एक्सप्लेनर: इटली में नौकरी करने वालों को कैसे मिलती है सैलरी? जानिए वहां का Payroll सिस्टम, Minimum Wage और ‘13th Salary’ का पूरा रोल

इटली में नौकरी या बिजनेस का है प्लान? तो वहां का पेरोल सिस्टम समझना बहुत जरूरी है.असल में यहां साल में 12 नहीं बल्कि 13 बार सैलरी मिलती है. कोई नेशनल मिनिमम वेज न होने के बावजूद कैसे होती है लाखों में कमाई? तो जानिए 13th-month सैलरी, टैक्स और 2026 के नए नियमों का पूरा गणित
एक्सप्लेनर: इटली में नौकरी करने वालों को कैसे मिलती है सैलरी? जानिए वहां का Payroll सिस्टम, Minimum Wage और ‘13th Salary’ का पूरा रोल

इटली में नौकरी या बिजनेस का है प्लान? तो वहां का पेरोल सिस्टम समझना बहुत जरूरी है  (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)

अगर आप भी इटली में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, या फिर वहां बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या किसी विदेशी कंपनी के साथ काम कर रहे हैं, तो एक चीज समझना बेहद जरूरी है वो है वहां का पैरोल सिस्टम. इटली का पेरोल सिस्टम दुनिया के सबसे जटिल सिस्टम्स में गिना जाता है. यही वजह है कि कई कंपनियां वहां कर्मचारियों की सैलरी और टैक्स मैनेज करने के लिए अलग एजेंसियों की मदद लेती हैं.

इटली में सैलरी केवल महीने की तनख्वाह भर नहीं होती, बल्कि उसमें टैक्स, सोशल सिक्योरिटी, पेंशन, हेल्थ बेनिफिट और यहां तक कि ‘13th Month Salary’ जैसी खास सुविधाएं भी शामिल होती हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इटली का पेरोल सिस्टम आखिर कैसे काम करता है.

नेशनल मिनिमम वेज नहीं करता है काम

इटली में वैसे कोई एक नेशनल मिनिमम वेज (न्यूनतम वेतन) नहीं है, बल्कि 'नेशनल कलेक्टिव बारगेनिंग एग्रीमेंट्स' (CBAs) तय करते हैं कि किस इंडस्ट्री में कितनी सैलरी मिलेगी. टैक्स प्रोग्रेसिव होते हैं (यानी ज्यादा कमाई पर ज्यादा टैक्स) और सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन से पेंशन, हेल्थकेयर और दूसरे फायदे मिलते हैं, जिसमें एम्प्लॉई और एम्प्लॉयर दोनों हिस्सा देते हैं.


इटली में Minimum Wage क्यों अलग है?

भारत या कई दूसरे देशों की तरह इटली में सरकार की तरफ से कोई एक फिक्स राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (National Minimum Wage) तय नहीं है. इटली में अलग-अलग इंडस्ट्री के लिए अलग National Collective Bargaining Agreements यानी CBA/CCNL लागू होते हैं. इन्हें कर्मचारी यूनियन और कंपनियों के संगठन मिलकर तय करते हैं.

यही एग्रीमेंट बताते हैं कि किस सेक्टर में कितनी सैलरी मिलेगी,कौन-कौन से भत्ते मिलेंगे,प्रमोशन के नियम क्या होंगेओवरटाइम और छुट्टियों का भुगतान कैसे होगा.यानी होटल, फैक्ट्री, रिटेल, आईटी और खेती हर सेक्टर की न्यूनतम सैलरी अलग हो सकती है.

इटली में पेरोल सर्विसेज को आउटसोर्स करना

ग्लोबल पेरोल कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स (GCPI) रिपोर्ट के पेरोल संभालने के मामले में इटली को दुनिया में पांचवां सबसे पेचीदा देश माना गया है. असल में इसमें पेरोल सेटअप करने से लेकर उसे चलाने तक सब शामिल होता है. इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि एम्प्लॉयर को कर्मचारियों को पैसे देते वक्त बहुत सारे कलेक्टिव बारगेनिंग एग्रीमेंट्स का ध्यान रखना पड़ता है.

