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आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख निकल चुकी है. पहले ये लास्ट डेट 15 सितंबर थी, बाद में सरकार ने इसे बढ़ाकर 16 सितंबर कर दिया था. लेकिन फिर भी तमाम ऐसे लोग हैं जो 16 सितंबर को भी रिटर्न फाइल नहीं कर पाए. ऐसे लोगों के पास अब बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) का ऑप्शन है. बिलेटेड रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर है. लेकिन ये मौका दो बड़े नुकसानों के साथ आता है. पहला आर्थिक और दूसरा आपके टैक्स प्लानिंग से जुड़ा हुआ. यहां जानिए इस बारे में.
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 234F के तहत, अगर आप निर्धारित तारीख तक ITR फाइल नहीं करते हैं, तो आपको जुर्माना भरना पड़ता है. ये जुर्माना आपकी कुल आय और ITR फाइल करने की तारीख पर निर्भर करता है:
ये जुर्माना टैक्सपेयर्स पर एक अतिरिक्त बोझ डालता है. ये पैसा सीधे तौर पर आपकी जेब से जाएगा और इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा.
बिलेटेड ITR फाइल करने का एक बड़ा नुकसान ये है कि आपको टैक्स रिजीम बदलने की सुविधा नहीं मिलेगी.
सामान्य तौर पर, टैक्सपेयर्स को हर साल ये चुनने का अधिकार होता है कि वो कौन सी रिजीम अपनाना चाहते हैं, जिससे उन्हें सबसे ज़्यादा टैक्स बेनिफिट मिल सके. ये चुनाव आमतौर पर ITR फाइल करते समय ही किया जाता है. लेकिन, अगर आप बिलेटेड ITR फाइल कर रहे हैं, तो आपको ये सुविधा नहीं मिलेगी. नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाया जा चुका है. इसका साफ मतलब है कि आपने अगर टैक्स रिजीम को नहीं चुना है तो आपको अब नई टैक्स रिजीम के नियमों के तहत ही ITR फाइल करना होगा. ये उन टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है जो पुरानी टैक्स रिजीम में ज़्यादा छूट का लाभ ले रहे थे और उनके लिए वो ज़्यादा फायदेमंद थी.
लेट फाइलिंग का मतलब है कि आपका रिफंड भी देर से मिलेगा. टैक्स डिपार्टमेंट पहले समय पर भरे गए रिटर्न प्रोसेस करता है, इसलिए लेट फाइलर को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
31 दिसंबर 2025 तक आप बिलेटेड रिटर्न फाइल कर सकते हैं.
आय ₹5 लाख से ज्यादा होने पर ₹5,000 और 5 लाख से कम होने पर ₹1,000 पेनल्टी लगेगी.
हां, बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह ब्याज सेक्शन 234A के तहत वसूला जाएगा.
नहीं, लेट रिटर्न में आपको नई टैक्स रिजीम से ही रिटर्न भरना होगा.
लेट फाइल करने पर रिफंड प्रोसेसिंग समय बढ़ सकता है और देरी से पैसा मिलेगा.