॉक का पोर्टफोलियो में वजन ज्यादा होता है. यही वजह है कि अगर फंड मैनेजर की चुनी हुई कंपनियां अच्छा प्रदर्शन करें तो रिटर्न तेजी से बढ़ सकता है, लेकिन गलत दांव पड़ने पर नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है.
अगर औसत रिटर्न देखें तो दोनों कैटेगरी के बीच बहुत बड़ा अंतर नजर नहीं आता. Ace MF के 14 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक एक साल में Focused Funds का औसत रिटर्न 7.02 प्रतिशत रहा, जबकि Flexi Cap Funds ने 6.96 प्रतिशत का रिटर्न दिया.
तीन साल के प्रदर्शन में Flexi Cap Funds आगे निकलते दिखे. इस अवधि में Flexi Cap Funds का औसत रिटर्न 14.85 प्रतिशत रहा, जबकि Focused Funds ने 14.47 प्रतिशत का रिटर्न दिया. पांच साल में भी Flexi Cap Funds 13.37 प्रतिशत रिटर्न के साथ आगे रहे, जबकि Focused Funds का औसत रिटर्न 12.97 प्रतिशत रहा.
Value Research के आंकड़ों में भी तीन साल की अवधि में Flexi Cap Funds का औसत रिटर्न लगभग 17.1 प्रतिशत रहा, जबकि Focused Funds ने करीब 16.4 प्रतिशत रिटर्न दिया. हालांकि पांच साल के पॉइंट-टू-पॉइंट रिटर्न में Focused Funds थोड़े आगे दिखाई दिए.
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Focused Funds को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा जाता है क्योंकि इनमें कम स्टॉक्स होने के कारण हर निवेश का असर ज्यादा होता है. अगर दो-तीन बड़े निवेश खराब प्रदर्शन करें तो पूरे फंड की वैल्यू पर असर पड़ सकता है.
पोस्ट कोविड क्रैश और 2021-2022 के करेक्शन के दौरान Focused Funds ने बाजार और बेंचमार्क के मुकाबले ज्यादा कमजोर प्रदर्शन किया. दूसरी तरफ Flexi Cap Funds में भी गिरावट देखने को मिली, लेकिन उतार-चढ़ाव अपेाकृत कम रहा.
Value Research का भी मानना है कि लंबे समय में Flexi Cap Funds ने कम उतार-चढ़ाव के साथ बेहतर स्थिर रिटर्न दिए हैं. व्यापक डाइवर्सिफिकेशन होने की वजह से इनमें डाउनसाइड रिस्क कम माना जाता है.
बाजार में अनिश्चितता बढ़ने के दौरान निवेशक आमतौर पर ऐसे विकल्प तलाशते हैं जहां जोखिम थोड़ा नियंत्रित रहे. Flexi Cap Funds इसी वजह से कई निवेशकों की पसंद बने हुए हैं. इनमें फंड मैनेजर अलग-अलग मार्केट कैप और सेक्टर्स में निवेश बदल सकता है, जिससे पोर्टफोलियो ज्यादा संतुलित रहता है.
इसके मुकाबले Focused Funds हाई-कन्विक्शन स्ट्रैटेजी पर चलते हैं. यानी कम लेकिन मजबूत भरोसे वाले स्टॉक्स में निवेश. यही रणनीति अच्छे बाजार में तेज रिटर्न देती है, लेकिन खराब समय में गिरावट भी तेज हो सकती है.
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Flexi Cap और Focused Funds दोनों पर टैक्स नियम एक जैसे लागू होते हैं. एक साल से पहले यूनिट बेचने पर 20 प्रतिशत शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. वहीं एक साल बाद होने वाले मुनाफे पर 1.25 लाख रुपये से ऊपर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होता है. डिविडेंड निवेशक की आय में जुड़ता है और उसी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. दोनों कैटेगरी में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स भी लागू होता है.
आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय में दोनों कैटेगरी के औसत रिटर्न काफी करीब रहे हैं. लेकिन असली फर्क जोखिम और उतार-चढ़ाव में दिखाई देता है. जो निवेशक ज्यादा वोलैटिलिटी झेल सकते हैं और हाई रिस्क लेने को तैयार हैं, उनके लिए Focused Funds आकर्षक हो सकते हैं. वहीं जो निवेशक स्थिरता, बेहतर डाइवर्सिफिकेशन और कम उतार-चढ़ाव चाहते हैं, उनके लिए Flexi Cap Funds ज्यादा संतुलित विकल्प माने जा रहे हैं.
(डिस्क्लेमर: म्यूचुअल फंड में निवेश मार्केट जोखिमों के अधीन है. निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.)