इटली में मिनिमम वेज (Minimum Wage)

चूंकि इटली में सरकार की तरफ से कोई एक तय मिनिमम वेज नहीं है, इसलिए कई चीजें मिलकर यह तय करती हैं कि किसी कर्मचारी को कम से कम कितना पैसा मिलना चाहिए. साल 2026 में, इटली में मिनिमम पे मुख्य रूप से सेक्टर के नियमों और कॉन्ट्रैक्ट के टाइप पर निर्भर करती है.

इटली की मिनिमम वेज पॉलिसी

इटली में सैलरी अहम रूप से सेक्टर-स्पेसिफिक नेशनल कलेक्टिव बारगेनिंग एग्रीमेंट्स (CBAs/CCNL) के जरिए तय होती है. ये एग्रीमेंट्स यूनियनों और एम्प्लॉयर एसोसिएशन्स के बीच बातचीत करके बनाए जाते हैं. यही मैन्युफेक्चरिंग, रिटेल, सर्विसेज और एग्रीकल्चर जैसी इंडस्ट्रीज में मिनिमम पे स्केल, क्लासिफिकेशन, भत्ते और तरक्की के नियम तय करते हैं.

असल में मिनिमम पे अलग-अलग एग्रीमेंट के हिसाब से तय होते हैं, तो इसलिए हर सेक्टर और जॉब प्रोफाइल के लिए यह काफी अलग हो सकती है. यह सिस्टम इंडस्ट्री के हालातों के हिसाब से सैलरी तय करने में मदद करता है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि पूरे देश के लिए कोई एक फिक्स मिनिमम वेज नहीं है.

इटली में औसत मिनिमम वेज

आपको बता दें ति मिनिमम पे हर सेक्टर के हिसाब से अलग होती है, तो इसलिए किसी भी एवरेज मिनिमम वेज को केवल एक अनुमान माना जा सकता है. साल 2026 में, कई कलेक्टिव बारगेनिंग एग्रीमेंट्स (CBAs) के तहत शुरुआती या निचले स्तर के रोल्स के लिए मिनिमम पे लगभग €7 से €9 प्रति घंटा (ग्रॉस) ( भारतीय रुपये में लगभग ₹785 से ₹1,010 प्रति घंटा के बीच होगी) बैठती है.

इसके अलावा, किस इलाके में काम हो रहा है इसका भी असर पड़ता है; आमतौर पर दक्षिणी इटली के मुकाबले उत्तरी इटली में सैलरी थोड़ी ज्यादा होती है. कम स्किल वाले फुल-टाइम रोल्स के लिए, मिनिमम मंथली अर्निंग आमतौर पर €1,200 से €1,500 ग्रॉस (टैक्स कटने से पहले) (भारतीय रुपये (INR) में लगभग ₹1,34,500 से ₹1,68,500 के बीच बनेगी) के बीच होती है. हाथ में आने वाली नेट सैलरी (In-hand salary) टैक्स और सोशल कंट्रीब्यूशन्स कटने के बाद अलग-अलग हो सकती है.

अलग-अलग तरह के वर्कर्स के लिए मिनिमम पे

अप्रेंटिस और इंटर्न्स

अप्रेंटिस (ट्रेनी) आमतौर पर पूरी तरह क्वालिफाइड कर्मचारियों से कम कमाते हैं, क्योंकि उनकी पे कलेक्टिव एग्रीमेंट के तहत ट्रेनिंग स्टेटस और प्रोग्रेसिव वेज स्टेप्स से जुड़ी होती है. सेक्टर और अप्रेंटिसशिप के साल के हिसाब से मंथली पे काफी अलग और स्टैंडर्ड एंट्री-लेवल सैलरी से कम हो सकती है.

