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'1 करोड़ हो गया तो जिंदगी सेट है'.. आपने बहुत से लोगों को ये कहने सुना होगा. खासकर मिडिल क्लास लोग तो इसी सोच के साथ अपना निवेश भी शुरू करते हैं. चाय के ठेलों से लेकर दोस्तों की महफिलों तक में इसका जिक्र जरूर होता है. खैर, मान लेते हैं कि आप कुछ ऐसा प्लान बनाते हैं, जिससे आप रिटायरमेंट तक 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस बना लेते हैं.
अब सवाल ये उठता है कि क्या आपका 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस आपके बुढ़ापे के लिए काफी है? अधिकतर लोग आज के हिसाब से कैलकुलेशन करते हैं और अपनी रिटायरमेंट की प्लानिंग करते हैं. वह ये नहीं सोचते कि रिटायरमेंट तक 1 करोड़ रुपये की क्या वैल्यू रह जाएगी. आइए समझते हैं क्यों अब ₹1 करोड़ से जिंदगी नहीं होती ‘सेट’.
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2000 के दशक में 1 करोड़ में घर, कार और FD से घर का खर्च आसानी से चलता था. वहीं आज के वक्त में आप 1 करोड़ रुपये से बेंगलुरु या मुंबई में एक ठीक-ठाक 2BHK भी नहीं खरीद पाएंगे. हर चीज दिन गुजरने के साथ महंगी होती जा रही है.
मिडल क्लास फैमिली एक हेल्थ इमरजेंसी से पूरी तरह हिल जाती है. कैंसर, हार्ट सर्जरी या ट्रांसप्लांट जैसी चीजों का खर्च 20-30 लाख तक हो सकता है. खैर, इससे आप खुद को बचा सकते हैं, लेकिन उसके लिए आपको हर साल हेल्थ इंश्योरेंस पर कुछ पैसे खर्च करने होगे. इसे खर्चे की तरह नहीं, बल्कि अपनी हेल्थ पर निवेश की तरह देखें, वरना बुढ़ापा रोते-रोते काटने की नौबत आ सकती है.
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बच्चों की स्कूल फीस हर साल तेजी से बढ़ रही है. मेट्रो शहरों में हर हफ्ते रेस्टोरेंट जाना, हर OTT ऐप का सब्सक्रिप्शन लेना और साल में कम से कम एक बार कहीं घूमने जाना आम बात होती जा रही है. देखा जाए तो यह मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों की लाइफस्टाइल है. इन सब की वजह से लोगों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन अगर बात करें सैलरी बढ़ने या कमाई बढ़ने की तो कम ही लोग हैं, जिनकी कमाई उनके खर्चों से ज्यादा बढ़ी है.

आपको चाहिए कि आपके एक नहीं, बल्कि कई इनकम सोर्स हों. जॉब के साथ-साथ फ्रीलांसिंग, इन्वेस्टमेंट, प्रॉपर्टी से रेंट जैसी कुछ न कुछ एक्स्ट्रा इनकम होनी ही चाहिए.
आपातकालीन फंड भी जरूरी है, जिससे जरूरत पड़ते ही कम से कम 6 महीने का खर्च तुरंत निकाल सकें, इतना पैसा आपको अलग से रखना चाहिए.
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस दोनों होने चाहिए. सिर्फ ऑफिस का इंश्योरेंस काफी नहीं, अपना निजी इंश्योरेंस भी जरूर लें.
FD से आगे बढ़िए और SIP, म्यूचुअल फंड, NPS में निवेश को समझिए. तभी आप लंबे वक्त में ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं.
फाइनेंशियल लिटरेसी बहुत जरूरी है. इसके लिए आपको CA बनने की जरूरत नहीं है, लेकिन महंगाई, टैक्स और कंपाउंडिंग की बेसिक समझ जरूरी है.
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सच्चाई ये है कि ज्यादातर मिडल क्लास फैमिली सिर्फ जैसे-तैसे खुद को टिकाए हुए हैं. एक सर्जरी, एक छंटनी, या एक मार्केट क्रैश, और आपकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग ध्वस्त हो सकती है. अगर आज आपकी कमाई बंद हो जाए, तो आप कितने साल अपनी लाइफस्टाइल चला पाएंगे? अगर जवाब 10 साल से कम है– तो आप ‘सेट’ नहीं हैं, आप सिर्फ सर्वाइव कर रहे हैं. जिंदगी तभी सेट है जब आपका पैसा भी सोते वक्त आपके लिए काम कर रहा हो. इसके लिए आपको बस सोच समझकर सही जगह निवेश करते रहना है.
अगर 6% सालाना महंगाई के हिसाब से देखें तो 1 करोड़ रुपये की वैल्यू 12 साल में करीब आधी यानी लगभग 50 लाख रुपये के बराबर रह जाती है. मान लेते हैं कि आपने 30 साल की उम्र में सोचा कि आपको रिटायरमेंट पर 1 करोड़ रुपये चाहिए और आपने उसी हिसाब से निवेश करने शुरू किए. आपने 30 साल की उम्र में उसी वक्त के हिसाब से खर्चे सोचे, लेकिन 60 साल की उम्र तक खर्चों का गणित काफी बदल चुका होगा. ऐसे में अगर हर साल महंगाई 6 फीसदी के औसत रेट से बढ़ती है तो 60 साल की उम्र में आपके 1 करोड़ रुपये की वैल्यू आज के 20 लाख रुपये के बराबर ही रह जाएगी.
