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अब फुल एंड फाइनल सेटलमेंट अमाउंट के लिए लंबा इंतजार करने का झंझट खत्म.
अगर आप अपनी मौजूदा नौकरी से परेशान हैं और नई शुरुआत के लिए इस्तीफा (Resign) देने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! 1 अप्रैल 2026 से जॉब छोड़ने से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव हुए हैं. यह आपके लिए पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदेमंद और आसान हो गया है.
अक्सर लोग इसलिए नौकरी नहीं छोड़ पाते थे, क्योंकि उन्हें डर रहता था कि कंपनी उनका 'फुल एंड फाइनल' पैसा 3-3 महीने तक रोक लेगी, जिससे घर चलाना मुश्किल हो जाएगा. लेकिन अब सरकार ने नियमों की ऐसी 'चाबुक' चलाई है कि कंपनियों को 48 घंटे के भीतर आपका हिसाब करना होगा. आइए, इस पूरे बदलाव को विस्तार से समझते हैं.
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अब तक क्या होता था? इस्तीफा देने के बाद कर्मचारी को अपनी बची हुई सैलरी, छुट्टियों के पैसे (Leave Encashment) और अन्य एरियर के लिए 45 से 90 दिनों तक चक्कर इंतजार करना पड़ता था. कई बार तो कुछ कंपनियां पैसे चुकाने में इससे भी ज्यादा देर कर देती थीं. इससे जॉब छोड़ने वाले कर्मचारी को कुछ वक्त के लिए आर्थिक संकट झेलना पड़ता था.
Section 17(2) - Code on Wages: इस नए नियम के तहत कंपनी को कर्मचारी के आखिरी वर्किंग डे के 2 वर्किंग डेज के भीतर सारा पैसा चुकाना होगा.
किस पर लागू होगा: चाहे आपने खुद इस्तीफा दिया हो, कंपनी ने आपको निकाला हो, या आप छंटनी (Retrenchment) के शिकार हुए हों- नियम सब पर समान है.
देरी हुई तो क्या: अगर कंपनी 2 दिन में भुगतान नहीं करती, तो यह कानूनी उल्लंघन माना जाएगा. आप लेबर डिपार्टमेंट में शिकायत कर सकते हैं और देरी के लिए ब्याज (Interest) की मांग भी कर सकते हैं.
अगर आप कम से कम 1 साल तक नौकरी करते हैं और फिर इस्तीफा देते हैं तो आपको ग्रेच्युटी भी मिलेगी. पहले 5 साल काम करने के बाद कोई कर्मचारी ग्रेच्युटी के लिए योग्य होता था.
30 दिन में मिलेगी ग्रेच्युटी: अगर आप नौकरी छोड़ते हैं तो नए नियमों के तहत आपको 30 दिन के अंदर ग्रेच्युटी मिल जाएगी.
नए नियमों के अनुसार, आपकी बेसिक सैलरी (Basic Pay) आपकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए.
PF में बढ़ोत्तरी: चूंकि पीएफ आपकी बेसिक सैलरी पर कटता है, इसलिए बेसिक बढ़ने से आपका पीएफ फंड तेजी से बढ़ेगा.
ग्रेच्युटी का फायदा: ग्रेच्युटी की गणना भी बेसिक सैलरी पर होती है. जब आप कम से कम 1 साल बाद नौकरी छोड़ेंगे, तो आपको पहले के मुकाबले ज्यादा ग्रेच्युटी मिलेगी.
टेक-होम सैलरी: ध्यान रहे, पीएफ ज्यादा कटने की वजह से आपके हाथ में आने वाली मंथली सैलरी थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह आपके लंबे समय के फायदे (रिटायरमेंट कॉर्पस) के लिए बेहतरीन है.
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यह नियम विशेष रूप से IT, बीपीओ (BPO) और रिटेल सेक्टर की कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, जो अब तक बेसिक सैलरी को बहुत कम रखती थीं. उम्मीद जताई जा रही है कि कंपनियों की वैधानिक लागत (Statutory Costs) 5% से 15% तक बढ़ सकती है. इसका मतलब है कि भविष्य में कंपनियां सैलरी हाइक देते समय इन बढ़े हुए खर्चों को ध्यान में रखेंगी.
नोटिस पीरियड: सुनिश्चित करें कि आप अपना नोटिस पीरियड सही से पूरा कर रहे हैं, वरना कंपनी 'नोटिस पे' काटकर आपका हिसाब 2 दिन में कर देगी.
दस्तावेज: अपने सारे निवेश के सबूत (Investment Proofs) पहले ही जमा कर दें, ताकि टैक्स कटने के बाद आपकी नेट सैलरी सही आए.
लेबर कोड अपडेट: अपनी कंपनी के एचआर (HR) से पूछें कि क्या उन्होंने 1 अप्रैल के नए लेबर कोड के हिसाब से आपके पे-रोल (Payroll) को अपडेट कर दिया है.
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1 अप्रैल 2026 से लागू हुए ये नियम आपको 'कर्मचारी' के तौर पर पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाते हैं. अब कंपनियां आपके पैसे को रोककर आपको परेशान नहीं कर पाएंगी. अगर आप स्विच करने का मन बना चुके हैं, तो यह नया वित्त वर्ष आपके बैंक बैलेंस और मानसिक शांति दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा.
1- अगर कंपनी 2 दिन में पैसा न दे तो क्या करें?
आप अपने राज्य के लेबर कमिश्नर या लेबर कोर्ट में लिखित शिकायत दे सकते हैं. नया कोड आपको इसके लिए पूरी सुरक्षा देता है.
2- क्या यह नियम प्राइवेट और सरकारी दोनों कर्मचारियों पर लागू है?
जी हां, 'कोड ऑन वेजेज' सभी संगठित क्षेत्रों (Organized Sectors) पर लागू होता है.
3- मेरी टेक-होम सैलरी कितनी कम हो जाएगी?
यह आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी पर निर्भर करता है. औसतन 2% से 5% की कमी आ सकती है, लेकिन पीएफ में उतना ही इजाफा होगा.
4- क्या छुट्टियों का पैसा (Leave Encashment) भी 2 दिन में मिलेगा?
हां, वेजेज (Wages) की परिभाषा में छुट्टियों का पैसा भी शामिल है, इसलिए इसे 2 दिन के भीतर चुकाना होगा.
5- क्या स्टार्टअप कंपनियों पर भी यह नियम लागू होगा?
हां, भारत में रजिस्टर्ड हर उस कंपनी पर यह नियम लागू है जो कर्मचारियों को वेतन देती है.
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