पार्ट-टाइम वर्कर्स

इनके लिए मिनिमम पे काम के घंटों के अनुपात में लागू होती है. पार्ट-टाइम कर्मचारियों को उसी सेक्टर और क्लासिफिकेशन के फुल-टाइम कर्मचारियों के बराबर ही प्रति-घंटा रेट मिलना चाहिए, बस उसे उनके कम किए गए घंटों के हिसाब से एडजस्ट कर दिया जाता है.

wage code

इंटरनेशनल स्टूडेंट्स

अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए कोई अलग से मिनिमम वेज नहीं है. वे उस रोल और क्लासिफिकेशन के लिए लागू कलेक्टिव एग्रीमेंट (CBA) के तहत तय मिनिमम पे के हकदार हैं, और उनके काम करने के घंटे उनके कॉन्ट्रैक्ट और इमिग्रेशन नियमों के दायरे में तय होते हैं.

इटली का पेरोल सिस्टम

कंपनियों और कर्मचारियों दोनों के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि इटली में पेरोल कैसे काम करता है. अलग-अलग कानूनों, जरूरी कंट्रीब्यूशन्स और '13th-month salary' (तेरहवें महीने की सैलरी) जैसे अनोखे कंपोनेंट्स की वजह से यहां का पेरोल सिस्टम काफी अलग है.

इटली में पेरोल साइकिल

इटली में स्टैंडर्ड पेरोल साइकिल मंथली (मासिक) होती है, और सैलरी आमतौर पर हर महीने की 27 तारीख को दी जाती है.

आपको बता दें कि एम्प्लॉयर्स के लिए एक डिटेल्ड पे स्लिप देना जरूरी है, जिसमें कुल कमाई, टैक्स और कटौतियां साफ-साफ लिखी हों. कर्मचारियों के लिए यह पे स्लिप समझना बहुत जरूरी है ताकि उन्हें अपनी टोटल कॉम्पन्सेशन का पता चल सके, जिसमें ओवरटाइम या बोनस जैसी चीजें भी शामिल होती हैं.


कर्मचारियों के लिए रेगुलरली पेमेंट है जरूरी

इसके अलावा, इटली के कानून के मुताबिक कर्मचारियों को रेगुलरली पेमेंट करना जरूरी है. अगर सैलरी देने में देरी होती है, तो एम्प्लॉयर पर जुर्माना लग सकता है. फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट या टेम्परेरी रोल्स वाले वर्कर के लिए पेरोल साइकिल थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर मंथली शेड्यूल ही चलता है. अगर उन्हें समय पर पैसा नहीं मिलेगा, तो वे ज्यादा दिन टिकेंगे नहीं.

आपके काम की बात

आपको बता दें कि इटली का पैरोल सिस्टम दुनिया के सबसे व्यवस्थित लेकिन सबसे जटिल सिस्टम्स में से एक माना जाता है. वहां सैलरी सिर्फ महीने की तनख्वाह नहीं, बल्कि सोशल सिक्योरिटीसे लेकर Employee बेनेफिट्स का पूरा पैकेज होती है.

तो अगर आप इटली में नौकरी करना चाहते हैं या वहां बिजनेस बढ़ाने की सोच रहे हैं, तो वहां के Payroll Rules को समझना बेहद जरूरी है. सही जानकारी न केवल कानूनी दिक्कतों से बचाती है, बल्कि कर्मचारियों और कंपनियों दोनों के लिए सिस्टम को आसान भी बनाती है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 बीमार होने पर क्या सैलरी कटती है?

इटली में 'पेड सिक लीव' मिलती है, बीमारी में भी आपको सैलरी का बड़ा हिस्सा मिलता रहता है

Q2 क्या विदेशियों को इटालियन लोगों से कम सैलरी मिलती है?

बिल्कुल नहीं,नियम सबके लिए बराबर हैं; एक जैसे काम के लिए सबको बराबर सैलरी और हक मिलते हैं

Q3 क्या वहां इलाज का खर्च सैलरी से जुड़ा है?

आपकी सैलरी से कटने वाले टैक्स की वजह से वहां सरकारी अस्पताल में इलाज लगभग फ्री होता है

Q4 क्या टैक्स बचाने का कोई खास नियम है?

अगर आप पहली बार इटली काम करने जा रहे हैं, तो शुरुआती कुछ सालों तक इनकम टैक्स में भारी छूट मिल सकती है

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