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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कब पैसों की जरूरत पड़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. चाहे घर की मरम्मत हो, बच्चों की पढ़ाई या अचानक आई कोई मेडिकल इमरजेंसी, 'पर्सनल लोन' अक्सर सबसे आसान रास्ता नजर आता है. लेकिन बैंक की दहलीज पर कदम रखते ही सबसे पहला सवाल यही सामने आता है- 'आपकी महीने की पगार कितनी है?'
पर्सनल लोन एक 'अनसिक्योर्ड लोन' होता है, यानी बैंक आपसे कोई गारंटी या कोलेटरल नहीं मांगता. यही वजह है कि बैंक आपकी सैलरी को सबसे ज्यादा अहमियत देते हैं, ताकि उन्हें भरोसा हो सके कि आप किश्तें (EMI) समय पर चुका पाएंगे. साल 2025 में महंगाई और बढ़ते खर्चों को देखते हुए बैंकों ने अपनी पात्रता की शर्तों में कुछ बदलाव किए हैं.
भारत के प्रमुख बैंकों में सैलरी की सीमा अलग-अलग तय की गई है. उदाहरण के तौर पर, HDFC बैंक में आवेदन करने के लिए आपकी नेट मंथली इनकम कम से कम 25,000 रुपये होनी चाहिए. वहीं, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में सरकारी कर्मचारियों के लिए यह सीमा 20,000 रुपये और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए 25,000 रुपये के आसपास है.
एक्सिस बैंक जैसे संस्थान अपने मौजूदा ग्राहकों को 15,000 रुपये की सैलरी पर भी लोन दे देते हैं, लेकिन अगर आपका खाता वहां नहीं है, तो वे कम से कम 25,000 रुपये की पगार की मांग करते हैं. इसके अलावा, आपके शहर का भी इस पर बड़ा असर पड़ता है. दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में रहने वालों के लिए न्यूनतम सैलरी की सीमा अक्सर छोटे शहरों के मुकाबले 5,000 से 10,000 रुपये ज्यादा रखी जाती है.
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अगर आपकी सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि लोन पक्का मिल ही जाएगा. बैंक आपकी 'रीपेमेंट कैपेसिटी' देखते हैं. वे FOIR (Fixed Obligation Income Ratio) का इस्तेमाल करते हैं. सरल शब्दों में कहें तो, आपकी कुल ईएमआई आपकी महीने की कमाई के 40% से 50% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आपने पहले से ही कोई कार लोन या होम लोन ले रखा है, तो नया लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है.
इसके अलावा, आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL) सबसे बड़ा खिलाड़ी है. 750 या उससे ऊपर का स्कोर होने पर बैंक कम सैलरी पर भी भरोसा कर लेते हैं. लेकिन अगर स्कोर 650 से नीचे है, तो आपकी सैलरी 50,000 रुपये होने पर भी बैंक हाथ पीछे खींच सकते हैं. साथ ही, आपकी नौकरी की स्थिरता यानी आप कम से कम 1 से 2 साल से काम कर रहे हों यह भी बहुत जरूरी है.
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जिन लोगों की सैलरी 15,000 रुपये से कम है, उनके लिए बड़े बैंक शायद दरवाजे न खोलें, लेकिन मायूस होने की जरूरत नहीं है. आजकल कई NBFCs (जैसे बजाज फिनसर्व, टाटा कैपिटल) और नए जमाने के फिनटेक ऐप्स हैं जो 12,000 से 15,000 रुपये की सैलरी पर भी छोटे लोन दे देते हैं.
एक और स्मार्ट तरीका है 'को-एप्लीकेंट' जोड़ना. अगर आपकी सैलरी कम है, तो आप अपने जीवनसाथी या माता-पिता को लोन में शामिल कर सकते हैं जिनकी अपनी आय हो. इससे बैंक की नजर में आपकी संयुक्त आय बढ़ जाती है और लोन मिलने की संभावना के साथ-साथ बड़ी रकम मिलने का रास्ता भी खुल जाता है.
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पर्सनल लोन लेना आज के दौर में मुश्किल नहीं है, बस आपको अपनी वित्तीय स्थिति और बैंक के नियमों की सही जानकारी होनी चाहिए. अगर आपकी नेट सैलरी 25,000 रुपये के आसपास है और क्रेडिट स्कोर अच्छा है, तो आप आसानी से किसी भी बड़े बैंक से लोन ले सकते हैं. लेकिन याद रखें, लोन उतना ही लें जितनी आपकी चुकाने की क्षमता हो. कर्ज लेना जितना आसान है, उसे चुकाने का अनुशासन बनाए रखना उतना ही जरूरी है ताकि भविष्य में आपकी वित्तीय साख बनी रहे.
A- ज्यादातर बड़े बैंकों के लिए न्यूनतम सैलरी 20,000 से 25,000 रुपये के बीच होनी चाहिए.
A- हां, कुछ NBFCs और छोटे बैंक 15,000 रुपये की सैलरी पर भी लोन देते हैं, लेकिन ब्याज दरें थोड़ी ज्यादा हो सकती हैं.
A- जी हां, मेट्रो शहरों (जैसे मुंबई, दिल्ली) में रहने वालों के लिए सैलरी की न्यूनतम सीमा अक्सर ज्यादा होती है.
A- सैलरी के अलावा एक अच्छा क्रेडिट स्कोर (750+) और कम से कम 1-2 साल का काम अनुभव होना जरूरी है.
A- ज्यादातर बैंक बैंक-ट्रांसफर वाली सैलरी ही स्वीकार करते हैं, कैश में सैलरी मिलने पर लोन मिलना काफी मुश्किल होता है.
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