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पिछले कुछ सालों में अगर किसी एक चीज ने निवेशकों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा है, तो वो है सोना. साल 2020 में जब पूरी दुनिया कोविड महामारी से जूझ रही थी, तब इस पीली धातु ने 28.0% की चमक बिखेरी थी. उसके बाद 2021 में थोड़ी सुस्ती रही, लेकिन 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ते ही यह फिर से 13.9% उछल गया.
सिलसिला यहीं नहीं रुका. 2023 में इजरायल-हमास युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा और सोने ने 15.4% का रिटर्न दिया. 2024 में जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद जागी, तो इसने 20.6% की छलांग लगाई. लेकिन असली धमाका तो पिछले साल यानी 2025 में हुआ, जब सोने ने 74.7% का कमाल रिटर्न दिया.
पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ा तनाव, ट्रंप की नई व्यापार नीतियां, ऊंचे टैरिफ और दुनिया भर के बैंकों द्वारा भारी मात्रा में सोने की खरीदारी ने इसकी कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया. आज 2026 में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं, जहां हर कोई अपनी किस्मत सोने की तरह चमकाना चाहता है.
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सोने में निवेश के दो स्मार्ट तरीके बहुत मशहूर हैं. पहला है गोल्ड ईटीएफ (ETF), जो सीधे घरेलू सोने की कीमतों पर नजर रखता है. इसे खरीदने के लिए आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी है. आप इसे शेयर बाजार से ठीक वैसे ही खरीदते हैं जैसे किसी कंपनी के शेयर. यहां हर यूनिट के पीछे असली सोना सुरक्षित तिजोरियों में रखा होता है.
दूसरा विकल्प है गोल्ड सेविंग्स फंड, यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो बिना डीमैट अकाउंट के निवेश करना चाहते हैं. इसे आप किसी भी म्यूचुअल फंड हाउस या एजेंट के जरिए शुरू कर सकते हैं. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप इसमें सिर्फ 100 या 500 रुपये से अपनी बचत शुरू कर सकते हैं.
जब सोने की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर हों, तो एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना यानी एसआईपी (SIP) करना ज्यादा समझदारी भरा होता है. इससे आपको 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' का फायदा मिलता है. यानी जब भाव गिरेंगे तो आपको ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी और जब भाव बढ़ेंगे तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ेगी.
यह फंड सितंबर 2011 में शुरू हुआ था और आज निवेशकों के बीच काफी भरोसेमंद है. दिसंबर 2025 तक यह फंड करीब 10,805 करोड़ रुपये की संपत्ति संभाल रहा है. इसके डायरेक्ट प्लान का खर्चा यानी एक्सपेंस रेशियो भी बहुत कम (0.10%) है.
अगर इसके पिछले रिकॉर्ड को देखें, तो पिछले 10 सालों में इसने 17.2% का सालाना (CAGR) रिटर्न दिया है. इस फंड का पैसा एसबीआई गोल्ड ईटीएफ में निवेश किया जाता है.
जनवरी 2013 में लॉन्च हुआ यह फंड आज 8,501 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड मैनेज कर रहा है. इसका एक्सपेंस रेशियो 0.18% है. रिटर्न के मामले में यह भी पीछे नहीं है. पिछले 10 सालों में इसने 17.1% का दमदार सालाना रिटर्न दिया है. यह फंड अपना 99.9% पैसा एचडीएफसी गोल्ड ईटीएफ में लगाता है.
यह भारत का सबसे पुराना गोल्ड सेविंग्स फंड है, जिसे मार्च 2011 में रिलायंस गोल्ड सेविंग्स फंड के नाम से शुरू किया गया था. नवंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक यह 4,849 करोड़ रुपये की संपत्ति संभाल रहा है और इसका एक्सपेंस रेशियो 0.13% है. बीते 10 सालों में इसने 17.0% का सालाना रिटर्न दिया है. यह फंड अपना सारा पैसा निप्पॉन इंडिया गोल्ड बीईईएस (Gold BeES) में निवेश करता है, जो खुद भारत का सबसे पुराना गोल्ड ईटीएफ है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. गोल्ड सेविंग्स फंड में निवेश के लिए क्या डीमैट अकाउंट जरूरी है?
नहीं, गोल्ड सेविंग्स फंड में निवेश के लिए डीमैट या ट्रेडिंग अकाउंट की कोई जरूरत नहीं होती. आप इसे सीधे फंड हाउस से खरीद सकते हैं.
2. क्या मैं सोने में 100 रुपये से निवेश शुरू कर सकता हूं?
जी हां, कई फंड हाउस अब छोटे निवेश की सुविधा देते हैं, जहां आप 100 रुपये जैसी मामूली रकम से भी एसआईपी (SIP) या एकमुश्त निवेश शुरू कर सकते हैं.
3. गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड सेविंग्स फंड में से सस्ता कौन सा है?
गोल्ड ईटीएफ में एक्सपेंस रेशियो थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन वहां आपको डीमैट चार्जेस और ब्रोकरेज देना पड़ता है. गोल्ड सेविंग्स फंड में ये अतिरिक्त खर्चे नहीं होते, बस थोड़ा सा एक्सपेंस रेशियो देना होता है.
4. 2025 में सोने के भाव इतने ज्यादा क्यों बढ़े?
2025 में सोने के 74.7% रिटर्न के पीछे मुख्य कारण भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव, ट्रंप की नीतियां, वैश्विक कर्ज का बढ़ना और केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई रिकॉर्ड खरीदारी थी.
5. क्या सोने में निवेश पूरी तरह सुरक्षित है?
सोना हमेशा से ही महंगाई के खिलाफ एक ढाल रहा है. हालांकि, बाजार के जोखिमों के कारण इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह पोर्टफोलियो को मजबूती प्रदान करता है.