मदर्स डे स्पेशल: सिंगल मदर्स के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग है सबसे जरूरी, इन बातों का रखें ध्यान

भविष्य की जरूरतों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग आसान नहीं है. सिंगल मदर्स के लिए चुनौती और भी अधिक होती हैं क्योंकि उन्हें अकेले जूझना पड़ता है.
मदर्स डे स्पेशल: सिंगल मदर्स के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग है सबसे जरूरी, इन बातों का रखें ध्यान

सिंगल मदर्स की अपनी वसीयत तैयार करने में देरी नहीं करनी चाहिए (फोटो- जी बिजनेस)

भविष्य की जरूरतों के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग आसान नहीं है. सिंगल मदर्स के लिए चुनौती और भी अधिक होती हैं क्योंकि उन्हें अकेले जूझना पड़ता है. कई तरह की चुनौतियों के बीच उन्हें खुद को भी संभालना होता है और अपने बच्चों को भी संभालना होता है. ऐसे में फाइनेंस की जानकारी बहुत जरूरी है. जी बिजनेस के कार्यक्रम 'मनी गुरू' में 'मदर्स डे' के अवसर पर खासतौर से सिंगल मदर्स के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग की जानकारी दी गई.

सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पूजा भिंडे ने बताया कि सिंगल मदर के लिए अपने बच्चों के भविष्य की जरूरतों को पूरा करना सबसे जरूरी है. इसमें बच्चों की पढ़ाई, उनकी शादी और अपने रिटायरमेंट का प्लान शामिल हैं. सिंगल मदर्स को किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. सही प्लानिंग करके वह आत्मनिर्भर बन सकती हैं.

फाइनैंशियल प्लानिंग में किन बातों का रखें ध्यान

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पूजा भिंडे ने सिंगल मदर्स के लिए बताया, 'अगर आप वर्किंग हैं तो बजट को नए सिरे से बनाएं. अगर आप हाउस वाइफ हैं, तो आपको आय के कुछ जरिए तलाशने होंगे. सबसे पहले आपका खुद का बीमा होना जरूरी है. आपके पास पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस होना चाहिए, क्योंकि इस समय आपके बच्चे पूरी तरह आप पर निर्भर हैं.'

हो सकता है कि सिंगल मदर को पति की मृत्य की स्थिति में टर्म इंश्योरेंस का एमाउंट या डिवोर्स की स्थिति में कोई सेटेलमेंट एमाउंट मिला तो. इस एमाउंट की प्लानिंग भी बहुत जरूरी है. इसके लिए ये समझना बहुत जरूरी है कि आपको कम कितनी रकम की जरूरत होगी.

उन्होंने कहा कि बजट बनाइए और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सेविंग कीजिए. सबसे पहले एक इमरजेंसी फंड बनाइए. अगर किसी वजह से रेग्युलर इनकम बंद हो जाती है, तो इमरजेंसी फंड काम आता है. इमरजेंसी फंड के रूप में 6 महीने का घर खर्च होना चाहिए. इसमें घर का खर्च और ईएमआई शामिल हैं. आमतौर पर ये फंड 1.5 से 3 लाख रुपये तक होता है. इसे आप सेविंग एकाउंट में रखेंगे तो कम ब्याज मिलेगा. इसकी जगह लिक्विट फंड एक अच्छा ऑप्शन है. लिक्विड और शर्ट टर्म डेट फंड्स में निवेश कर सकती हैं.

लॉन्ग टर्म के लिए एसआईपी

शॉर्ट टर्म गोल के लिए बैंक एफडी या शर्ट टर्म डेट फंड में निवेश करें. अगर बच्चों की उच्च शिक्षा या शादी की जरूरत 15 साल बाद शुरू होती है, तो आप लॉन्ग टर्म की एसआईपी ले सकती हैं.

बच्चों की फ्यूचर प्लानिंग की बात करें तो बच्चों की पढ़ाई सबसे जरूरी है. उस हिसाब से लॉन्ग टर्म की एसआईपी एक अच्छा विकल्प है. बच्चों की बीमा योजना और बेटी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना भी अच्छा और सुरक्षित विकल्प है. बच्चों की पढ़ाई के लिए अगर समय रहते फंड न जमा हो पाए तो एजुकेशन लोन भी लिया जा सकता है.

रिटायरमेंट की प्लानिंग भी बहुत जरूरी है. अगर जीवन प्रत्याशा 85 साल मानी जाए तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट के बाद करीब 25 साल बिना आय के गुजारने हैं. आपके रहन-सहन पर रिटायरमेंट का कोई असर न हो, इसके लिए आपनी आय का 15 प्रतिशत निवेश करना जरूरी है.

सिंगल मदर्स की अपनी वसीयत तैयार करने में देरी नहीं करनी चाहिए क्योंकि आपकी संपत्ति पर सबसे पहला हक आपके बच्चों का है और आपके न रहने पर कोई और उसे हड़प सकता है. हर निवेश में नॉमिनी और अभिभावक का नाम होना बहुत जरूरी है.

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