बीमा कंपनी का रिजेक्शन नहीं चाहिए तो सच बोलने में ही समझदारी, जानिए क्यों मेडिकल हिस्ट्री छिपाना पड़ सकता है जेब पर भारी

हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने पर अक्सर सोशल मीडिया पर हंगामा मच जाता है, लेकिन असली वजह कई बार अधूरी या गलत मेडिकल हिस्ट्री होती है. जी हां पॉलिसी लेते समय सही जानकारी और क्लेम के वक्त पूरे दस्तावेज देना ही आसान सेटलमेंट की असली कुंजी है.
बीमा कंपनी का रिजेक्शन नहीं चाहिए तो सच बोलने में ही समझदारी, जानिए क्यों मेडिकल हिस्ट्री छिपाना पड़ सकता है जेब पर भारी

आजकल सोशल मीडिया पर जैसे ही किसी का हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होता है, मामला तुरंत चर्चा में आ जाता है. सच्चाई वैसे ये है कि जानकारों का कहना है कि हर क्लेम रिजेक्शन के पीछे केवल एक वजह नहीं होती, मामला अक्सर जितना दिखता है उससे अलग होता है. वैसे रिजेक्शन का सबसे अहम कारण होता है इंश्योंरेस लेने टाइम मेडिकल हिस्ट्री को सही सेना बताना.

पॉलिसी लेते टाइम देनी होती है मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी

हेल्थ इंश्योरेंस असल में एक कानूनी समझौता होता है.तो जब आप पॉलिसी लेते हैं, तब आपको अपनी पुरानी बीमारियों और मेडिकल हिस्ट्री की पूरी जानकारी देनी होती है.असल में बीमा कंपनी उसी आधार पर पॉलिसी जारी करती है और शर्तों के मुताबिक इलाज का खर्च उठाती है. इनमें वेटिंग पीरियड और पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े रूल्स शामिल होते हैं.

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कंपनी क्लेम के टाइम क्या चेक करती है?

  • जब हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करते हैं, तो कंपनी सबसे पहले अस्पताल के कागज,मेडिकल रिकॉर्ड देखती है.
  • वह चेक करती है कि इलाज पॉलिसी की शर्तों के तहत कवर होता है या नहीं.
  • देखा जाता है कि कोई पुरानी बीमारी पहले से तो नहीं थी.
  • अगर जानकारी अधूरी या गलत हो, तो क्लेम अटक सकता है.
  • इसलिए पॉलिसी लेते समय सही और पूरी मेडिकल जानकारी देना बहुत जरूरी है.
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सबसे जरूरी बात: सही मेडिकल हिस्ट्री बताना होता है जरूरी?

  • हेल्थ इंश्योरेंस एक कानूनी समझौते (कॉन्ट्रैक्ट) के तहत काम करता है.
  • जब आप पॉलिसी खरीदते हैं, तब अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री सही-सही बतानी होती है.
  • बदले में बीमा कंपनी तय शर्तों के मुताबिक इलाज का खर्च उठाने का वादा करती है.
  • इन शर्तों में वेटिंग पीरियड और पहले से मौजूद बीमारियों से जुड़े रूल्स शामिल होते हैं.

हेल्थ हिस्ट्री बताना क्यों जरूरी है एक्सपर्ट की जानें राय

स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के सीओओ अमिताभ जैन ने कहा कि स्वास्थ्य से जुड़े मामले भावनात्मक होते हैं, लेकिन हर क्लेम का फैसला पॉलिसी की शर्तों और रूल्स के आधार पर ही लिया जाता है. उन्होंने बताया कि संबंधित मामले में मेडिकल रिकॉर्ड में पहले से बीमारी होने के संकेत मिले थे और जरूरी डाक्यूमेंट्स मांगे गए थे, लेकिन वे मौजूद नहीं कराए गए.तो ऐसे में फैसला नियमों के अनुसार लिया गया.

कब कंपनी चेक करती है मेडिकल रिकॉर्ड

असल में अक्सर क्लेम बिना किसी विवाद के सेटल हो जाते हैं.अगर मेडिकल रिकॉर्ड में पहले से बीमारी का जिक्र मिलता है और उसे पॉलिसी लेते समय नहीं बताया गया हो, तो कंपनी को नियमों के मुताबिक जांच करनी ही पड़ती है.एक्सपर्ट्स का मानना है कि सबसे बड़ी समस्या जानकारी की कमी और बातचीत का गैप है. परिवार इसे भावनात्मक नजर से देखता है, जबकि बीमा कंपनी कानूनी और नियामकीय ढांचे के तहत काम करती है.

सवाल: किन दो चीजों पर टिका होता हेल्थ इंश्योरेंस?

  • आखिर में बात साफ है हेल्थ इंश्योरेंस में भरोसा दो चीजों पर टिका है
  • पॉलिसी लेते समय पूरी सच्चाई बताना और क्लेम करते समय सही दस्तावेज देना.Insurance

सच्चाई बताना और सही डाक्यूमेंट्स देना

जब आप पॉलिसी खरीदते हैं तो अपनी पूरी और सही मेडिकल हिस्ट्री ईमानदारी से बताना चाहिए. असल में कोई पुरानी बीमारी या इलाज छिपाने से बाद में दिक्कत हो सकती है. दूसरा, जब क्लेम करें तो अस्पताल के सही और पूरे दस्तावेज समय पर जमा करना चाहिए.तो अगर जानकारी साफ और डाक्यूमेंट्स पूरे होंगे, तो क्लेम प्रोसेस आसान रहता है. यानी कि पारदर्शिता और सही दस्तावेज ही हेल्थ इंश्योरेंस में भरोसे की असली नींव हैं.

कम शब्दों में समझें पूरी बात

आपको बता दें कि कि अगर आप अपनी मेडिकल हिस्ट्री छुपाते हैं, तो बाद में क्लेम अटक सकता है. तो इसलिए बेहतर यही है कि शुरुआत में ही पारदर्शिता रखें, ताकि जरूरत के समय पॉलिसी सच में आपके काम आ सके.

FAQs

1. हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम क्यों रिजेक्ट होता है?
अक्सर गलत या अधूरी मेडिकल हिस्ट्री, पॉलिसी की शर्तें पूरी न होना या जरूरी दस्तावेज न देने की वजह से

2. पॉलिसी लेते समय क्या बताना जरूरी है?
अपनी सभी पुरानी बीमारियां, इलाज और मेडिकल रिकॉर्ड की सही जानकारी

3. कंपनी क्लेम के समय क्या चेक करती है?
अस्पताल के कागज, मेडिकल रिकॉर्ड और यह कि इलाज पॉलिसी में कवर है या नहीं

4. क्या पुरानी बीमारी छुपाने से क्लेम रुक सकता है?
हाँ, अगर प्री-एग्जिस्टिंग बीमारी नहीं बताई गई हो तो क्लेम अटक सकता है

5. क्लेम आसानी से पास कराने के लिए क्या करें?
सही जानकारी दें, पूरे दस्तावेज जमा करें और पॉलिसी की शर्तें ध्यान से समझें

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