House Wife हैं आपकी पत्‍नी? उनके नाम से इस स्‍कीम में करें निवेश, डबल मुनाफा कमाएंगे

अगर आप निवेश में किसी तरह का रिस्‍क नहीं लेना चाहते हैं और इसलिए Fixed Deposit जैसी स्‍कीम्‍स में निवेश करना पसंद करते हैं, तो इसमें अपनी पत्‍नी के नाम से निवेश करें. ऐसा करके आप डबल मुनाफा कमा सकते हैं.
House Wife हैं आपकी पत्‍नी? उनके नाम से इस स्‍कीम में करें निवेश, डबल मुनाफा कमाएंगे

Tax Saving Tips: कमाई पर लगने वाले इनकम टैक्‍स को कैसे बचाया जाए, ये तरीका हर कोई ढूंढता है. आमतौर पर लोग टैक्‍स बेनिफिट्स देने वाली तमाम स्‍कीम्‍स में निवेश करके इनकम टैक्‍स बचाते हैं. लेकिन कुछ जुगाड़ ऐसे हैं जिनकी तरफ हर किसी का ध्‍यान नहीं जाता. ऐसी ही एक जुगाड़ आप House Wife पत्‍नी के जरिए लगा सकते हैं. अगर आप Fixed Deposit में निवेश करना पसंद करते हैं तो आपकी पत्‍नी इसमें आपका डबल मुनाफा करवा सकती हैं. उनके नाम से FD में निवेश करके आप ब्‍याज के जरिए अच्‍छी कमाई भी कर सकते हैं और इनकम टैक्‍स की बचत भी कर सकते हैं. समझिए कैसे?

ऐसे बचा सकते हैं टैक्‍स

नियम के मुताबिक अगर एफडी पर ब्‍याज के जरिए होने वाली कमाई सालाना 40,000 रुपए से ज्‍यादा है तो टीडीएस काटा जाता है. अगर आपकी इनकम टैक्‍स के दायरे में आती है, लेकिन आपकी पत्‍नी हाउस वाइफ हैं तो आप पत्‍नी के नाम से एफडी करवाकर टीडीएस भुगतान से बच सकते हैं. दरअसल हाउस वाइफ की टैक्‍स की देनदारी नहीं बनती है. वहीं अगर आपकी पत्‍नी लोअर टैक्‍स ब्रैकेट में आती हैं, तो भी आप उनके नाम से एफडी करवाकर टीडीएस कटौती को रोक सकते हैं. बस इसके लिए आपकी पत्‍नी को फॉर्म 15G भरना होगा. आप चाहें तो पत्‍नी के नाम से जॉइंट एफडी भी करवा सकते हैं, लेकिन इसमें आपको पत्‍नी को फर्स्‍ट होल्‍डर बनाना होगा.

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किस काम आता है Form 15G

अगर किसी व्यक्ति की ये इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम है और उम्र 60 साल से कम है तो उन्हें टीडीएस कटौती को रोकने के लिए Form 15G भरना होता है. फॉर्म 15G इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के अंडर सेक्शन 197A के अंडर सब सेक्शन 1और 1(A) के भीतर आने वाला डिक्लेरेशन फॉर्म है. इसके जरिए बैंक को आपकी सालाना इनकम के बारे में पता चलता है. इस फॉर्म के जरिए आप बैंक अगर आपकी आय टैक्‍स के दायरे में नहीं आती है, तो बैंक एफडी पर TDS नहीं काटता है.

Form 15H के बारे में भी जानें

फॉर्म 15H 60 साल या उससे ज्‍यादा उम्र के लोगों के लिए होता है. इसे जमा करके सीनियर सिटीजंस एफडी के ब्‍याज पर कटने वाले टीडीएस को रोक सकते हैं. लेकिन ये फॉर्म सिर्फ उन्हीं के द्वारा जमा किया जाता है जिनकी टैक्सेबल इनकम शून्य है. फॉर्म को उन सभी बैंक ब्रांच में जमा करना होता है जहां से पैसा जमा किया जा रहा है. अगर जमा के अलावा किसी अन्य सोर्स से इंटरेस्ट इनकम जैसे कि लोन, एडवांस, डिबेंचर, BONDS आदि पर इंटरेस्ट इनकम 5,000 रुपए से ज्यादा है तो फॉर्म 15H जमा करना होगा.

पहले ब्याज का भुगतान होने से पहले 15H फॉर्म सबमिट किया जाना चाहिए. हालांकि ये अनिवार्य नहीं है. लेकिन अगर आप ऐसा करते हैं तो शुरुआत से ही बैंक से टीडीएस कटौती को रोका जा सकता है. कोई कस्टमर अगर इन फॉर्म्‍स को भरने से चूक जाते हैं तो इनकम टैक्स रिटर्न में आकलन वर्ष में टीडीएस क्लेम कर सकते हैं. ऐसे में आयकर विभाग से रिफंड मिल जाएगा.


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