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रिटायरमेंट की प्लानिंग बहुत ही जरूरी होती है और इसके लिए सबसे शानदार इंस्ट्रुमेंट है एनपीएस (NPS). जब आप रिटायरमेंट प्लानिंग करते हैं तो उस वक्त आपको आगे का कैलकुलेशन करने के बजाय उल्टा कैलकुलेशन करना चाहिए. यानी आपको ये नहीं देखना चाहिए आप कितने पैसे निवेश (Investment) करना चाहते हैं, बल्कि आपको ये समझना जरूरी है कि रिटायरमेंट पर आपको कितने पैसे चाहिए होंगे. आइए समझते हैं अगर आप रिटायरमेंट पर 2 लाख की पेंशन पाना चाहते हैं तो उसके लिए निवेश कैसे करें.
अगर आज के वक्त में मेट्रो शहरों को देखें तो वहां अच्छे से जिंदगी जीने के लिए हर महीने करीब 50 हजार रुपये तो चाहिए ही होते हैं. इसमें आपके घर का किराया, गाड़ी का खर्च, आपका खाना-पीना-घूमना सब कुछ आ जाता है. अब अगर आप आज 30 साल के हैं और 30 साल बाद यानी 60 साल की उम्र में रिटायर होने के बाद कुछ नहीं करते हुए ऐसी ही जिंदगी जीना चाहते हैं तो उस वक्त आपको आज की तुलना में कम से कम 3-4 गुना पैसे चाहिए होंगे. यानी आपको रिटायरमेंट पर हर महीने करीब 2 लाख रुपये की जरूरत होगी.
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अगर मौजूदा एफडी रेट देखें तो ये 6-7 फीसदी के करीब रहते हैं. हम मान लेते हैं कि जब आप रिटायर होंगे उस वक्त कम से कम 5 फीसदी का ब्याज तो मिलेगा ही और अगर अधिक ब्याज मिला तो आपको और ज्यादा फायदा होगा. ऐसे में अगर आपको हर महीने 2 लाख रुपये चाहिए तो सालाना आपको 24 लाख रुपये का ब्याज चाहिए होगा. अगर 5 फीसदी की दर पर आपको 24 लाख रुपये ब्याज चाहिए तो इसके लिए आपके पास करीब 5 करोड़ रुपये का कॉर्पस होना चाहिए. इससे आपको सालाना 5 फीसदी की दर पर करीब 25 लाख रुपये का ब्याज मिलेगा.

जब आप रिटायर होंगे उस वक्त आपके पास दो विकल्प होंगे. या तो आप अपने सारे पैसों को किसी एन्युटी प्लान में लगाकर उससे पेंशन लेने लग जाओ. या फिर 60 फीसदी रकम निकाल लो और बचे हुए 40 फीसदी से एन्युटी प्लान बना लो. रिटायरमेंट पर एनपीएस का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा तो एन्युटी प्लान में लगाना ही होता है. हम मान रहे हैं कि आप अपने पूरे कॉर्पस को एन्युटी प्लान में लगा देते हैं और उस पर पेंशन बनवा लेते हैं. इस तरह आपका टारगेट पूरा हो सकता है.
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अगर आप अभी 30 साल के हैं और रिटायरमेंट पर 5 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाना चाहते हैं तो पहले ये समझना होगा कि आपको कितना ब्याज मिल सकता है. एनपीएस पर औसतन 10 फीसदी का ब्याज आसानी से मिल जाता है. ऐसे में अगर आप हर महीने एनपीएस में करीब 22,150 रुपये निवेश करते हैं तो 30 साल में आपके पैसे सालाना 10 फीसदी ब्याज की दर से करीब 5 करोड़ रुपये हो जाएंगे. यह मुमकिन होगा कंपाउंडिंग का ताकत की वजह से. इन 30 सालों में आपका कुल निवेश होगा करीब 79.74 लाख रुपये का. वहीं इस पर आपको करीब 4.21 करोड़ रुपये का ब्याज मिलेगा.
अगर आप हर महीने एनपीएस में सिर्फ 8000 रुपये के निवेश से शुरुआत करते हैं और हर साल निवेश की रकम को 10 फीसदी से बढ़ाते हैं तो 30 साल में आपके पैसे सालाना 10 फीसदी ब्याज की दर से करीब 5.13 करोड़ रुपये हो जाएंगे. इन 30 सालों में आपका कुल निवेश होगा करीब 1.58 करोड़ रुपये का. वहीं इस पर आपको करीब 3.55 करोड़ रुपये का ब्याज मिलेगा. इस तरीके में आपका कुल निवेश तो अधिक होगा, लेकिन शुरुआत में आप पर निवेश का बोझ कम पड़ेगा. वहीं हर साल आपकी सैलरी या कमाई बढ़ती ही जाएगी, जिसके साथ आप आसानी से निवेश को बढ़ा सकते हैं.