Millennials vs Gen Z: सैलरी बढ़ाने की रेस में कौन है सबसे आगे? जानिए भारतीय प्रोफेशनल्स के मन की बात

क्या आप अपनी सैलरी से खुश हैं? भारत में 90% मिलेनियल्स अब इंक्रीमेंट की तैयारी में हैं. एक नई रिपोर्ट बताती है कि भारतीय प्रोफेशनल्स सैलरी के मामले में दुनिया से कहीं ज्यादा उम्मीदें रखते हैं.तो जानिए क्यों मिलेनियल्स और Gen Z के बीच अपनी सैलरी बढ़ाने को लेकर जबरदस्त होड़ मची है.
Millennials vs Gen Z: सैलरी बढ़ाने की रेस में कौन है सबसे आगे? जानिए भारतीय प्रोफेशनल्स के मन की बात

नई रिपोर्ट बताती है कि भारतीय प्रोफेशनल्स सैलरी के मामले में दुनिया से कहीं ज्यादा उम्मीदें रखते हैं  (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt) 

आज के इस टाइम में नौकरी केवल काम करने का जरिया नहीं, बल्कि परफेक्ट लाइफस्टाइल और फाइनेंशियल सेफ्टी का आधार है. लेकिन क्या भारतीय कर्मचारी अपनी मौजूदा सैलरी से खुश हैं? असल में हाल ही में एनआई की वेबसाइट पर पेश की गई 'Association of Chartered Certified Accountants' (ACCA) की एक सर्वे रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. जी हां इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एक बड़ा वर्कफोर्स अपनी सैलरी से संतुष्ट नहीं है और आने वाले 12 महीनों में सैलरी हाइक की तैयारी में है.

हालांकि अब लोगों के मन में ये सवाल भी है कि सैलरी हाइक की चाहत के पीछे कौन ज्यादा है , Millennials या फिर Gen Z. तो इसलिए इसके बारे में डिटेल्ड में जानेंगे.

मिलेनियल्स: सैलरी की मांग में सबसे आगे

सामने आए इस सर्वे में जो सबसे दिलचस्प बात निकलकर आई है, वह है कि मिलेनियल्स (Millennials) का रुख. असल में मिलेनियल्स (वे लोग जिनका जन्म 1981 से 1996 के बीच हुआ है) सैलरी बढ़ाने की मांग करने में सबसे आगे हैं.

  • सर्वे के अनुसार, 90% मिलेनियल्स अगले एक साल में अपने बॉस से इंक्रीमेंट की मांग करने वाले हैं
  • इसके मुकाबले, जेन-जेड (Gen Z) के 77% और जेन-एक्स (Gen X) के 75% लोग ही सैलरी बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.

असल में मिलेनियल्स इस समय अपने करियर के उस पड़ाव पर हैं जहां उन पर पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य के इन्वेस्टमेंट का दबाव सबसे अधिक है, इसलिए वे अपनी इनकम को लेकर सबसे ज्यादा मुखर हैं.

उम्मीदों के मामले में कौन आगे है?

हालांकि भले ही सैलरी बढ़ाने की मांग करने वालों में मिलेनियल्स की संख्या ज्यादा हो, लेकिन बड़ी उछाल की उम्मीद करने वालों में गणित थोड़ा अलग है.असल में भारत में कर्मचारियों की उम्मीदें वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा हैं

ग्लोबल औसत

दुनिया भर में केवल 37% कर्मचारी 10% से ज्यादा की बढ़त की उम्मीद करते हैं

भारतीय औसत

भारत में 68% कर्मचारी 10% से ज्यादा इंक्रीमेंट की उम्मीद लगाए बैठे हैं

GenZ का अपना ही प्लान

जी हां अगर हम उम्र के हिसाब से देखें, तो जेन-एक्स (Gen X) के 76% लोग 10% से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं. तो वहीं जेन-जेड (Gen Z) के 60% और मिलेनियल्स (Millennials) के 55% लोग इतनी बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद रखते हैं.

क्यों बढ़ रही है सैलरी की चाहत?

असल में भारतीय कर्मचारियों के बीच बढ़ती महंगाई, बेहतर लाइफस्टाइल की चाहत और ग्लोबल मार्केट में टैलेंट की बढ़ती डिमांड इस असंतोष का अहम कारण है. खास तौर पर भारत में जिस तरह से 'कॉस्ट ऑफ लिविंग' बढ़ी है, उसने कर्मचारियों को अपनी सैलरी पर फिर से विचार करने को मजबूर कर दिया है.

कंपनियों के लिए क्या संकेत है?

यह रिपोर्ट कंपनियों के लिए एक अलार्म की तरह है.अगल कंपनियां अपने टैलेंटेड वर्कफोर्स, खासकर मिलेनियल्स और जेन-जेड को अपने साथ बनाए रखना चाहती हैं, तो उन्हें केवल 'वर्क कल्चर' ही नहीं बल्कि 'पे-चेक' पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा.

क्या कहते हैं आंकड़े?

जी हां रिपोर्ट के मुताबिक भारत में केवल 29% कर्मचारी ही अपनी मौजूदा सैलरी से खुश हैं. यानी बड़ी संख्या में लोग अपनी कमाई को लेकर खुश नहीं हैं और आने वाले समय में इंक्रीमेंट को लेकर दबाव और बढ़ सकता है.

आपके काम की बात

भारत में 'सैलरी असंतोष' एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. जी हां तो अब देखना यह होगा कि आने वाले इंक्रीमेंट सीजन में कंपनियां अपने कर्मचारियों की इन उम्मीदों को कितना पूरा कर पाती हैं.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 मिलेनियल्स सैलरी हाइक के लिए इतने उतावले क्यों हैं?

इस उम्र में होम लोन, बच्चों की पढ़ाई और घर की बड़ी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, इसलिए मिलेनियल्स को अपनी बढ़ती जरूरतों के लिए ज्यादा पैसों की दरकार है

Q2 क्या भारत में 10% से ज्यादा इंक्रीमेंट मिलना संभव है?

आईटी और नई टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में यह मुमकिन है,भारत की ग्रोथ रेट ज्यादा होने की वजह से यहां ग्लोबल मार्केट के मुकाबले बेहतर हाइक मिलती है

Q3 अगर कंपनी सैलरी न बढ़ाए, तो कर्मचारी क्या करते हैं?

ज्यादातर लोग नौकरी बदलने का फैसला लेते हैं, कुछ लोग सैलरी के बजाय 'वर्क फ्रॉम होम' या बेहतर सुविधाओं के लिए मोलभाव करते हैं

Q4 क्या केवल स्किल्स बढ़ाने से सैलरी बढ़ सकती है?

अगर आप एआई (AI) या कोई नई डिमांड वाली स्किल सीख लेते हैं, तो कंपनी आपको रोकने के लिए ज्यादा सैलरी देने को तैयार हो जाती है

Q5 सैलरी से असंतोष का कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

कंपनियों में 'एट्रीशन रेट' यानी नौकरी छोड़ने वालों की संख्या बढ़ सकती है,टैलेंट को रोके रखने के लिए कंपनियों को अपने सैलरी स्ट्रक्चर पर फिर से सोचना होगा

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